फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   AIIMS detecting infection in the eyes of Covid dead

कोविड मृतकों की आंखों में संक्रमण का पता लगा रहा एम्स

Tue, 07 Sep 2021 07:03 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 07 Sep 2021 07:03 PM IST
विज्ञापन
AIIMS detecting infection in the eyes of Covid dead
नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण की वजह से मरने वालों की आंखें दान में नहीं ली जा रही हैं। चिकित्सीय तौर पर इन आंखों को प्रत्यारोपण के लिए उचित नहीं माना जा रहा है, लेकिन इससे कॉर्निया प्रत्यारोपण को लेकर भी कठिनाई हो रही है। इसलिए नई दिल्ली स्थित एम्स के डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान संस्थान (आरपी सेंटर) के डॉक्टरों ने कोरोना मृतकों की आंखों की जांच करना शुरू कर दिया है। इसके लिए डॉक्टरों ने पांच मृतकों की आंखें ली हैं और अब इनकी जांच की जा रही है, ताकि पता चल सके कि क्या वाकई में कोरोना वायरस की वजह से आंखों को नुकसान होता है।
विज्ञापन

एम्स आरपी सेंटर के प्रमुख डॉ. जेएस तितियाल का कहना है कि दुनिया में अभी तक कहीं भी कॉर्निया में कोरोना वायरस की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एहतियात के तौर पर दिशा-निर्देशों में कोरोना संक्रमित मृतक का नेत्रदान मान्य नहीं है। वहीं, डॉ. नम्रता ने बताया कि इस समय दो अलग-अलग चिकित्सीय अध्ययन शुरू हो चुके हैं। यह दोनों एक-दूसरे से काफी जुड़े हुए हैं। एक अध्ययन में आंख के हर हिस्से की जांच की जा रही है, ताकि यह पता चले कि कोरोना वायरस किस हिस्से को प्रभावित करता है। इसमें रेटिना और ऑप्टिक नर्व इत्यादि शामिल हैं, जबकि दूसरे चिकित्सीय अध्ययन में कॉर्निया पर कोरोना वायरस के प्रभाव की जांच हो रही है। अगर इस अध्ययन में वायरस की पुष्टि नहीं होती है तो यह संभव है कि आगामी दिनों में कोरोना से मरने वालों का नेत्रदान किया जा सके।
विज्ञापन

5.50 फीसदी की आंखों का नहीं हो सका प्रत्यारोपण
डॉ. तितियाल ने बताया कि कोरोना संक्रमण से मरने वालों की आंखों को प्रत्यारोपण में शामिल नहीं किया जा सकता है। आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2020 से जुलाई 2021 के बीच 5.50 फीसदी यानी 24 कोरोना मृतकों की आंखों को प्रत्यारोपण में शामिल नहीं किया जा सका। जब कोई नेत्रदाता मिलता था तो पहले उसकी कोरोना जांच कराई जाती थी। रिपोर्ट संक्रमित मिलने पर उसकी आंखें दान में नहीं ले सकते थे, लेकिन कई बार ऐसा भी हुआ कि नेत्रदान के बाद मृतक के कोरोना संक्रमित होने का पता चला। ऐसे 5.50 फीसदी मामले एम्स में देखने को मिले, जिन्हें कॉर्निया प्रत्यारोपण में शामिल नहीं किया गया, लेकिन उन्हें चिकित्सीय अध्ययन में जरूर शामिल किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed