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Delhi News: विज्ञान और संस्कृति को जोड़ने के लिए किया समझौता
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आईजीएनसीए व बीएसआईपी मिलकर शोध, धरोहर संरक्षण, संग्रहालय विकास, प्रशिक्षण व जन-जागरूकता कार्य करेंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) और लखनऊ के बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज (बीएसआईपी) ने मिलकर विज्ञान और संस्कृति को जोड़ने के लिए ऐतिहासिक समझौता किया। दोनों संस्थान मिलकर शोध, धरोहर संरक्षण, संग्रहालय विकास, प्रशिक्षण और जन-जागरूकता जैसे कार्य करेंगे। ताकि भारत की समृद्ध विरासत को देश और दुनिया में बेहतर तरीके से पेश किया जा सके।
समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान बीएसआईपी के निदेशक प्रो. महेश ठक्कर और आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने इस पहल को अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। डॉ. जोशी ने बताया, 2017 में शुरू हुए आईजीएनसीए के तीन पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम अब बढ़कर 11 हो गए हैं, जिनमें युवाओं से लेकर वरिष्ठ नागरिक तक हिस्सा लेते हैं। ये पाठ्यक्रम किताबों तक सीमित न रहकर व्यावहारिक अनुभव और पारंपरिक ज्ञान दोनों को साथ लेकर चलते हैं।
कार्यक्रम में 11 पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए ओरिएंटेशन भी हुआ। शुरुआत सरस्वती वंदना और उपनिषद के श्लोकों से हुई, इसके बाद छात्राओं ने नृत्य प्रस्तुतियां दीं। यह समझौता विज्ञान की सटीकता और संस्कृति की गहराई को मिलाकर भारत की धरोहर को नई रोशनी में सामने लाने का प्रयास है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) और लखनऊ के बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज (बीएसआईपी) ने मिलकर विज्ञान और संस्कृति को जोड़ने के लिए ऐतिहासिक समझौता किया। दोनों संस्थान मिलकर शोध, धरोहर संरक्षण, संग्रहालय विकास, प्रशिक्षण और जन-जागरूकता जैसे कार्य करेंगे। ताकि भारत की समृद्ध विरासत को देश और दुनिया में बेहतर तरीके से पेश किया जा सके।
समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान बीएसआईपी के निदेशक प्रो. महेश ठक्कर और आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने इस पहल को अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। डॉ. जोशी ने बताया, 2017 में शुरू हुए आईजीएनसीए के तीन पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम अब बढ़कर 11 हो गए हैं, जिनमें युवाओं से लेकर वरिष्ठ नागरिक तक हिस्सा लेते हैं। ये पाठ्यक्रम किताबों तक सीमित न रहकर व्यावहारिक अनुभव और पारंपरिक ज्ञान दोनों को साथ लेकर चलते हैं।
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कार्यक्रम में 11 पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए ओरिएंटेशन भी हुआ। शुरुआत सरस्वती वंदना और उपनिषद के श्लोकों से हुई, इसके बाद छात्राओं ने नृत्य प्रस्तुतियां दीं। यह समझौता विज्ञान की सटीकता और संस्कृति की गहराई को मिलाकर भारत की धरोहर को नई रोशनी में सामने लाने का प्रयास है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा।
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