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यमुना में 33 प्रतिशत तक बढ़ा ऑक्सीजन का स्तर, सिर्फ लॉकडाउन नहीं ये भी है वजह
Tue, 21 Apr 2020 04:24 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Tue, 21 Apr 2020 04:24 PM IST
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निर्मल हुई यमुना
- फोटो : पीटीआई
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हमेशा प्रदूषित रहने वाली यमुना नदी और उसमें बहने वाले नाले इन दिनों काफी साफ हो गए हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने अपनी एक रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया है। डीपीसीसी ने यह रिपोर्ट एनजीटी द्वारा नियुक्त यमुना मॉनिटरिंग समिति को सौंपी है। इसने बताया है कि नदी की बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
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कमेटी ने अपने आकलन में लॉकडाउन अवधि की तुलना पिछले साल के अप्रैल माह से की है। डीपीसीसी ने यमुना के नौ जगह से और 20 नालों से भी पानी का सैंपल लिया। डीपीसीसी ने बताया है कि औद्योगिक कचरे के बंद होने से और पानी के बहाव की वजह से नदी इतनी स्वच्छ है। हालांकि डीपीसीसी ने ये भी कहा कि भले ही नदी के पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है लेकिन अब भी यह मानकों पर खरा नहीं उतरता क्योंकि नदी में अब भी घरेलू नालों का पानी जा रहा है।
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ओखला बैराज पर बीओडी के लिहाज से प्रदूषण देखें तो इसमें 18 प्रतिशत की कमी आई है, वहीं निजामुद्दीन ब्रिज पर 20 प्रतिशत की, आगरा कैनाल जो ओखला बैराज पर स्थित है वहां तो प्रदूषण में 33 प्रतिशत की कमी आई है। जबकि आईटीओ पुल पर 21 प्रतिशत और कुदसिया घाट पर 4 प्रतिशत प्रदूषण की कमी आई है।
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वहीं बात अगर पल्ला और सुरघाट की जाए, दिल्ली में प्रवेश के बाद जहां से सबसे पहले पहले यमुना गुजरती है तो यहां के पानी की गुणवत्ता में कोई खास वृद्धि नहीं हुई है, लेकिन दोनों जगह का पानी नहाने लायक (क्लास सी) है। रिपोर्ट के अनुसार किसी भी जगह का पानी इस श्रेणी का नहीं है। लेकिन खजूरी प्लाटून पूल एक मात्र ऐसी जगह है जहां के पानी में 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।
निर्मल हुई यमुना
- फोटो : अमर उजाला
पानी में बीओडी लेवल का जो आदर्श स्तर वह 3 मिलीग्राम/लीटर है, ताकि पानी में जलीय जीव निवास कर सकें। इसके अलावा जिन अन्य पैमानों पर पानी को जांचा गया उसमें पीएच, सीओडी, डीओ और फेकल कोलिफॉर्म स्तर है। हाई लेवल कोलिफॉर्म अब भी कई जगहों पर पाए गए हैं जिसका मतलब है कि अब भी यमुना में नाले का पानी सीधे तौर पर बिना साफ हुए गिर रहा है।
एक अधिकारी का कहना है कि इस समय नदी में प्रदूषण घटने की वजह लॉकडाउन के अलावा ज्यादा पानी छोड़ा जाना भी है। मार्च में बारिश अच्छी हुई, जिसकी वजह से पिछले साल की तुलना में इस बार ज्यादा पानी नदी में छोड़ा जा रहा है। औद्योगिक नाले पूरी तरह से रुक गए हैं, लेकिन घरेलू नाले अब भी पानी में आ रहे हैं जो बड़ी समस्या हैं। यह साफ है कि अगर नाले इसी नदियों में गिरते रहे तो हम पानी के स्तर को नहीं बढ़ा पाएंगे।
रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि जहां 2019 अप्रैल में 1000 क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया था वहीं इस महीने नदी में 3900 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यही वजह है कि नदी और भी साफ हुई है।
अगर नालों की बात करें कि कहां से कितना प्रदूषण नदी में गिरता है तो दिल्ली के सिविल मिल ड्रेन से(80 प्रतिशत प्रदूषित पानी), आईएसबीटी से 68 प्रतिशत, बारापुल्लाह नाले से 32 प्रतिशत प्रदूषित पानी नदी में गिरकर इसे गंदा करता है।
एक अधिकारी का कहना है कि इस समय नदी में प्रदूषण घटने की वजह लॉकडाउन के अलावा ज्यादा पानी छोड़ा जाना भी है। मार्च में बारिश अच्छी हुई, जिसकी वजह से पिछले साल की तुलना में इस बार ज्यादा पानी नदी में छोड़ा जा रहा है। औद्योगिक नाले पूरी तरह से रुक गए हैं, लेकिन घरेलू नाले अब भी पानी में आ रहे हैं जो बड़ी समस्या हैं। यह साफ है कि अगर नाले इसी नदियों में गिरते रहे तो हम पानी के स्तर को नहीं बढ़ा पाएंगे।
रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि जहां 2019 अप्रैल में 1000 क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया था वहीं इस महीने नदी में 3900 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यही वजह है कि नदी और भी साफ हुई है।
अगर नालों की बात करें कि कहां से कितना प्रदूषण नदी में गिरता है तो दिल्ली के सिविल मिल ड्रेन से(80 प्रतिशत प्रदूषित पानी), आईएसबीटी से 68 प्रतिशत, बारापुल्लाह नाले से 32 प्रतिशत प्रदूषित पानी नदी में गिरकर इसे गंदा करता है।