वर्क फ्रॉम होम की तर्ज पर अब टेस्ट-फ्रॉम-होम भी संभव, छात्र घर बैठे दे सकेंगे परीक्षाएं
कोरोना वायरस का कहर इस वक्त पूरी दुनिया पर मचा हुआ है। इसने न सिर्फ लोगों को घरों में कैद रहने पर मजबूर कर दिया है बल्कि सभी की रफ्तार पर ब्रेक सा लगा दिया है। इस महामारी की मार न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रही है बल्कि शैक्षिक संस्थान भी इसकी जद में हैं। आज देश के सभी स्कूल-कॉलेज बंद पड़े हैं। बच्चों के बोर्ड एग्जाम नहीं हो पाए, एंट्रेंस एग्जाम को स्थगित कर दिया गया है। हालांकि अब कई स्कूल और यूनिवर्सिटी ऑनलाइन क्लास शुरू कर चुकी हैं लेकिन परीक्षाएं अब भी नहीं हो पा रही हैं। इसी के मद्देनजर एक सॉफ्टेवयर बनाया गया है जिसका नाम है टेस्ट फ्रॉम होम। इसे एडटेक कंपनी अगलासेम ने बनाया है। कंपनी का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित यह सॉफ्टवेयर पूर्णतयः नकल को रोकने में भी सक्षम है।
उन्होंने इस सॉफ्टवेयर का उपयोग अपने एक स्कॉलरशिप प्रोग्राम एटीएससी में किया था। पिछले साल यह प्रोग्राम दिसंबर 2019 में कराया गया था जिसे बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों के बच्चों ने बहुत सराहा था क्योकि यह स्कॉलरशिप टेस्ट वे अपने घर से मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से दे सके थे।
वैश्विक महामारी कोरोना उस समय फैली है जब लगभग सभी प्रदेशों की बोर्ड परीक्षा, कॉलेजों की परीक्षा और राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाएं होनी हैं। ऐसे में ज्यादातर बोर्ड ने परीक्षा को स्थगित कर दिया है तो किसी-किसी बोर्ड ने बिना परीक्षा के ही छात्रों को पास कर दिया है। एंट्रेंस एग्जाम कराने वाली एजेंसीज बिना एग्जाम सेंटर के होम-बेस्ड परीक्षा के लिए विचार कर रही हैं।
विश्व स्तर की परीक्षा कराने वाली एजुकेशनल टेस्टिंग सर्विस ने दो अप्रैल से जीआरई के लिए टेस्ट एट होम की शुरुआत कर दी है। इसके अलावा बहुत सारे स्कूल व्हाट्सएप्प, जूम के माध्यम से बच्चों को पढ़ा रहे हैं। कई स्कूल ट्रस्ट-बेस्ड-टेस्ट करावा रहे हैं जिसमें वे अभिभावकों को ईमेल, व्हाट्सएप के माध्यम से प्रश्नों को भेज रहे हैं और उसी माध्यम बच्चों के उत्तरों को ले रहे हैं।
महामारी के कारण केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने छात्रों को पढ़ाई जारी रखने के लिए डायरेक्ट टू होम टीवी के माध्यम से शैक्षणिक चैनल और ऑनलाइन पोर्टल सहित कई व्यवस्थाएं की हैं। लेकिन एग्जाम के लिए अभी तक कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है।
हालांकि अगलासेम मानना है कि उनके द्वारा निर्मित इस सॉफ्टवेयर के द्वारा बिना परीक्षा केंद्र के नकल रोधी परीक्षा आयोजित कराना संभव है। उनका यह सॉफ्टवेयर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के द्वारा परीक्षार्थियों चेहरे के हाव-भाव, आवाज, वहां के वातावरण और उनके कार्य का आंकलन करके परीक्षा को पूर्णतयः नकलरोधी बना देता है।