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ऑक्सीजन विवाद में घिरी आप सरकार, कांग्रेस-भाजपा ने किये सियासी वार
Sat, 26 Jun 2021 06:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 26 Jun 2021 06:49 AM IST
सार
- कांग्रेस ने कहा, जिम्मेदार लोगों पर दर्ज हो हत्या का मुकदमा
- भाजपा ने मांगा केजरीवाल से इस्तीफा
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विस्तार
ऑक्सीजन के मामले पर दिल्ली सरकार घिर गई है। कांग्रेस और भाजपा ऐसे में उस पर हमलावर हैं। कांग्रेस ने तो दिल्ली की केजरीवाल सरकार के साथ ही केंद्र सरकार पर भी हमला बोला है।
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी के लिए दिल्ली और केंद्र सरकार पर कांग्रेस ने सीधा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस ने इसके लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री और केंद्र के नेताओं समेत जिम्मेदार अधिकारियों पर भी हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। कहा कि खराब प्रबंधन और सरकारों की नाकामी से लोगों की मौत हुई।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार ने सुप्रीम कोर्ट की ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में 1140 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग की गई थी। दूसरे राज्यों के हिस्से के ऑक्सीजन की दिल्ली में आपूर्ति से उन 12 राज्यों को भी ऑक्सीजन की कमी से परेशानियों के दौर से गुजरना पड़ा। इससे साफ हो जाता है कि अधूरी तैयारियों का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ा। कमेटी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ऑक्सीजन की कमी का दिल्ली सरकार ने हवाला दिया।
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दिल्ली को 289 मीट्रिक टन की जरूरत के बावजूद 300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति जारी थी। सच्चाई यह है कि ऑक्सीजन की कमी से नहीं, बल्कि दिल्ली सरकार के कुप्रबंधन के कारण दिल्लीवासियों को ऑक्सीजन की किल्लत से जूझना पड़ा और मौतें भी हुईं। स्थिति स्पष्ट न होने से हजारों लोग सड़कों पर ऑक्सीजन के लिए भटकते रहे। इसके लिए दिल्ली की केजरीवाल सरकार और उनकी पार्टी के नेताओं के साथ साथ केंद्र के मंत्री ओर नेता भी जिम्मेदार हैं।
प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है। सांसद होने के नाते डॉ. हर्षवर्द्धन की भी जिम्मेदारी थी कि ऑक्सीजन की कमी की स्थिति में सुधार करने के लिए कदम उठाना चाहिए।
जरूरत से ज्यादा ऑक्सीजन थी तो क्यों हुई मौतें
ऑडिट रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली को 289 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत थी, जबकि 300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही थी। अगर यह सही था तो ऑक्सीजन की किल्लत से क्यों जानें गईं। दिल्ली में ऑक्सीजन स्टोरेज का इंतजाम नहीं था। अस्पतालों में कमी थी, जिससे लोगों को भटकना पड़ा। जिस तरह दिल्ली सरकार ने ऑक्सीजन की कमी होने का शोर मचाया, फिर बाद में नजदीकी राज्यों को भी ऑक्सीजन की आपूर्ति के सक्षम बताया। सरकारों के कुप्रबंधन का खामियाजा लोगों को जान गंवाकर भुगतना पड़ा।
भाजपा ने मांगा मुख्यमंत्री से इस्तीफा
प्रदेश भाजपा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री समेत पूरे कैबिनेट पर आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की है। आरोप मढ़ा है कि दिल्ली सरकार के ऑक्सीजन प्रबंधन ठीक नहीं होने की वजह से अफरातफरी का माहौल बना और लोगों की जान चली गई।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि कोरोना संकट में ऑक्सीजन की सरकार निर्मित कमी से मारे जाने वाले लोगों की वास्तव में हत्या हुई है। केजरीवाल सरकार इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए। गुप्ता ने कहा कि ऑक्सीजन ऑडिट मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट के बाद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन के खिलाफ हत्या और आपराधिक षड्यंत्र के मामलों में मुकदमे दर्ज होने चाहिए।
गुप्ता ने बताया कि उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में ऑक्सीजन की भारी मांग के बाद एक ऑडिट समिति गठित की थी। इस समिति की अंतरिम रिपोर्ट में दिल्ली सरकार को जरूरत से 4 गुना ज्यादा ऑक्सीजन की मांग करने का दोषी ठहराते हुए कहा गया है कि इस तरह की मांग से देश के दूसरे राज्यों में भी ऑक्सीजन संकट खड़ा हो सकता था। समिति की रिपोर्ट के हवाले से विधानसभा नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी और प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक गोयल देवराहा ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भाजपा ने केजरीवाल सरकार की नाकामी, कुप्रबंध और विफलताओं को लेकर जो भी आरोप लगाए थे, वे सभी सिद्ध हो गए हैं।
