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इस प्रेस कांफ्रेंस ने उधेड़ दी आप की बखिया

Fri, 27 Mar 2015 05:35 PM IST
Updated Fri, 27 Mar 2015 05:35 PM IST
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yogendra yadav press conference in delhi

आम आदमी पार्टी में पिछले एक महीने से चल रहे आंतरिक विवाद पर शुक्रवार को पार्टी के दो महत्वपूर्ण नेता खुलकर सामने आ गए। दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और प्रोफेसर आनंद कुमार पार्टी के अंदरूनी विवादों पर राय देने के लिए एक साथ सामने आए।

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योगेंद्र यादव बोले कि आप कोई साधारण पार्टी नहीं है, ये पार्टी देश के अभूतपूर्व आंदोलन से पैदा हुई है। स्वराज, पारदर्शिता, सुचिता से पैदा हुई राजनीतिक पार्टी है। ये दल देश में नया राजनीतिक आदर्श स्थापित करने आया है।
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जाहिर है इस आंदोलन से देश के लोगों को बड़ी उम्मीद रही है। पिछले एक महीने से पार्टी में बहुत कुछ टूटा है। कुछ विश्वास टूटा है, अनेक समर्थकों की आशांएं टूटी हैं। लेकिन अच्छी बात है कि देश की यह एकमात्र पार्टी है जिसमें लोकतंत्र पर चर्चा हो रही है।

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पहले योगेंद्र ने की आप की तारीफ

yogendra yadav press conference in delhi

योगेंद्र यादव ने कहा कि यह एकमात्र पार्टी है जिसमें पारदर्शिता, के सवाल पर आन्तरिक लोकतंत्र के सवाल पर संगठन के भीतर के स्वराज के सवाल पर चर्चा हुई है। ये चर्चा हमारे लिए बड़ी उपलब्धि है।


महत्वपूर्ण हम दो व्यक्ति नहीं है बल्कि लोगों ने राजनीति को समझना सुनना शुरु किया गया। इस सब में प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव सिर्फ निमित्त है। ये हमारे मुद्दे नहीं है। व्यक्तिगत मुद्दे नहीं हैं।

ये आंदोलन के वो महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिसको लेकर लोग रामलीला मैदान में आए और आज भी यहां बैठे हैं। ये हमारे मुद्दे नहीं है हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों के मुद्दे हैं। हमने जो सवाल उठाए वो आप सबके सामने हैं।

ये हैं वो पांच मुद्दे जिनपर योगेंद्र-प्रशांत देंगे इस्तीफा

yogendra yadav press conference in delhi

1-पहला मूल मु्द्दा जिस स्वराज को देश में लाने के लिए पार्टी बनाई वो स्वराज क्या देश में होगा। योगेंद्र ने कहा हमने कहा कि पंचाईती मुद्दों पर राज्य ईकाई को ताकत दी जाए। पार्टी के आन्तरिक मु्द्दों पर आन्तरिक लोकपाल फैसला कर सके।

2- हम महज जांच की मांग कर रहे हैं। हमने कहा था कि पार्टी पर जो आरोप लगे हैं कि जो चैक का मामला था। दिल्ली में विधायकों की तोड़फोड़ कर सरकार बनाने वाला मामला था। हमने कहा था कि पार्टी अपने लोकपाल से इसकी जांच करे।

3-हमारा अगला मुद्दा था कि कार्यकर्ता जान है पार्टी की। उसकी इज्जत होनी चाहिए। बड़े मुद्दों में उसकी राय ली जानी चाहिए।
4-पारदर्शिता का सिद्धांत जिसे हम दुनिया पर लागू करना चाहते हैं वो हमारे यहां भी हो।
5-हमारी पार्टी आरटीआई पर विश्वास करती है और वो उसमें लागू होना चाहिए। राष्ट्रीय कार्यकारिणी के रिक्त पदों को गोपनीय मतदान के जरिए भर दिया जाए।

यदि यदि ये ये हो जाएगा तो मैं त्यागपत्र दे दूंगा और मैने त्यागपत्र दे दिया है दोनों में बहुत अंतर है। हमें संतोष है कि हमारे बहाने चर्चा हुई। लेकिन पार्टी में कुछ लोगों की तरफ से कई भ्रम फैलाने की कोशिश की गई है।

भूषण बोले केजरीवाल चाहते हैं कि हम इस्तीफा दे दें।

yogendra yadav press conference in delhi

जब वो बंगलुरु से दिल्ली आ रहे थे उस वक्त मैने केजरीवाल जी को मैसेज किया कि हम उनसे मिलना चाहते हैं, लेकिन ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि केजरीवाल को 11 दिनों में हमसे मिलने का वक्त नहीं मिला।

