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किसान आंदोलन: मील का पत्थर बनी सिंघु बॉर्डर पर लगाई गई कील, अब पत्थरों पर कभी न मिटने वाले किसानों के नाम होंगे दर्ज

Tue, 14 Dec 2021 01:55 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 14 Dec 2021 01:55 AM IST
सार

सिंघु बॉर्डर से पंजाब के लिए रवाना होने वाले आखिरी जत्थे में मौजूद नछत्तर सिंह और अजीत पाल सिंह इस आंदोलन की याद के तौर पर कील लगे पत्थरों को अपने साथ ले जाएंगे। इन पत्थरों से किसानों की याद में स्मारक बनाया जाएगा ताकि हमेशा किसानों की यादें जिंदा रह सकें।

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100 feet high memorial to be constructed in punjab anandpur sahib in memory of farmers who lost their lives
अपने साथ पत्थर ले जाते किसान - फोटो : amar ujala

विस्तार

दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर 380 दिनों तक अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन करने वाले किसान, इस आंदोलन की याद को साथ ले जाएंगे। प्रदर्शनकारी किसानों को रोकने के लिए पत्थरों में लगाई गई कील, अब किसानों के लिए मील का पत्थर का रूप ले चुकी हैं। जान गंवाने वाले किसानों की याद में पंजाब के आनंदपुर साहिब में 100 फुट ऊंचे स्मारक का निर्माण किया जाएगा। तीन कृषि कानूनों को निरस्त करवाने की जद्दोजहद में जान गंवाने वाले 734 किसानों की नाम हमेशा के लिए पत्थरों में दर्ज हो जाएंगे। दिल्ली की इस अमिट छाप को किसान अपने साथ संजाये रखने के लिए पंजाब ले जा रहे हैं।  

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सिंघु बॉर्डर से पंजाब के लिए रवाना होने वाले आखिरी जत्थे में मौजूद नछत्तर सिंह और अजीत पाल सिंह इस आंदोलन की याद के तौर पर कील लगे पत्थरों को अपने साथ ले जाएंगे। इन पत्थरों से किसानों की याद में स्मारक बनाया जाएगा ताकि हमेशा किसानों की यादें जिंदा रह सकें। अजीत पाल सिंह ने बताया कि पहले दिन से ही उन्होंने किसानों की सेवा के लिए यहां आशियाना बनाया। प्रदर्शनकारी किसानों को अगर पूरे दिन थककर चूर होने पर उनका मसाज किया तो गंदे जूतों को पोंछकर उन्हें फिर अगले दिन के लिए तैयार किया। इतना ही नहीं रोजाना लंगर में खिचड़ी, दलिया और लस्सी के साथ सभी की सेवा में जुटे रहे ताकि आंदोलन में किसी तरह की रुकावट न आए। 
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86 वर्षीय बुजुर्ग आखिर में घर लौटेंगे पैदल 
86 वर्षीय नछत्तर सिंह ने बताया कि उनके दो बेटे हैं, मगर दोनों को घर पर छोड़कर यहां आंदोलन में डटे रहे। मंगलवार सुबह तक दिल्ली से पैदल रवाना होंगे। बुजुर्ग की उम्र भले ही 86 हो मगर सियासी दावपेंच से काफी दूर, किसानों की इस जीत के बाद उन्हें किसान भाईयों को भरोसा दिलाया है कि सड़कों पर साफ सफाई पूरी होने के बाद सबसे आखिर में दिल्ली से रवाना होंगे। अपने साथ लिए सामान को वाहन से भेज देंगे। इसमें उनकी झोपड़ी भी हैं, जिसमें पिछले साल की सर्द रातें हमेशा याद रहेंगी। आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों की याद में आंदोलन की दास्तां बयां करते हुए उनकी होंठ कांपने लगे, मगर इस जीत की निशानी के तौर पर कील लगे सीमेंट के स्लैब के टुकड़े साथ ले जाएंगे। 
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पत्थरों पर न मिटने वाले किसानों के दर्ज होंगे नाम 
अजीत पाल सिंह ने बताया कि किसानों के साथ बिताए दिन और उनके आंदोलन के जज्बे को सलाम हैं। आंदोलनकारी किसानों को रोकने के लिए पत्थरों में जो कीलें लगाई गई थी, उसे कैसे भूल सकते हैं। कील, उनके दिलों पर लगे हैं और इसे हमेशा याद रखना चाहते हैं। इस संघर्ष में जान गंवाने वाले किसानों की याद हमेशा जिंदा रखने के लिए कील लगे पत्थरों के टुकड़े साथ लेकर जाएंगे। इससे आनंदपुर साहिब में 100 फुट ऊंचाई के स्मारक का निर्माण किया जाएगा। पत्थरों पर जान गंवाने वाले किसानों की यादें नाम के तौर पर दर्ज होंगी, जिसे शायद कभी मिटाया न जा सके।


आगे भी देंगे निशुल्क सेवाएं 
किसानों के 380 दिनों के संघर्ष को मिनट और सेकेंड भी याद रखने वाले अजीत पाल ने कहा किसानों की मांगे मान ली गईं, मगर इस दौरान जितनी परेशानी हुई उसे कैसे भूल सकते हैं। आनंदपुर साहिब के नजदीक रोपड़ के गांव झाज के रहने वाले सिंह ने कहा कि वहां भी हमेशा किसानों को निशुल्क सेवाएं देंगे। किसानों के संघर्ष में साथ रहने के बाद उन्हें नई ताकत मिली हैं ताकि हमेशा दूसरों के लिए कुछ कर सकें। 

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