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दिल्ली में शराब के सेवन करने की आयु सीमा 25 से घटकर 21 हुई, सरकार ने की सरकारी ठेके बंद करने की घोषणा

Tue, 23 Mar 2021 01:05 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 23 Mar 2021 01:05 AM IST
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Age limit for consumption of alcohol in Delhi reduced from 25 to 21, the government announced the closure of government contracts
शराब की दुकानों के लिए नए नियम के संदर्भ में दिल्ली सचिवालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलत? - फोटो : Ashram
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति में बड़ा बदलाव किया है, जिसके तहत शराब की सभी सरकारी दुकानें बंद होंगी। वहीं, शराब का सेवन करने वालों की उम्र 25 से घटाकर 21 साल कर दी है। छोटी जगहों में दुकान खोलने की इजाजत नहीं दी जाएगी। कम से कम 500 वर्ग मीटर एरिया में ही दुकान खोलने की अनुमति होगी। दुकानदार ही यह सुनिश्चित करेंगे कि दुकान के सामने कोई शराब का सेवन तो नहीं कर रहा है।
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में नई आबकारी नीति को मंजूरी दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति शराब माफिया पर करारी चोट है। माफिया इसमें बाधा डालने का पूरा प्रयास करेंगे। दिल्ली सरकार ने शिक्षा, पानी, स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों में माफियाराज को समाप्त किया और अब आबकारी क्षेत्र में भी सुधार किया जा रहा है।
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उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कैबिनेट की फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि अब शराब की दुकानों के बाहर लंबी लाइन नहीं लगेगी और अवैध शराब की दुकानें बंद होंगी। दिल्ली में शराब की तस्करी रोकने से आबकारी विभाग के राजस्व में 20 प्रतिशत यानी 2000 करोड़ रुपये तक की वृद्धि होगी। अब सरकार ने शराब की दुकानें नहीं चलाने का निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, असम, ओडिसा, तमिलनाडु की तरह अब दिल्ली में भी शराब खरीदने की उम्र 21 वर्ष होगी, जबकि गोवा व आंध्र प्रदेश में यह सीमा 18 वर्ष है। जहरीली शराब पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली में भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय जांच लैब बनेगा।
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सिसोदिया ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि शराब वितरण को समान बनाया जाएगा। इसके लिए जहां शराब की दुकानें अधिक हैं वहां से हटाकर उन्हें उन इलाकों में खोला जाएगा जहां शराब की दुकानें काफी कम हैं या नहीं के बराबर हैं। दिल्ली में 272 वार्ड हैं, इनमें से 79 में शराब की एक भी दुकान नहीं है। वहां अवैध रूप से शराब बेची जाती है। शराब की दुकानों के असमान वितरण से दिल्ली में शराब माफिया का बोलबाला है। राजधानी में अवैध शराब की करीब 2 हजार दुकानें हैं। शराब माफिया की वजह से अपराध होता है।
सरकारी ठेकों पर है माफियाराज
सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली सरकार ने राज्य में सभी शराब के सरकारी ठेके बंद करने का फैसला लिया है। इनमें चोरी की शिकायतें मिल रही हैं। दिल्ली में 40 प्रतिशत प्राइवेट ठेके हैं और 60 प्रतिशत सरकारी। प्राइवेट ठेकों से तो ज्यादा आबकारी टैक्स मिलता है, लेकिन सरकारी से काफी कम। क्योंकि, वहां माफिया का राज है। सरकारी दुकानों में जगह कम होने से वहां शराब खरीदने वालों की लंबी कतार लगी होती है। इस सिस्टम में सुधार लाने के लिए तमाम सरकारी दुकानों को बंद किया जाएगा। उनकी जगह प्राइवेट सेक्टर को लाइसेंस दिए जाएंगे।
नई दुकानें नहीं खुलेंगी
सिसोदिया ने कहा कि 2016 के बाद से शराब की एक भी नई दुकान नहीं खोली गई है। दिल्ली में कुल 850 दुकानें हैं। आगे भी नई दुकान नहीं खोली जाएंगी। निजी ठेके के लिए नियम व शर्ते तय की गई हैं। 500 वर्ग मीटर में ही शराब की बिक्री की जाएगी। शराब की बिक्री दुकान के अंदर होगी। सड़क पर लाइन में लगकर शराब की खरीदारी नहीं होगी। सड़क की तरफ भी किसी दुकान का गेट नहीं होगा।
नोएडा के बराबर हुई उम्र
सिसोदिया ने कहा कि शराब का सेवन करने और खरीदने वालों की उम्र में कटौती की मांग लंबे समय से की जा रही थी। दिल्ली में शराब पीने की उम्र अब उत्तर प्रदेश के नोएडा के बराबर नई नीति के तहत की गई है।
सरकार का खजाना भरेगा
नई आबकारी नीति से सरकार के राजस्व में 1500 से 2000 करोड़ रुपये तक बढ़ने की उम्मीद है। राजस्व बढ़ने के साथ शराब माफिया व अपराध पर भी लगाम लगेगी। शराब की तस्करी रोकने से आबकारी विभाग के राजस्व में 20 प्रतिशत यानी 2000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी। दिल्ली में अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की शराब की बिक्री की जाएगी।

विशेषज्ञ कमेटी ने लिया निर्णय
राजस्व के नुकसान को ठीक करने के लिए विशेषज्ञों की कमेटी बनाई थी। जनता की तरफ से 14,700 सुझाव मिले। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कैबिनेट में मंत्री समूह बनाया। सुझावों और मौजूदा सिस्टम का गंभीरता से अध्ययन किया गया। कैबिनेट में उन सुझावों को स्वीकार किया गया। 45 वार्ड ऐसे हैं, जहां एक दुकान है और कुछ वार्ड ऐसे हैं, जहां पर दो दुकानें हैं। दिल्ली में 272 वार्डों में से 158 ऐसे हैं, अर्थात 272 वार्ड में से 58 प्रतिशत में शराब की दुकानें हैं ही नहीं या है तो इक्का-दुक्का। कुछ वार्डों में तीन दुकानें हैं। दिल्ली में केवल 8 प्रतिशत एरिया ऐसा है, जहां सामान्य तौर पर दुकानें हैं, ऐसे 37 वार्ड हैं। 54 वार्डों में 6 से अधिक दुकानें हैं और किसी वार्ड में 10 से भी ज्यादा दुकानें हैं। यानी कि 20 प्रतिशत दिल्ली में शराब की ज्यादा दुकानें हैं।
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