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दिल्ली: सीएम केजरीवाल ने की ड्रेनेज मास्टर प्लान की समीक्षा, नाले-नालियों का बदलेगा ढांचा, नहीं भरेगा पानी
Tue, 24 Aug 2021 06:57 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 24 Aug 2021 06:57 PM IST
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अरविंद केजरीवाल
- फोटो : ANI
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राजधानी में बारिश होते ही जलभराव होने पर निरंतर किरकिरी होने के मद्देनजर दिल्ली सरकार हरकत में आ गई है। इस कड़ी में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को ड्रेनेज मास्टर प्लान पर जल मंत्री, जल बोर्ड के उपाध्यक्ष और जल बोर्ड के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान बारिश के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या बहुत जल्द दूर करने का निर्णय लिया गया।
इसके लिए कई योजनाएं बनाने का निर्णय लिया गया। इसमें नाले-नालियों में जरूरी बदलाव करने की योजना प्रमुख है। बैठक में जलमंत्री सत्येंद्र जैन, जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा और मुख्य सचिव समेत जल बोर्ड और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि आईआईटी दिल्ली की ओर से दिए गए सुझावों के मुताबिक नाले-नालियों में बदलाव किए जाएंगे। इसके बाद भारी बारिश के दौरान भी पानी की बेहतर निकासी हो सकेंगी। दिल्ली सरकार पता लगाएगी कि किस नाली का स्लोप खराब है, कौन सी नाली कहां मिलती है और किस नाली को किस नाले से जोड़ना है। इतना ही नहीं, हर नाली और नाले की अलग-अलग योजना बनाई जाएगी। इस संबंध में अधिकारियों को प्लान बनाने के निर्देश दिए गए। इसके लिए कंसल्टेंट हायर किए जाएंगे।
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दिल्ली में छोटे-बड़े करीब 2846 नाले हैं और इनकी लंबाई करीब 3692 किलोमीटर है। इन नालों का एक बड़ा हिस्सा पीडब्ल्यूडी के पास है और पीडब्ल्यूडी इसका नोडल विभाग भी है। दिल्ली को तीन प्रमुख प्राकृतिक जल निकासी बेसिन में विभाजित किया गया है। यह तीन जल निकासी बेसिन ट्रांस यमुना, बारापुलाह और नजफगढ़ है। इसके अलावा, कुछ बहुत छोटे जल निकासी बेसिन अरुणा नगर और चंद्रवाल भी हैं, जो सीधे यमुना में गिरते हैं।
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इसके लिए कई योजनाएं बनाने का निर्णय लिया गया। इसमें नाले-नालियों में जरूरी बदलाव करने की योजना प्रमुख है। बैठक में जलमंत्री सत्येंद्र जैन, जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा और मुख्य सचिव समेत जल बोर्ड और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि आईआईटी दिल्ली की ओर से दिए गए सुझावों के मुताबिक नाले-नालियों में बदलाव किए जाएंगे। इसके बाद भारी बारिश के दौरान भी पानी की बेहतर निकासी हो सकेंगी। दिल्ली सरकार पता लगाएगी कि किस नाली का स्लोप खराब है, कौन सी नाली कहां मिलती है और किस नाली को किस नाले से जोड़ना है। इतना ही नहीं, हर नाली और नाले की अलग-अलग योजना बनाई जाएगी। इस संबंध में अधिकारियों को प्लान बनाने के निर्देश दिए गए। इसके लिए कंसल्टेंट हायर किए जाएंगे।
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दिल्ली में छोटे-बड़े करीब 2846 नाले हैं और इनकी लंबाई करीब 3692 किलोमीटर है। इन नालों का एक बड़ा हिस्सा पीडब्ल्यूडी के पास है और पीडब्ल्यूडी इसका नोडल विभाग भी है। दिल्ली को तीन प्रमुख प्राकृतिक जल निकासी बेसिन में विभाजित किया गया है। यह तीन जल निकासी बेसिन ट्रांस यमुना, बारापुलाह और नजफगढ़ है। इसके अलावा, कुछ बहुत छोटे जल निकासी बेसिन अरुणा नगर और चंद्रवाल भी हैं, जो सीधे यमुना में गिरते हैं।
दिल्ली ड्रेनेज मास्टर प्लान से जलभराव रोकने की मंशा
