Auto Permit Racket : बुराड़ी में 19 मृत ऑटो चालकों को दिखाया जिंदा, और होंगे खुलासे, बड़े फाइनेंसर हैं आरोपी
ये रैकेट अथॉरिटी में गहरी पैठ बना चुका है। एसीबी प्रमुख मधुर वर्मा ने बताया कि ये बहुत बड़ा रैकेट है। इसमें कई सनसनीखेज खुलासे आने आना बाकी है।
विस्तार
बुराड़ी अथॉरिटी में ऑटो परमिट ट्रांसफर करने का रैकेट बहुत बड़ा हैं और कई सालों से चल रहा है। ये रैकेट अथॉरिटी में गहरी पैठ बना चुका है। एसीबी प्रमुख मधुर वर्मा ने बताया कि ये बहुत बड़ा रैकेट है। इसमें कई सनसनीखेज खुलासे आने आना बाकी है। अभी शुरूआती जांच है। जांच पूरी होने के बाद अथॉरिटी के बड़े अधिकारी समेत काफी संख्या में लोगों की गिरफ्तारी की संभावना है।
उन्होंने बताया कि एसीपी जनरैल सिंह की जांच में पता लगा कि मृतक ऑटो चालकों के परिजनों ने बताया कि ऑटो परमिट के स्थानांतरण/नवीनीकरण के लिए उन्होंने न तो कोई आवेदन दिया और न ही उनकी जानकारी में कुछ है। जांच में पता लगा कि मृतक ऑटो चालक परमिट धारक की वर्ष 2021 में मृत्यु बहुत पहले ही हो गई थी। बाद में फर्जी आवेदनों के आधार पर उनके परमिट अन्य लोगों के नाम पर स्थानांतरित कर दिए गए थे। जिन लोगों को परमिट दिया गया। इन लोगों से 10 से 15 लाख रुपये लिए गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में सिर्फ 19 मामले आए हैं।
ऑटो चालक को ऐसे निशाना बनाते थे
- मृत ऑटो चालक का पताकर उसके परिजनों को गुमराह कर परमिट ले लेते हैं
- अथॉरिटी में ऑटो चालक को जिंदा दिखाकर उनके परमिट को दूसरे के नाम ट्रांसफर करा देते हैं
- अपाहिज हो चुके ऑटो चालकों के परमिट को धोखे व गुमराह कर हासिल कर लेते थे
- किराए पर ऑटो देने वाले ऑटो मालिकों को गुमराह कर उनसे परमिट हासिल कर लेते थे
- पुराने व खत्म हो चुके परमिट भी अथॉरिटी से निकाल लेते थे
ऑटो परमिट के ट्रांसफर का इसलिए चलता है खेल
एसीबी प्रमुख ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत एक लाख ऑटो के परमिट ही रजिस्टर्ड हैं। आदेशों के तहत कोई नया ऑटो का नया परमिट रजिस्टर्ड नहीं होता। ऐसे में अथॉरिटी अधिकारी, फाइनेंस, डीलर व दलाल मिलकर पुराने ऑटो के परमिट को अवैध तरीके से हासिल करते हैं। ये ऑटो चालक व उनके परिजनों को 10 से 15 हजार दे देते हैं और उन्हें गुमराह कर परमिट समेत ऑटो खरीद लेते हैं। इसके बाद ये अगली पार्टी को ऑटो व परमिट 10 से 15 लाख रुपये में बेच देते हैं। ये पुराने ऑटो को मायापुरी में स्क्रेप करवा देते हैं और उस परमिट के आधार पर नया ऑटो खरीद लेते हैं।
दिल्ली के काफी बड़े फाइनेंसर हैं आरोपी
अनिल सेठी झील में सतनाम ऑटो डील्स में डीलिंग करते हैं। उनके पास डीलिंग टीएसआर और फाइनेंसिंग की 07 दुकानें हैं। हरपाल सिंह कोचर कैपिटल हिंद फाइनेंस और जीआरडी मोटर्स, तीस हजारी, नई दिल्ली के फाइनेंसर/ डीलर/ मालिक हैं। नदीम डीलर है और भजनपुरा में न्यू शिव ऑटो डील्स से ऑफिस चलाते हैं। मनोज कुमार न्यू आशीर्वाद नाम से ऑफिस चलाते हैं। फाइनेंसर सतबीर करावल नगर में मैसर्स हरियाणा न्यू पल्सर और राधे मोहन के नाम से फाइनेंस कार्यालय चलाते हैं। डीलर हरप्रीत सिंह उत्तम नगर में मेसर्स स्वर्ण ऑटो कार्यालय चलाते हैं। डीलर दीपक चावला बेरीवाला बाग मायापुरी में मैसर्स चावला मोटर्स आफिस चलाते हैं। गिरफ्तार आरोपियों में सबसे बुजुर्ग डीलर सुभाष चन्द्र मोती नगर में एस.एस. ऑटो और डीलर बिट्टू चौधरी मेसर्स देव मोटर्स नाम से कार्यालय चलाते हैं। अजीत कुमार सतनाम ऑटो डील (गुडमैन) में बतौर प्रबंधक के तौर पर काम करते हैं।
ये हैं आरोपी
एसीबी प्रमुख ने बताया कि आरोपियों की पहचान सेक्टर-21, पॉकेट 8, रोहिणी, दिल्ली में रह रहे और मकान नंबर 433, दिचाऊ कलां के मूल निवासी बुराड़ी ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी में मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर के पद पर तैनात सुरेश कुमार, एमजी-रोड, आदर्श नगर, दिल्ली निवासी डीलर अनिल सेठी, बैकसाइड राजौरी गार्डन निवासी फाइनेंसर 3. हरपाल सिंह कोचर, स्ट्रीट नंबर 1, गौतम विहार, गढ़ी मेंडू निवासी डीलर नदीम अहमद, गली नंबर 18ए, पूर्वी गोकलपुर निवासी डीलर मनोज कुमार, पश्चिम करावल नगर निवासी सतबीर, पंचदीप अपार्टमेंट, विकास पुरी निवासी डीलर हरप्रीत सिंह, माया एन्क्लेव निवासी डीलर दीपक चावला, मोती नगर निवासी डीलर सुभाष चंद्र, भजनपुरा निवासी डीलर बिट्टू चौधरी, शाहदरा निवासी डीलर का प्रबंधक अजीत कुमार, करतार नगर चतुर्थ पुस्ता निवासी दलाल अनूप शर्मा, सुदर्शन पार्क, मंदिर वाली गली निवासी दलाल दीपक महम और नंद नगरी निवासी दलाल रवि वर्मा के रूप में हुई।