फिर मैने प्रोफेसर आनंद और अजीत को मिलने के लिए भेजा, लेकिन उसका भी कोई नतीजा नहीं निकला। हमने मुद्दे रखे तो कह दिया गया कि आप दोनों इस्तीफा दे दीजिए। उसके बाद ये बात सामने आई कि अरविंद कि मंशा है कि पार्टी से हम दोनों इस्तीफा दे दें। यहां तक कि अरविंद ने कह दिया कि ये लोग पार्टी चला लें और मैं अपने विधायकों के साथ अलग राजकीय पार्टी बना लूंगा।

पार्टी में लगातार झूठ का पुलिंदा बांधा गया। पार्टी के नेताओ ने कहा कि केजरीवाल अब आप दोनों के साथ काम नहीं करना चाहते। कल राष्ट्रीय परिषद की बैठक होनी है जिसके लिए हमने एक चिट्ठी लिखी है जो कि पार्टी सचिव के नाम हैं। इस चिट्ठी में हमने कहा है कि राष्ट्रीय परिषद की बैठक ऐसी होनी चाहिए कि वो शांतिपूर्वक हो, ना कि उसे स्थगित कर दिया जाए।

भूषण ने लगाए केजरीवाल पर चौंकाने वाले आरोप

yogendra yadav press conference in delhi

भूषण बोले कि लोकसभा चुनावों के बाद अरविंद दोबारा कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहते थे, उस वक्त मैं शिमला में था। मैने उनसे कहा कि पीएसी की मीटिंग में ही इस बात का फैसला हो तो ज्यादा अच्छा है। पीएसी की बैठक में पांच में से चार वोट अरविंद के इस फैसले के खिलाफ गए।

तब भी अरविंद अपने फैसले पर अड़े रहे और कहा कि मैं पार्टी का संयोजक हैं और उन्होंने पार्टी का पूरा संविधान पढ़ लिया है और मुझे पूरा अधिकार है कि मैं जो चाहूं वो कर सकता हूं। तब मैने कहा कि ये फैसला राष्ट्रीय कार्यकारिणी में होना चाहिए।

राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी केजरीवाल का फैसला बहुमत से अस्वीकृत कर दिया गया। उस वक्त आम आदमी का दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा था। फिर भी अरविंद ने एलजी को सरकार बनाने के लिए चिट्ठी भेजी, लेकिन ये चिट्ठी अचानक से मीडिया में लीक हो गई, और फिर कांग्रेस ने भी मिलकर सरकार बनाने से मना कर दिया।

भूषण वोले केजरीवाल के अंदर दो कमियां हैं।

yogendra yadav press conference in delhi

भूषण ने कहा है कि जिन छह विधायकों के दम पर केजरीवाल सरकार बनाना चाहते थे, उन्हीं विधायकों को खरीदने का आरोप केजरीवाल पर आरोप लगा। तब सभी ने अरविंद को सरकार बनाने से मना किया।

भूषण बोले कि केजरीवाल में दो कमियां हैं जो पार्टी को बर्बादी की कगार पर ले जा सकती हैं। वो इन्हें मान भी चुके हैं। पहली कमी है कि वो जो चाहते हैं वही हो, उनके विरोध में बोलने वाला कोई ना हो।

दूसरी कमी ये है कि वो ये मानते हैं उनकी नियत साफ है जिस वजह से वो जो कर रहे हैं वो सही है। भूषण ने कहा कि किसी काम को करने के लिए केवल साफ नियत की जरूरत नहीं होती वो किस तरह से किया जा रहा है ये भी बहुत जरूरी है। क्योंकि नियत तो इंदिरा गांधी की भी साफ थी जो इमरजेंसी लगाने को सही समझती थीं। मोदी भी यही सोचते थे कि उनकी नियत साफ थी और उन्होंने मुसलमानों को सबक सिखाया।

'आ‌खिर क्यों चुप हैं अरविंद'

yogendra yadav press conference in delhi

प्रेस कांफ्रेंस के आखिर में प्रोफेसर आनंद कुमार ने जोश में कहा कि योगेंद्र यादव पर आरोप लगाया जा रहा है कि वह योगेंद्र यादव हरियाणा के प्रभारी बनना चाहते हैं। यह बिल्कुल गलत है।

योगेंद्र यादव कभी भी किसी पद के लिए न तो पार्टी में किसी से मांग की और न ही इस तरह की राजनीति करने के लिए वह राजनीति मे आए हैं।

आनंद कुमार ने कहा कि लगातार यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि पार्टी में दो गुट बन गए हैं। जबकि लोकसभा चुनाव में हार के बाद खुद योगेंद्र यादव ने ही सूत्र वाक्य दिया था कि न टूटेंग न टूटने देंगे।

हालांकि उन्होंने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि इस पूरे मुद्दे पर अरविंद जी क्यों चुप हैं। उनसे बात करने के लिए ही हमें प्रेस कांफ्रेंस करनी पड़ रही है।

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