Women's Day: डेढ़ वर्ष में तय किया फर्श से अर्श तक का सफर, बच्चों को देती हैं फ्री शिक्षा
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आठ साल पहले पति के साथ दो सूटकेस में कपड़े लेकर गुरुग्राम आईं रश्मि शर्मा आज किसी पहचान की मोहताज नहीं है। डेढ़ वर्ष पहले कर्ज लेकर शुरू किया व्यवसाय आज करोड़ों रुपये के एम्पायर के रूप में उभर चुका है। अपने संघर्ष के साथ ही रश्मि स्लम के 125 बच्चों को निशुल्क शिक्षा भी दे रही हैं।
कोठपुतली राजस्थान निवासी रश्मि शर्मा ने सीकर राजस्थान से स्कूल व कॉलेज की शिक्षा ग्रहण की। वर्ष 2011 में शादी के चार महीने बाद पति अजय शर्मा के साथ गुरुग्राम का रुख कर लिया। हालांकि उनके परिजन उन पर नौकरी करने के लिए दबाव बना रहे थे, लेकिन वह व्यवसाय करना चाहती थीं।
परिजनों के दबाव में एक-दो जगह उन्होंने नौकरी की, लेकिन कुछ ही दिनों बाद ही नौकरी छोड़ दी। गुरुग्राम में आते ही रश्मि ने पड़ोस में रहने वाले बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। इसके साथ ही स्लम के बच्चों को भी शिक्षित करना शुरू कर दिया। वर्ष 2014 में धीरे-धीरे उन्होंने इंस्टीट्यूट बना लिया।
डेढ़ वर्ष में खड़ा किया करोड़ों का व्यापार
यहां रूटीन में ट्यूशन पढ़ाने के साथ-साथ स्लम के बच्चों को भी पढ़ाने लगीं, जिनकी संख्या आज 125 तक पहुंच गई है। वह लगातार अपने पति से व्यवसाय करने की इच्छा जतातीं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह उसे नौकरी करने की सलाह देते। स्वयं को मजबूत करने के लिए पति की सलाह पर उन्होंने करीब 2 साल तक विभिन्न कॉरपोरेट कंपनियों और स्कूलों में इंटरव्यू दिए।
इसी बीच वर्ष 2017 में उनके पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने रश्मि को सर्जिकल सामान का व्यवसाय करने की सलाह दी। इस व्यक्ति ने अपना व्यवसाय ही रश्मि को सौंपने की बात कही। खास बात यह थी कि जो कंपनी रश्मि को सौंपने की बात की गई उस पर लाखों का कर्जा था, लेकिन हिम्मत दिखाते हुए रश्मि ने उसे टेकओवर कर लिया। अपनी बचत और बैंक से उधार लेकर उन्होंने सर्जिकल इंप्लांटस उद्योग में किस्मत आजमाई और दिन रात एक करके उन्होंने इसे महज डेढ़ साल में आसमान की बुलंदियों तक पहुंचा दिया।
रश्मि ने बताया कि करोड़ों रुपये का टर्नओवर होने के दौरान अनेक प्रतिद्वंद्वियों ने उन्हें परास्त करने का भी प्रयास किया, लेकिन वह नहीं झुकीं। कुछ लोगों ने करीब 6 महीने पहले उन्हें करोड़ों रुपये का अर्थिक नुकसान भी पहुंचाया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर गुरुग्राम में अपनी पहचान बनाए हुए हैं। आज उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब तीन करोड़ रुपये से अधिक का है। उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा अपनी पहचान बनाना नहीं बल्कि महिलाओं को इस तरह से सशक्त करना है कि वह शहर में अपनी अलग पहचान बना सकें।