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नए चिकित्सीय कानून के खिलाफ पीएम को पत्र, एम्स के डॉक्टर भी आए साथ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 05 Aug 2018 11:44 PM IST
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फाइल फोटो
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नए चिकित्सीय कानून नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) पर डॉक्टरों का विरोध और तेज हो गया है। विभिन्न राज्य स्तरीय संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पत्र लिखकर इसमें बदलाव की मांग की है।
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पहले ही इस मसले को लोकसभा में उठाने का आश्वासन दे रखा है। पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद समेत विपक्ष के कई सांसद एक मंच पर आकर सरकार को चेतावनी भी दे चुके हैं।
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अब डॉक्टर देश के सभी सांसदों और मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर बिल का विरोध करने की अपील कर रहे हैं। यूनाइटेड आरडीए के चेयरमैन डॉ. अंकित ओम का कहना है कि वह बिल को मौजूदा स्वरूप में पास होने से रोकने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते।
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इसलिए सभी सांसदों और मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर विरोध करने की अपील कर रहे हैं। अब तक उन्होंने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के सांसदों को पत्र भेज दिया है। जल्द ही शेष राज्यों के सांसदों को भी पत्र भेज दिया जाएगा।
एम्स के डॉक्टर भी आए साथ
एम्स के रेजीडेंट डॉक्टर भी इस कानून के विरोध में आ चुके हैं। एम्स आरडीए के अध्यक्ष डॉ. हरजीत भट्टी के अनुसार, बिल का मौजूदा स्वरूप मेडिकल की पढ़ाई को व्यावसायिक बनाने पर जोर देता है।
बिल में निजी मेडिकल कॉलेजों के 60 प्रतिशत सीटों पर फीस बढ़ाने की बात सुनकर ही कई राज्यों में छह लाख सालाना की फीस 25 लाख हो गई है। बिल पास हो जाने के बाद यह और बढ़ेगा। इससे गरीब छात्र इस पढ़ाई से वंचित रह जाएंगे।
इसके अलावा भी बिल में कई ऐसे प्रावधान हैं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। सीपीआई ने पत्र भेजकर बिल के विरोध में डॉक्टरों का पूरी तरह से साथ देने का वादा किया है।
बिल में निजी मेडिकल कॉलेजों के 60 प्रतिशत सीटों पर फीस बढ़ाने की बात सुनकर ही कई राज्यों में छह लाख सालाना की फीस 25 लाख हो गई है। बिल पास हो जाने के बाद यह और बढ़ेगा। इससे गरीब छात्र इस पढ़ाई से वंचित रह जाएंगे।
इसके अलावा भी बिल में कई ऐसे प्रावधान हैं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता। सीपीआई ने पत्र भेजकर बिल के विरोध में डॉक्टरों का पूरी तरह से साथ देने का वादा किया है।