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30 निवेशकों से 12 करोड़ ठगे, निदेशक दंपती गिरफ्तार
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नई दिल्ली। आर्थिक अपराध शाखा ने बुकिंग के 30 महीने के भीतर दुकानें देने का झांसा देकर 30 निवेशकों से 12 करोड़ रुपये की ठगी के आरोप में एक कंपनी के निदेशक दंपती को गिरफ्तार किया है।
शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आरके सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी दंपती की पहचान ग्रेटर नोएडा के परी चौक के जेपी ग्रीन निवासी रीता दीक्षित और उसके पति विजय कांत दीक्षित के रूप में हुई है। दोनों जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक थे। वर्ष 2020 में धीरेंद्र नाथ व अन्य लोगों ने निदेशकों के खिलाफ ठगी की शिकायत की, जिसमें बताया कि उन्होंने कंपनी की वर्ल्ड मॉल परियोजना में दो दुकानें बुक की थीं। कंपनी ने वर्ष 2014 में इस परियोजना की शुरुआत की, जिसके तहत नोएडा के सेक्टर-128 स्थित जेपी ग्रींस विश टाउन में दुकानें दी जानी थी। उन्होंने करीब पौने दो करोड़ से ज्यादा की रकम कंपनी को कई किस्तों में दी। कंपनी ने आवंटित पत्र देने के तीस महीने के भीतर दुकानों का कब्जा दिए जाने का दावा किया था। अठारह महीने से वहां कोई काम नहीं हो रहा था। निदेशकों से इस बाबत बात की गई, लेकिन उन्हें सिर्फ कंपनी की ओर से दिलासा ही मिला। कंपनी ने न तो दुकानें दी और न ही रकम वापस की।
शाखा ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस को नोएडा प्राधिकरण से जानकारी मिली कि कंपनी ने साल 2015 में बिल्डिंग प्लान के अप्रूवल के लिए आवेदन किया था, जिसे कंपनी को कुछ आपत्तियों के साथ वापस कर दिया गया था और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। निर्धारित अवधि के भीतर कंपनी के जवाब नहीं देने पर आवेदन खारिज कर दिया गया। जांच में पता चला कि दंपती कंपनी के प्रमोटर, निदेशक और शेयरधारक हैं। उसके बाद पुलिस टीम ने सोमवार को दंपती को गिरफ्तार कर लिया।
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2015 के बाद प्राधिकरण ने निरस्त कर दिया था आवेदन
नोएडा। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के हत्थे चढ़े रियल एस्टेट के बड़े कारोबारी जय प्रकाश गौड़ की बेटी रीता दीक्षित व दामाद विजय कांत दीक्षित ने लोगों को उस मॉल की दुकानों का सब्जबाग दिखाया, जो आज तक पूरा ही नहीं हो सका। 2014 में परियोजना को लांच किया गया था जबकि 2015 में ही परियोजना संबंधी आवेदन को कुछ आपत्तियों के साथ ही प्राधिकरण ने वापस कर दिया था। आपत्तियों के निस्तारण के लिए कुछ समय भी दिया गया, लेकिन बिल्डर की ओर से कोई जवाब न देने पर भवन योजना के इस आवेदन को निरस्त कर दिया गया था। मैसर्स जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक दंपती रीता और विजय कांत की गिरफ्तारी की खबर जैसे ही फैली, वैसे ही लोगों के बीच जरा ही देर में चर्चा का विषय बन गई। लोगों की चर्चा का कारण यह था कि जिस इमारत के नक्शे को दिखाकर लोगों से ठगी की गई, वर्तमान में वह एक ढांचा मात्र ही है। कई साल से निर्माण कार्य बंद है। आरोपियों ने अपनी दुकानों को बेचने के नाम पर लोगों से 2020 तक पैसा लिया गया, जबकि उन्हें करीब चार-पांच साल पहले ही इस बात की जानकारी थी कि उनकी परियोजना का आवेदन प्राधिकरण की ओर से निरस्त कर दिया गया है।
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शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आरके सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी दंपती की पहचान ग्रेटर नोएडा के परी चौक के जेपी ग्रीन निवासी रीता दीक्षित और उसके पति विजय कांत दीक्षित के रूप में हुई है। दोनों जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक थे। वर्ष 2020 में धीरेंद्र नाथ व अन्य लोगों ने निदेशकों के खिलाफ ठगी की शिकायत की, जिसमें बताया कि उन्होंने कंपनी की वर्ल्ड मॉल परियोजना में दो दुकानें बुक की थीं। कंपनी ने वर्ष 2014 में इस परियोजना की शुरुआत की, जिसके तहत नोएडा के सेक्टर-128 स्थित जेपी ग्रींस विश टाउन में दुकानें दी जानी थी। उन्होंने करीब पौने दो करोड़ से ज्यादा की रकम कंपनी को कई किस्तों में दी। कंपनी ने आवंटित पत्र देने के तीस महीने के भीतर दुकानों का कब्जा दिए जाने का दावा किया था। अठारह महीने से वहां कोई काम नहीं हो रहा था। निदेशकों से इस बाबत बात की गई, लेकिन उन्हें सिर्फ कंपनी की ओर से दिलासा ही मिला। कंपनी ने न तो दुकानें दी और न ही रकम वापस की।
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शाखा ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस को नोएडा प्राधिकरण से जानकारी मिली कि कंपनी ने साल 2015 में बिल्डिंग प्लान के अप्रूवल के लिए आवेदन किया था, जिसे कंपनी को कुछ आपत्तियों के साथ वापस कर दिया गया था और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। निर्धारित अवधि के भीतर कंपनी के जवाब नहीं देने पर आवेदन खारिज कर दिया गया। जांच में पता चला कि दंपती कंपनी के प्रमोटर, निदेशक और शेयरधारक हैं। उसके बाद पुलिस टीम ने सोमवार को दंपती को गिरफ्तार कर लिया।
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2015 के बाद प्राधिकरण ने निरस्त कर दिया था आवेदन
नोएडा। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा के हत्थे चढ़े रियल एस्टेट के बड़े कारोबारी जय प्रकाश गौड़ की बेटी रीता दीक्षित व दामाद विजय कांत दीक्षित ने लोगों को उस मॉल की दुकानों का सब्जबाग दिखाया, जो आज तक पूरा ही नहीं हो सका। 2014 में परियोजना को लांच किया गया था जबकि 2015 में ही परियोजना संबंधी आवेदन को कुछ आपत्तियों के साथ ही प्राधिकरण ने वापस कर दिया था। आपत्तियों के निस्तारण के लिए कुछ समय भी दिया गया, लेकिन बिल्डर की ओर से कोई जवाब न देने पर भवन योजना के इस आवेदन को निरस्त कर दिया गया था। मैसर्स जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक दंपती रीता और विजय कांत की गिरफ्तारी की खबर जैसे ही फैली, वैसे ही लोगों के बीच जरा ही देर में चर्चा का विषय बन गई। लोगों की चर्चा का कारण यह था कि जिस इमारत के नक्शे को दिखाकर लोगों से ठगी की गई, वर्तमान में वह एक ढांचा मात्र ही है। कई साल से निर्माण कार्य बंद है। आरोपियों ने अपनी दुकानों को बेचने के नाम पर लोगों से 2020 तक पैसा लिया गया, जबकि उन्हें करीब चार-पांच साल पहले ही इस बात की जानकारी थी कि उनकी परियोजना का आवेदन प्राधिकरण की ओर से निरस्त कर दिया गया है।