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कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी के लिए दिल्ली और केंद्र सरकार पर कांग्रेस ने सीधा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस ने इसके लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री और केंद्र के नेताओं समेत जिम्मेदार अधिकारियों पर भी हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। कहा कि खराब प्रबंधन और सरकारों की नाकामी से लोगों की मौत हुई।
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कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार ने सुप्रीम कोर्ट की ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में 1140 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की मांग की गई थी। दूसरे राज्यों के हिस्से के ऑक्सीजन की दिल्ली में आपूर्ति से उन 12 राज्यों को भी ऑक्सीजन की कमी से परेशानियों के दौर से गुजरना पड़ा। इससे साफ हो जाता है कि अधूरी तैयारियों का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ा। कमेटी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ऑक्सीजन की कमी का दिल्ली सरकार ने हवाला दिया।
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दिल्ली को 289 मीट्रिक टन की जरूरत के बावजूद 300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति जारी थी। सच्चाई यह है कि ऑक्सीजन की कमी से नहीं, बल्कि दिल्ली सरकार के कुप्रबंधन के कारण दिल्लीवासियों को ऑक्सीजन की किल्लत से जूझना पड़ा और मौतें भी हुईं। स्थिति स्पष्ट न होने से हजारों लोग सड़कों पर ऑक्सीजन के लिए भटकते रहे। इसके लिए दिल्ली की केजरीवाल सरकार और उनकी पार्टी के नेताओं के साथ साथ केंद्र के मंत्री ओर नेता भी जिम्मेदार हैं।
प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है। सांसद होने के नाते डॉ. हर्षवर्द्धन की भी जिम्मेदारी थी कि ऑक्सीजन की कमी की स्थिति में सुधार करने के लिए कदम उठाना चाहिए।
जरूरत से ज्यादा ऑक्सीजन थी तो क्यों हुई मौतें
ऑडिट रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली को 289 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत थी, जबकि 300 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही थी। अगर यह सही था तो ऑक्सीजन की किल्लत से क्यों जानें गईं। दिल्ली में ऑक्सीजन स्टोरेज का इंतजाम नहीं था। अस्पतालों में कमी थी, जिससे लोगों को भटकना पड़ा। जिस तरह दिल्ली सरकार ने ऑक्सीजन की कमी होने का शोर मचाया, फिर बाद में नजदीकी राज्यों को भी ऑक्सीजन की आपूर्ति के सक्षम बताया। सरकारों के कुप्रबंधन का खामियाजा लोगों को जान गंवाकर भुगतना पड़ा।
भाजपा ने मांगा मुख्यमंत्री से इस्तीफा
प्रदेश भाजपा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री समेत पूरे कैबिनेट पर आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की है। आरोप मढ़ा है कि दिल्ली सरकार के ऑक्सीजन प्रबंधन ठीक नहीं होने की वजह से अफरातफरी का माहौल बना और लोगों की जान चली गई।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने कहा कि कोरोना संकट में ऑक्सीजन की सरकार निर्मित कमी से मारे जाने वाले लोगों की वास्तव में हत्या हुई है। केजरीवाल सरकार इसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए। गुप्ता ने कहा कि ऑक्सीजन ऑडिट मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट के बाद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन के खिलाफ हत्या और आपराधिक षड्यंत्र के मामलों में मुकदमे दर्ज होने चाहिए।
गुप्ता ने बताया कि उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में ऑक्सीजन की भारी मांग के बाद एक ऑडिट समिति गठित की थी। इस समिति की अंतरिम रिपोर्ट में दिल्ली सरकार को जरूरत से 4 गुना ज्यादा ऑक्सीजन की मांग करने का दोषी ठहराते हुए कहा गया है कि इस तरह की मांग से देश के दूसरे राज्यों में भी ऑक्सीजन संकट खड़ा हो सकता था। समिति की रिपोर्ट के हवाले से विधानसभा नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी और प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक गोयल देवराहा ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान भाजपा ने केजरीवाल सरकार की नाकामी, कुप्रबंध और विफलताओं को लेकर जो भी आरोप लगाए थे, वे सभी सिद्ध हो गए हैं।