विश्व गुर्दा दिवस कल: एम्स के गुर्दा विभाग को 30 साल से नहीं मिले बिस्तर
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दुनिया भर में गुर्दा रोगों के प्रति जागरूकता लाने के लिए बृहस्पतिवार को विश्व गुर्दा दिवस मनाया जाएगा। देश का सबसे बड़ा चिकित्सीय संस्थान बुधवार को यह दिवस मनाने जा रहा है, लेकिन गुर्दा मरीजों का इलाज करने वाला एम्स का गुर्दा विभाग (नेफ्रोलॉजी) ही बीमार पड़ा है। 30 साल में इस विभाग को न तो बिस्तर मिले और न ही यहां डायलिसिस मशीनों में बढ़ोतरी हुई।
डायलिसिस की सुविधा पर्याप्त न होने के कारण डॉक्टर 8 माह बाद प्रत्यारोपण करने के लिए तो तैयार हैं, लेकिन तब तक कहीं और से डायलिसिस कराने की अपील भी कर रहे हैं। स्थिति यह है कि विभाग की इस दुर्दशा के कारण डॉक्टर भी असहाय हैं।
सूत्र बताते हैं कि 20 साल से एम्स में गुर्दा रोगियों के लिए रीनल साइंसेज सेंटर बनाने का प्रस्ताव चल रहा है, लेकिन दो हजार करोड़ रुपये के प्रस्ताव की ये फाइल कहां पड़ी धूल फांक रही है, इसके बारे में डॉक्टरों तक को जानकारी नहीं है। गुर्दा रोगों को लेकर एम्स का ये विभाग राष्ट्रीय स्तर पर कई विशेषज्ञता लिए हुए है, बावजूद इसके मरीजों के लिए सुविधाओं का अभाव स्वस्थ भारत की कल्पना करने वाले सरकारी सिस्टम को मुंह चिड़ा रहा है।
सूत्रों की मानें तो वर्ष 1989 से एम्स के नेफ्रोलॉजी विभाग में मरीजों के लिए 13 डायलिसिस मशीनों की सुविधा है। वहीं विभाग को 24 बिस्तर मिले। यहां गौर करने वाली बात ये है कि कम बिस्तर और डायलिसिस होने के कारण एम्स में हर दिन पहुंच रहे करीब 200 में से कुछ ही रोगियों को उपचार मिल पा रहा है। कहा जा रहा है कि विभाग की इस दुर्दशा के बारे में एम्स प्रबंधन से लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तक को जानकारी है। कई बार लिखित रूप से भी इन खामियों को उजागर किया गया, लेकिन हालात अभी भी वैसे ही हैं।
2800 से ज्यादा प्रत्यारोपण
एम्स के नेफ्रोलॉजी विभाग में सबसे पहले वर्ष 1972 में पहला गुर्दा प्रत्यारोपण किया गया था, जबकि 1971 में पहला डायलिसिस हुआ था। तब से लेकर अब तक प्रत्यारोपण की ये संख्या 2800 पार हो चुकी है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर संसाधन पूरे होते तो येे आंकड़ा कई गुना ज्यादा हो सकता था। हर सप्ताह में करीब तीन प्रत्यारोपण किए जा रहे हैं। वहीं प्रतिदिन ओपीडी में पहुंच रहे 200 में से करीब 160 से 170 मरीज क्रोनिक किडनी डिजीज यानी गुर्दा फेल या डायलिसिस की स्थिति में पहुंच रहे हैं। वेटिंग की बात करें तो इस समय एम्स में गुर्दा प्रत्यारोपण कराने के लिए मरीज को 8 माह की वेटिंग दी जा रही है।
सुषमा-जेटली करा चुके हैं गुर्दे का इलाज
कई साल से पिछड़ेपन के शिकार इस विभाग में केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और वित्त मंत्री अरुण जेटली गुर्दा प्रत्यारोपण करा चुके हैं। यहां चौंकाने वाली बात है कि दोनों ही नेताओं के लिए बाहर से प्रत्यारोपण की टीमें एम्स आई थीं, जबकि यहां के डॉक्टर सिर्फ उनका फॉलोअप लेते रहे। सूत्र बताते हैं कि इस दुर्दशा के बारे में इन नेताओं को भी जानकारी दी गई, जिसके बाद कुछ सुगबुगाहट शुरू हुई, लेकिन चंद माह बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मिलने के बाद भी डॉक्टरों को संजीवनी नहीं मिली।
111 मरीजों को ही प्रत्यारोपण का पंजीयन
एम्स की 62वीं वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2017-18 में एम्स के इस नेफ्रोलॉजी विभाग में 52,930 मरीज इलाज के लिए पहुंचे, इनमें से नए मरीज 11,823 थे। वहीं प्रत्यारोपण के लिए यहां साल भर में 10,970 मरीजों को उपचार मिला। इनमें से गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए 111 नए मरीजों को ही पंजीयन मिल सका। इसके अलावा पिछले वर्ष विभाग में 157 मरीजों की मौत हुई। इनमें से 54 लोगों ने भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर दम तोड़ा। विभाग में मरीजों की मृत्युदर 1 फीसदी है।