मथुरा की औद्योगिक इकाइयां प्रदूषित कर रहीं यमुना
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उत्तर प्रदेश के मथुरा में आवासीय इलाकों में अवैध तरीके से चल रही पिकलिंग और साड़ी उद्योग के खिलाफ एनजीटी में याचिका दायर की गई है।
आरोप लगाया गया है कि इन औद्योगिक इकाइयों के जरिये ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) के नियमों को ताख पर रखकर औद्योगिक अपशिष्ट यमुना नदी में गिराया जा रहा है। याची के मुताबिक, करीब 42 औद्योगिक इकाइयों के जरिये किसी भी प्राधिकरण से संचालन के लिए अनुमति भी नहीं हासिल की गई है।
उधर, जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई की। याचिका पर्यावरणविद गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी की ओर से दाखिल की है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई थी
उन्होंने एनजीटी से मथुरा के आवासीय इलाके में चल रही सभी अवैध औद्योगिक इकाइयों को बंद करने और शिफ्ट करने की अपील की है। याची की ओर से एडवोकेट राहुल कुमार ने अपनी दलीलें पेश कीं।
बेंच ने मामले पर विचार के बाद अपनी टिप्पणी में कहा कि यदि सभी आरोप सही हैं तो यह गंभीर मामला है। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (सीपीसीबी), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीसीबी) व जिला अधिकारी को नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 22 मार्च को होगी।
एडवोकेट राहुल के मुताबिक, इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई थी। इन औद्योगिक इकाइयों के जरिये वाटर एक्ट (बचाव व प्रदूषण नियंत्रण) 1974 का उल्लंघन किया जा रहा है। साथ ही इनके जरिये छोड़ा जाने वाला औद्योगिक अपशिष्ट अत्यंत ही घातक है। इसमें भरपूर मात्रा में एसिड मौजूद होता है। वहीं इस मामले पर सभी प्राधिकरण उदासीन हैं। खासतौर से सीपीसीबी इस मामले पर बिल्कुल ही तानाशाही रवैया रखता है।