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UP Elections 2022: अनुप्रिया पटेल बोलीं- इतिहास गवाह है, यूपी में सरकार उसी की बनेगी, जिसे पिछड़ों का समर्थन मिलेगा

Sun, 26 Dec 2021 05:47 PM IST
अनुराग सक्सेना पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Sun, 26 Dec 2021 05:47 PM IST
सार

अनुप्रिया पटेल राजनीतिक रूप से देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्य में फिर से भाजपा की अगुआई वाले गठबंधन में सरकार बनने के लिए आश्वस्त हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय बनाए रखने के लिए ओबीसी को और ज्यादा राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना होगा।

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UP Elections 2022: Anupriya Patel said - History is witness, the government in UP will be formed by those who will get the support of the backwards
अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल। - फोटो : अमर उजाला - फाइल फोटो

विस्तार

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी और अपना दल (एस) की प्रमुख अनुप्रिया पटेल ने राज्य में पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व पर जोर देते हुए कहा है कि यूपी में जिस पार्टी या गठबंधन को पिछड़ा वर्ग का समर्थन मिला है, लखनऊ में सरकार उसी की बनी है।

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अनुप्रिया पटेल राजनीतिक रूप से देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्य में फिर से भाजपा की अगुआई वाले गठबंधन में सरकार बनने के लिए आश्वस्त हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय बनाए रखने के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को और ज्यादा राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना होगा।

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पीटीआई को दिए इंटरव्यू में केंद्रीय मंत्री पटेल ने केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा नेता अमित शाह की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि उनकी बनाई गई जातिगत समानता के कारण राजग को पिछले लगातार तीन चुनावों में भारी जीत मिली है। उन्होंने कहा, ''अमित शाह जी ने उत्तर प्रदेश में सभी जातियों, खासकर पिछड़ों को उनका उपयुक्त स्थान देते हुए राज्य में बहुत खूबसूरती से काम किया है।''

यूपी में राजग बहुत अच्छी स्थिति में

उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) बहुत अच्छी स्थिति में है। उन्होंने कहा, मुझे पूरा विश्वास है कि हम एक बार फिर पूर्ण बहुमत में सरकार बनाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में जातीय गणित संतुलन बनाए रखने के लिए गठबंधन जारी रखना चाहिए। उन्होंने और ज्यादा सीटों पर ओबीसी उम्मीदवारों को टिकट दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर आप राजनीतिक दलों के चुनावी प्रदर्शनों और यूपी में सरकार गठन का इतिहास देखें तो पता चल जाएगा कि ओबीसी जिस भी पार्टी या गठबंधन की तरफ गए, राज्य में उसी की सरकार बनी है।

पीएम मोदी वांछित वर्गों के लिए हमेशा से संवेदनशील

उन्होंने कहा कि वे और उनकी पार्टी ओबीसी को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के पक्ष में हमेशा रही हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी समाज के वांछित वर्गों के लिए हमेशा बहुत संवेदनशील रहे हैं। अगर आप वास्तव में सामाजिक न्याय कायम रखना चाहते हैं तो ओबीसी को खासरकर उत्तर प्रदेश में और ज्यादा प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए, जहां उनकी सबसे ज्यादा जनसंख्या है।

मोदी सरकार की योजनाएं पिछड़ों और वांछितों के लिए

आगामी चुनाव में पिछड़े वर्ग से समर्थन मिलने के लिए आशावान मिर्जापुर से सांसद ने कहा कि राजग के समाज के विभिन्न वर्गों से अच्छे संबंध हैं क्योंकि मोदी सरकार की योजनाएं गरीबों और समाज के वांछित वर्ग की सहायता के लिए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भी पिछड़ों की आकांक्षाओं और जरूरतों के लिए हमेशा संवेदनशील रहे हैं। यह तभी दिख गया था जब उन्होंने नीट मेडिकल परीक्षा के ऑल इंडिया श्रेणी में ओबीसी आरक्षण सुनिश्चित किया था।

सीट बंटवारे पर चल रही बात

भाजपा के साथ सीट वितरण पर पटेल ने कहा कि फिलहाल वे कोई संख्या नहीं बता सकती हैं लेकिन दोनों पार्टियां गठबंधन में काम कर रही हैं और सीट बंटवारे पर बात चल रही है। उन्होंने कहा, दोनों पार्टियां सकारात्मक सोच के साथ और बहुत सकारात्मक तरीके से काम कर रही हैं। हम जल्द ही सीट बंटवारे पर अपनी व्यवस्था की घोषणा करेंगे।

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राज्य में 40 प्रतिशत मतदाता हैं ओबीसी

ओबीसी वर्ग के कुर्मी समाज से आने वालीं पटेल ने जातिगत जनगणना की भी वकालत की है, जो भाजपा को असहज करता रहा है। विधानसभा चुनावों के पास आते ही यूपी की सभी प्रमुख पार्टियां मैदान में कूद पड़ी हैं और ओबीसी मतदाताओं को रिंझाने के लिए कोई कसर बाकी नहीं रख रही हैं। राज्य में 40 प्रतिशत मतदाता ओबीसी हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव और 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा की यूपी में तीन लगातार जीतों के लिए गैर-यादव ओबीसी वर्ग को प्रमुख फैक्टर माना गया है। ओबीसी में सबसे ज्यादा वोट प्रतिशत वाले यादव आम तौर पर समाजवादी पार्टी की तरफ जाते हैं, क्योंकि पार्टी प्रमुख उनके ही वर्ग से हैं। यूपी की 403 सदस्यों वाली विधानसभा में भाजपा के 100 से ज्यादा विधायक ओबीसी वर्ग हैं, जो कुल सदस्य संख्या का एक-तिहाई होता है।

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