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महिला दिवस स्पेशलः दो महिलाओं ने पेश की मिसाल, पति के गुजरने के बाद संभाला व्यवसाय

Tue, 07 Mar 2017 01:04 PM IST
मनोज कुमार/अमर उजाला, नोएडा
मनोज कुमार/अमर उजाला, नोएडा Updated Tue, 07 Mar 2017 01:04 PM IST
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womens day special: two women takeover business after their husbands death
womens day - फोटो : अमर उजाला

आज के दौर में पुरूषों के साथ महिलाओं का नौकरी करना मुश्किल काम नहीं है लेकिन पुरूषों के वर्चस्व वाले प्रॉपर्टी डीलिंग जैसे व्यवसाय को करना किसी चुनौती से कम नहीं है। ग्रेनो के जुनपत गांव की सुमन ने पति की मौत के बाद उनके व्यवसाय को जारी रखने की ठानी और आज उनका प्रॉपर्टी डीलिंग के क्षेत्र में जाना-माना नाम है।

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इसी तरह कारगिल में युद्ध शहीद का पत्नी शकुंतला ने पेट्रोल पंप चलाकर  महिलाओं को हिम्मत देने का काम किया है। अमर उजाला ने महिला दिवस पर दोनों महिलाओं से बात की, पेश हैं बातचीत के अंश....
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सुमन के पति सतीश भाटी प्रॉपर्टी डीलिंग करते थे और अचानक उनकी मृत्य हो गई तो पूरा परिवार टूट गया। मगर उनकी पत्नी सुमन ने हार नहीं मानी और पति के व्यवसाय को ही आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। रिश्तेदारों ने मना भी किया कि वह कार्य महिलाओं के लिए उचित नहीं है लेकिन सुमन ने कहा कि चाहे कितना भी मुश्किल काम हो, उसे करना ही है।

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womens day special: two women takeover business after their husbands death
सुमन भाटी - फोटो : अमर उजाला

उन्होंने 2000 से काम करना शुरू किया। शुरू के दिनों में  महिला समझकर उनके पास आने से लोग हिचकते थे। मगर दो साल में उन्होंने अपने आप को साबित कर दिया। वह अपने बेटे आशीष और अभिषेक को नोएडा एमिटी स्कूल में सुबह छोड़ने के बाद दोपहर में लेने के लिए जाती।

उसके बाद प्रॉपर्टी डीलिंग का काम देखती और घर की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाती। हालांकि अब बच्चे भी बडे़ हो गए हैं और वह स्कूल भी अपने-आप ही आने-जाने लगे हैं तो वह घर और आफिस को पूरा समय देती हैं।

सुमन का कहना है कि वह एक आम परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनका मायका भी साधारण परिवार से है और ससुराल के लोग भी सादगी का जीवन जीते हैं। ऐसे में उनका पूरा सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि महिला अगर ठान ले तो लोगों को दिखा सकती है कि वह किसी से कम नहीं है।

शकुंतला देवी ने भी हार नहीं मानी

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suman bhati - फोटो : अमर उजाला

शकुंतला देवी के पति चमन सिंह 13 जून 1999 में कारिगल युद्घ के दौरान चोटी पर भारत का झंडा फहराने के दौरान शहीद हो गए थे।  शहीद के परिवार में उनकी पत्नी शकुंतला और बेटे कपिल(5) एवं गौरव (3)  थे। शकुंतला पर दुखों का पहाड़ टूट गया और वह अकेली हो गई।

शहीद होने पर उनको पेट्रोल पंप की संस्तुति मिली लेकिन जमीन नहीं थी। शकुंतला ने प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से बच्चों के साथ जाकर मिलीं तो उन्होंने नोएडा प्राधिकरण से पेट्रोल पंप के लिए जमीन दिला दी और साल-2005 में पेट्रोल पंप चालू कर दिया। पेट्रोल पंप पर एक मैनेजर रख लिया।

शकुंतला केवल कक्षा आठ तक पढ़ी हैं और ज्यादा जानकारी  न होने के कारण उन्होंने पूरा काम मैनेजर पर ही छोड़ दिया। करीब डेढ़ साल में उसने 3 करोड़ से अधिक का फर्जीवाड़ा करके दुखों पर नमक छिड़कने का काम कर दिया।

इसके बाद वह फिर स्वयं ही पेट्रोल पंप की जिम्मेदारी संभालने लगीं। बच्चों की जिम्मेदारी निभाते हुए सुबह पेट्रोल पंप पर पहुंच जाती और देर रात तक काम निपटाने के बाद घर जाकर फिर से घर संभालती। साल-2007 के बाद से वह स्वयं ही पेट्रोल पंप को संभाल रही हैं।

वह कहती हैं कि उन्होंने सोचा भी न था कि कभी उन्हें पेट्रोल पंप चलाना पड़ेगा और अब वह अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही हैं। शकुंतला कहती हैं कि हिम्मत हो तो सब काम कर सकती हैं महिलाएं। उनका मैनेजर से मुकदमा चल रहा है और कई बार हमला भी हो चुका है लेकिन वह डरती नहीं हैं। वह अपने साथ पिस्टल लेकर चलती हैं।

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