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1991 से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर था जफर

Sat, 19 Dec 2015 09:23 AM IST
Updated Sat, 19 Dec 2015 09:23 AM IST
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Zafar targeted by security agencies since 1991

देश की सुरक्षा एजेंसियां अलकायदा इंडिया सब-कॉंटिनेंट (एक्यूआईएस) के फाइनेंसर जफर मसूद उर्फ गुड्डू पर कई सालों से नजर रखे हुए थीं। दिल्ली में 2001 में मिले विस्फोटक मामले में भी पुलिस को इसकी तलाश थी।

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इस मामले में जफर वांछित है। पुलिस को जफर के पास चार पासपोर्ट होने की जानकारी मिली है, जो उसने उत्तर प्रदेश से बनवाए हैं। स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जफर मसूद 1999 में दिल्ली-लाहौर बस से पाकिस्तान गया था।
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वहां इसे मंनसेर में करीब 20 दिन हथियार बनाने की ट्रेनिंग दी गई। इसके बाद भारत भेज दिया गया। वर्ष 2001 में दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी इलाके से आठ किलो विस्फोटक (एफआईआर नंबर -493/01) मिला था। विस्फोटक के साथ पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
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जफर के पास चार पासपोर्ट होने की जानकारी

Zafar targeted by security agencies since 1991

पुलिस इस मामले में जफर की तलाश कर रही थी। पाकिस्तान की यात्रा के बाद से ही जफर सुरक्षा एजेंसियों के निशान पर था और इसे ढूंढा जा रहा था। विस्फोटक मिलने केमामले में नाम सामने आने के बाद एजेंसियों का संदेह पक्का हो गया था।


पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां आरोपी से ये पूछताछ करने में लगी हैं कि क्या पाकिस्तान में हथियारों की ट्रेनिंग लेने के बाद उसे भारत का टास्क देकर भेजा गया था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 1995 में पाकिस्तान गया मौलाना आसिम उमर के जरिए जफर पाकिस्तान गया था और हरकत उल मुजाहिद्दीन के संपर्क में आया था। बाद में अलकायदा से जुड़ गया।

पुलिस के अनुसार जफर के पास चार पासपोर्ट होने की जानकारी मिली है। इसने दो पासपोर्ट बरेली से ही अलग-अलग नामों से अलग-अलग समय में बनवाए हैं। पूछताछ में इसने अलग-अलग पासपोर्ट बनवाने के अलग-अलग कारण बताए हैं। एक बार चोरी होने का कारण गिनाया है, तो एक बार बताया कि इसने खुद ही फाड़ दिया था। सभी पासपोर्ट की डिटेल जुटाई जा रही है।

अब्दुल रहमान ने जैश के आतंकियों को पनाह दी थी

Zafar targeted by security agencies since 1991

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार किया गया मौलाना अब्दुल रहमान शुरू में आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद से जुड़ा था। अब्दुल पढ़ाई करने के लिए 1994 में पश्चिमी यूपी के देवबंद गया था। यहां अरबी समेत दो भाषाओं के पाठ्यक्रम में दाखिला लिया। इसी दौरान यह जैश ए मोहम्मद के संपर्क में आया।

1999 में जैश ए मोहम्मद के दो आतंकी सज्जाद और सलीम इसके पास आए और साथ में ही काफी समय तक देवबंद में रहे। इसके बाद अब्दुल दोनों को कटक स्थित अपने घर लेकर चला गया। यूपी एसटीएफ ने लखनऊ के गोमती नगर में सज्जाद व सलीम को मार गिराया था।

इसके बाद से अब्दुल रहमान गायब हो गया और 2002 में बंगलूरू चला गया। 2007 में यह फिर कटक आ गया और वहां मदरसा खोला। इसी समय यह अलकायदा इंडिया सब-कॉंटिनेंट के संपर्कमें आया। इसने हैदराबाद के उमर हैदराबादी (37) को पाकिस्तान भेजा है। माना जा रहा है कि मदरसे में पढ़ रहे युवकों के मन में यह जेहाद का जहर घोलता था।

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