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जाकिर नगर अग्निकांड: जान पर खेल दो भाइयों ने बचाई 17 की जान, तीसरी और चौथी मंजिल में किया सुराख
Wed, 07 Aug 2019 04:47 AM IST
शाहरुख खान
शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली
शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 07 Aug 2019 04:47 AM IST
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दिल्ली में इमारत में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली के जाकिर नगर की इमारत में हादसे के समय 70 से अधिक लोग थे। पड़ोसी और बचाव दल समय पर आग में फंसे लोगों को नहीं निकालते तो हादसा और बड़ा हो सकता था।
पड़ोस में रहने वाले दो भाइयों ने अपनी छत पर जाकर आग वाली इमारत की तीसरी और चौथी मंजिल की दीवार दो जगह से तोड़ दी। उन्होंने 17 लोगों की जान बचाई। इन दोनों के साथ पड़ोस के अन्य लोग और दमकलकर्मी भी थे।
उनके साहस की सभी प्रशंसा कर रहे हैं। करीब दो बजे लगी आग के बाद साढ़े चार बजे तक लोगों को बिल्डिंग से निकाला गया। सुबह 5 पांच बजे दमकलकर्मियों को तीसरी मंजिल की सीढ़ियों से एक शव मिला।
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हादसे वाली इमारत के बिल्कुल पास की दोमंजिला बिल्डिंग में रहने वाले निशात खान (35) ने बताया कि रात करीब 2:10 बजे अचानक उन्होंने चिल्लाने की आवाज सुनी। बालकनी से निकलकर देखा तो उनके बराबर वाली बिल्डिंग की पार्किंग में आग लगी थी।
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पड़ोस में रहने वाले दो भाइयों ने अपनी छत पर जाकर आग वाली इमारत की तीसरी और चौथी मंजिल की दीवार दो जगह से तोड़ दी। उन्होंने 17 लोगों की जान बचाई। इन दोनों के साथ पड़ोस के अन्य लोग और दमकलकर्मी भी थे।
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उनके साहस की सभी प्रशंसा कर रहे हैं। करीब दो बजे लगी आग के बाद साढ़े चार बजे तक लोगों को बिल्डिंग से निकाला गया। सुबह 5 पांच बजे दमकलकर्मियों को तीसरी मंजिल की सीढ़ियों से एक शव मिला।
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हादसे वाली इमारत के बिल्कुल पास की दोमंजिला बिल्डिंग में रहने वाले निशात खान (35) ने बताया कि रात करीब 2:10 बजे अचानक उन्होंने चिल्लाने की आवाज सुनी। बालकनी से निकलकर देखा तो उनके बराबर वाली बिल्डिंग की पार्किंग में आग लगी थी।
उन्होंने फौरन अपने पूरे परिवार को उठाया। इस बीच उनका छोटा भाई जीशान खान (30) भी उठ गया। दोनों भाई बाहर आए। देखते ही देखते आग ऊपर बढ़ने लगी। जीने के रास्ते आग की लपटों के अलावा धुआं भी ऊपर की ओर जाने लगा।
शुरू में सामने रहने वाले निजाम ने कुछ लोगों को सीढ़ी लगाकर उतार लिया। इमारत की पीछे वाले फ्लैट के लोगों को भी सीढ़ी, बैडशीट और रस्सियों के जरिये किसी तरह नीचे उतारा गया।
सामने की ओर बने फ्लैट में लोग फंस गए। कुछ लोगों ने घबराकर नीचे छलांग लगाई तो निशात और जीशान फौरन भागकर अपनी छत पर पहुंचे। अन्य लोगों व दमकलकर्मियों की मदद से निशात व जीशान ने आग वाली इमारत की तीसरी मंजिल की दीवार तोड़ी।
इस जगह लोहे की अलमारी रखी थी। उसे हटाकर वे अंदर घुसे और कुछ लोगों को वहां से निकाला। इसके बाद निशात ने अपनी छत की ममटी से आग वाली इमारत की चौथी मंजिल की दीवार तोड़ी और वहां से लोगों को निकाला। यहां से कुल 17 लोगों को निकाला गया। करीब साढ़े चार बजे तक इमारत में बचाव अभियान चला। पड़ोसियों, स्थानीय लोगों, पुलिस व दमकलकर्मियों ने 50 से ज्यादा लोगों को बिल्डिंग से सुरक्षित बाहर निकलवाया।
शुरू में सामने रहने वाले निजाम ने कुछ लोगों को सीढ़ी लगाकर उतार लिया। इमारत की पीछे वाले फ्लैट के लोगों को भी सीढ़ी, बैडशीट और रस्सियों के जरिये किसी तरह नीचे उतारा गया।
सामने की ओर बने फ्लैट में लोग फंस गए। कुछ लोगों ने घबराकर नीचे छलांग लगाई तो निशात और जीशान फौरन भागकर अपनी छत पर पहुंचे। अन्य लोगों व दमकलकर्मियों की मदद से निशात व जीशान ने आग वाली इमारत की तीसरी मंजिल की दीवार तोड़ी।
इस जगह लोहे की अलमारी रखी थी। उसे हटाकर वे अंदर घुसे और कुछ लोगों को वहां से निकाला। इसके बाद निशात ने अपनी छत की ममटी से आग वाली इमारत की चौथी मंजिल की दीवार तोड़ी और वहां से लोगों को निकाला। यहां से कुल 17 लोगों को निकाला गया। करीब साढ़े चार बजे तक इमारत में बचाव अभियान चला। पड़ोसियों, स्थानीय लोगों, पुलिस व दमकलकर्मियों ने 50 से ज्यादा लोगों को बिल्डिंग से सुरक्षित बाहर निकलवाया।