योगेन्द्र ने खोला लालू-केजरीवाल के मिलन का राज
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नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह के मंच पर लालू से गले मिलने पर आप के पूर्व नेता योगेंद्र यादव ने अरविंद केजरीवाल पर तंज कसा है।
फेसबुक पर डाली अपनी एक पोस्ट में योगेंद्र ने कहा है कि फोटो (लालू-केजरीवाल की गले मिलते फोटो) के पीछे एक अलिखित समीकरण चल रहा है। यही नहीं उन्होंने लिखा है कि लालू-केजरीवाल की तस्वीर देख मुझे दु:ख हुआ, शर्मिंदगी महसूस हुई है। इससे पहले ट्विटर पर योगेंद्र ने लिखा था कि बस यही दिन देखना था।
योगेंद्र यादव ने अपनी पोस्ट में कहा कि मैंने ट्विटर पर इसे लेकर आपत्ति जताई तो मुझे गालियां मिली। यह आम बात है कि जब हम मोदी और केजरीवाल के बारे में लिखते है गालियां मिलती है।
यह कहा गया कि ये सामान्य शिष्टाचार था इसे इतना तूल क्यों दे रहे है। लालू ने जबरदस्ती पकड़कर फोटो खिंचवा ली है। योगेंद्र का कहना है कि राजनीति में सामान्य शिष्टाचार बहुत जरूरी है।
'लालू ने सार्वजनिक किया समीकरण'
विरोधियों के साथ भी शालीनता, संवाद और दुआ सलाम होनी चाहिए। अरविंद यह शिष्टाचार सीख रहे हैं तो इसमें कोई बुरी बात नहीं है। लेकिन पटना के समारोह में लालू से मुलाकात कोई संयोग नहीं था।
यह दो महीने से चल रहे एक अनौपचारिक गठबंधन का परिणति है जो एक नए राष्ट्रीय मोर्चे का इशारा कर रही है। योगेंद्र के मुताबिक अरविंद एंड कंपनी दो महीने से सिर्फ नीतीश के लिए प्रचार कर कह रही थी और कहा था कि वे लालू के साथ कभी स्टेज पर नहीं जाएंगे।
ऐसे मे लालू प्रसाद यादव, शरद पवार, देवगौड़ा, फारूख अब्दुल्ला और राहुल गांधी के साथ स्टेज पर बैठना सिर्फ सामान्य शिष्टाचार नहीं था। असल में लालू यादव ने उस समीकरण को सार्वजनिक कर दिया जो उस समारोह की अलिखित बुनियाद थी।
केजरीवाल ने इस समीकरण को स्वीकार कर भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन का माथा नीचा किया है। उन लाखों आंदोलनकारियों का अपमान किया है जिन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखा था।