केंद्र सरकार के खिलाफ कोर्ट पहुंचा युवा वैज्ञानिक
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देशभर में ईंधन बचाने की मुहिम पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन एक युवा वैज्ञानिक कनिष्क सिन्हा के बनाए इंधन रहित ऑटो इंजन को अनापत्ति प्रमाण पत्र देने की फाइल चार साल से लटका रखी है।
पर्यावरण के अनुकूल बने इस इंजन के लिए एनओसी पाने को युवा वैज्ञानिक ने अब हाईकोर्ट की शरण ली है। अदालत ने इस मामले में केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया है।
न्यायमूर्ति वीके शाली ने कनिष्क की याचिका पर हैरानी जताते हुए कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में तुरंत निर्णय लेना चाहिए। इस तरह के इंजन से पर्यावरण स्वच्छ रहेगा। इस पर खर्च भी काफी कम आएगा।
तीन महीने में होगा फैसला!
याची ने दावा किया कि उसके द्वारा बनाए पर्यावरण के अनुकूल जिंक-ऑक्सीजन ईंधन-सेल इंजन को ऑटो रिक्शा और ई-रिक्शा में प्रयोग किया जा सकता है। यह सस्ता, गैर खतरनाक और प्रदूषण मुक्त है।
इस आविष्कार को वर्ष 2009 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम में प्रदर्शित किया गया था। कनिष्क के मुताबिक 4.5 लाख किलोमीटर चलने का खर्च मात्र 35 हजार रुपये ही आएगा।
इस आविष्कार पर अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार को मार्च 2010 में आवेदन किया था लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। दिल्ली सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता जुबेदा बेगम ने अदालत को आश्वस्त किया कि याची के आवेदन पर तीन माह में निर्णय कर दिया जाएगा। अदालत ने मामले की सुनवाई 15 जनवरी 2015 तय की है।