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दिल्ली : व्यापार मेले में लाख के बने कंगनों ने मचाई धूम, कारीगर का दावा भी है दिलचस्प

Thu, 18 Nov 2021 05:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 18 Nov 2021 05:26 AM IST
सार

जयपुर के शादाब अहमद का दावा-हाथ से बनीं खास चूड़ियां 20 साल तक चमकती रहेंगी।

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Bracelets from jaipur made a splash in the trade fair in delhi
जयपुर से शादाब अहमद हाथ से बनाई लाख की चूड़ियां और कंगन लेकर आए हैं। - फोटो : amar ujala

विस्तार

प्रगति मैदान में लगे व्यापार मेले में जयपुर से आए लाख के बने कंगनों की खनक सुनी जा सकती है। जयपुर से शादाब अहमद हाथ से बनाई लाख की चूड़ियां और कंगन लेकर आए हैं। आम लोगों के लिए मेला तो 19 नवंबर को शुरू होगा, लेकिन शादाब की लाख की चूड़ियां धूम मचा रही हैं। हॉल संख्या-7 के एमएसएमई पवेलियन में बुधवार को इनकी दुकान ‘अप्सरा बैंगल्स’ पर खरीदारों की भीड़ लगी रही। इनके पास 40 डिजाइन हैं। तीन डिजाइन लाख और सीप के इस्तेमाल से बनाए हैं। शादाब ने बताया कि ये खास चूड़ियां करीब 20 साल तक ऐसे ही चमकती रहेंगी।

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दुल्हन के लिए दो स्पेशल सेट: शादाब के पास दुल्हन के लिए दो स्पेशल सेट हैं। पहले में 36 कड़े हैं, इसकी कीमत 800-2000 रुपये तक है जबकि दूसरे में दो कड़े और चार चूड़ियां हैं, इसकी कीमत 500 रुपये है। कंगन के अलग-अलग सेट हैं। राजस्थान में बंजारन महिलाएं कुहनी तक चूड़ा पहनती हैं, ये हाथी दांत से बने होते हैं। इसी के मुकाबले शादाब ने सीप और लाख से कंगन बनाए हैं।
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एलईडी बल्ब और चार्जेबल कड़े : पहली बार मेले में एलईडी बल्ब लगे चार्जेबल कड़े लेकर आए हैं। लाख के कड़ों पर ये लाइटें लगाई गई हैं। रंग बिरंगी लाइटें आकर्षित करती हैं। शादाब का परिवार 300 साल से जयपुर में लाख कला से जुड़े काम कर रहा है। इनके पिता हाजी इकराम अहमद को उनकी लाख कला के लिए संस्कृति मंत्रालय ने शिल्प सम्मान से नवाजा है। शादाब को महाराष्ट्र सरकार ने यशस्वी नेशनल अवॉर्ड दिया है।
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वह एशिया अवॉर्ड के लिए नामित हैं। उन्होंने बताया कि मदुरै में 29 देशों की मौजूदगी में ये अवॉर्ड उन्हें दिया जाएगा। एप्रीशिएशन सर्टिफिकेट मिल चुका है। दिसंबर में वह हैदराबाद जाकर 650 महिलाओं को लाख कला की ट्रेनिंग भी देने वाले हैं।

धातु के बर्तनों के मुकाबले मिट्टी के बर्तन
एमएसएमई पवेलियन में रौनक है। यहां हरियाणा से आए मिट्टी के बर्तन ऐसे हैं, जिन्हें देखकर घर में मौजूद धातु के बर्तनों को हटा देने का मन करेगा। इनमें कड़ाही, भगोने, फ्राई पेन, तवा, टिफिन, गिलास व ऐसे कई सामान हैं। नूंह जिले के गांव दोहा फिरोजपुर तहसील से कन्हैया लाल प्रजापति 300 सामान लाए हैं। 4000 रुपये की राधा कृष्ण की मूर्ति है, भगवान बुद्ध की मूर्ति 1500 रुपये की है। गांव में आशा सेल्फ हेल्प ग्रुप के साथ मिलकर 10 लोगों ने इसे बनाया है। उन्होंने बताया कि इस उम्मीद से आए हैं कि कोरोना की निराशा खत्म हो जाएगी।

लाख के इस्तेमाल से बना रहे मंदिर
शादाब 33 किलो लाख और 80 किलो पत्थरों से राम मंदिर बना रहे हैं। दिल्ली में अगले हुनर हाट में लोग इसे देख पाएंगे। इसका 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। लाख के फनकार रहे अपने पिता के बताए रास्ते पर चलते हुए वह मंदिर बना रहे हैं। उनके पिता श्रीराम को समाज का आदर्श मानते थे।


महिला उद्यमियों का साबरमती हॉल
एमएसएमई पवेलियन के 7-डी वाले हिस्से को साबरमती आश्रम का रूप दिया गया है। ये हॉल महिला उद्यमियों का भी है। प्रवेश द्वार पर गांधी जी हैं। यहां सूक्ष्म व लघु उद्योगों से बने सामान की भरमार है। अहमदाबाद से चंद्रिका श्रीलाल पुजारा हर्बल सामान के साथ आई हैं। लवली हर्बल शॉप पर कफ, कोल्ड, नजला, हेडेक, स्नोरिंग, माइग्रेन के लिए एक नेचुरल पावर बाम है। अस्वगंधा, अलसी तेल से बना नेचुरल पेन रिलीफ है। एलोवेरा, गुलाब जल, अलसी बीज, मच्छरमार हर्बल जेल भी है। छत्तीसगढ़ भरतपुर से जाग्रिती महिला उद्यमी नीलिमा 15 तरह के अचार, हल्दी के लड्डू, मसाले, पापड़, सोंठ के लड्डू, आंवले का अचार लेकर आई हैं।

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