दिल्ली ड्रेनेज मास्टर प्लान का उद्देश्य एक निश्चित समय सीमा के अंदर जल निकासी में सुधार करना है। मास्टर प्लान-2021 के अनुसार करीब 30-35 वर्षों के लिए जल निकासी के संदर्भ में एक मास्टर प्लान तैयार करना है। साथ ही मास्टर प्लान को चरणबद्ध तरीके से कार्यान्वयन के लिए कार्य योजना तैयार करना और दिल्ली मास्टर प्लान-2021 के अनुसार दिल्ली की जरूरतों को पूरा करने के लिए आगे की योजनाओं के साथ-साथ पहले पांच साल के लिए प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए उचित रिपोर्ट तैयार करना है।
ड्रेनेज मास्टर प्लान के लिए टेक्निकल एक्सपर्ट कमेटी का गठन
दिल्ली ड्रेनेज मास्टर प्लान-2021 को धरातल पर उतारने के लिए एक टेक्निकल एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी के पास कई जिम्मेदारियां हैं, जिसमें डिजाइन पैरामीटर या तकनीकी इनपुट जैसे वर्षा की तीव्रता, रिटर्न अवधि, रनऑफ गुणांक, प्रतिधारण अवधि आदि का निर्णय करना है, जिसका उपयोग सलाहकार ने दिल्ली के मास्टर प्लान तैयार करने के लिए करना है।
डिजिटल मॉडलिंग की मदद से जल निकासी प्रणाली का किया गया अध्ययन
दिल्ली की जल निकासी व्यवस्था में सुधार करने के लिए दिल्ली में फिजिकल ड्रेनेज सिस्टम का डिजिटल मॉडलिंग प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए अध्ययन किया गया है। इस प्रणाली के अध्ययन के बाद दो मॉडल बनाए गए हैं। हाइड्रोलॉजिकल मॉडल में नालियों में अपवाह का आंकलन करने के लिए मिट्टी और पानी का मूल्यांकन उपकरण करना है, वहीं अर्बन स्टॉर्म वॉटर मैनेजमेंट मॉडल में मौजूदा समस्याओं को हल करने के लिए जल निकासी समाधान और ड्रेन डायमेंशन प्रदान करना है।
ड्रेनेज मास्टर प्लान में की गई सिफारिशें
बरसाती पानी की नालियों पर अतिक्रमण न हो, नालियों में सीवेज न जाए, नालियों में कोई ठोस अपशिष्ट या सीएंडडी अपशिष्ट जाने की अनुमति नहीं दी जाए, बरसाती नालों की डी-सिल्टिंग की प्रभावशीलता व डी-सिल्टिंग कार्यक्रम का सार्वजनिक प्रदर्शन हो, बरसाती पानी सीवर सिस्टम में नहीं बहाया जाना चाहिए, नालियों के अंदर निर्माण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, एलिवेटेड रोड, मेट्रो की उपयोगिताओं और खंभों को बरसाती पानी की नालियों के अंदर अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, नए नालों का डिजाइन अलग से नहीं किया जाना चाहिए।
ड्रेनेज मास्टर प्लान के लिए टेक्निकल एक्सपर्ट कमेटी का गठन
दिल्ली ड्रेनेज मास्टर प्लान-2021 को धरातल पर उतारने के लिए एक टेक्निकल एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी के पास कई जिम्मेदारियां हैं, जिसमें डिजाइन पैरामीटर या तकनीकी इनपुट जैसे वर्षा की तीव्रता, रिटर्न अवधि, रनऑफ गुणांक, प्रतिधारण अवधि आदि का निर्णय करना है, जिसका उपयोग सलाहकार ने दिल्ली के मास्टर प्लान तैयार करने के लिए करना है।
डिजिटल मॉडलिंग की मदद से जल निकासी प्रणाली का किया गया अध्ययन
दिल्ली की जल निकासी व्यवस्था में सुधार करने के लिए दिल्ली में फिजिकल ड्रेनेज सिस्टम का डिजिटल मॉडलिंग प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए अध्ययन किया गया है। इस प्रणाली के अध्ययन के बाद दो मॉडल बनाए गए हैं। हाइड्रोलॉजिकल मॉडल में नालियों में अपवाह का आंकलन करने के लिए मिट्टी और पानी का मूल्यांकन उपकरण करना है, वहीं अर्बन स्टॉर्म वॉटर मैनेजमेंट मॉडल में मौजूदा समस्याओं को हल करने के लिए जल निकासी समाधान और ड्रेन डायमेंशन प्रदान करना है।
ड्रेनेज मास्टर प्लान में की गई सिफारिशें
बरसाती पानी की नालियों पर अतिक्रमण न हो, नालियों में सीवेज न जाए, नालियों में कोई ठोस अपशिष्ट या सीएंडडी अपशिष्ट जाने की अनुमति नहीं दी जाए, बरसाती नालों की डी-सिल्टिंग की प्रभावशीलता व डी-सिल्टिंग कार्यक्रम का सार्वजनिक प्रदर्शन हो, बरसाती पानी सीवर सिस्टम में नहीं बहाया जाना चाहिए, नालियों के अंदर निर्माण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, एलिवेटेड रोड, मेट्रो की उपयोगिताओं और खंभों को बरसाती पानी की नालियों के अंदर अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, नए नालों का डिजाइन अलग से नहीं किया जाना चाहिए।