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किसान आंदोलनः गाजीपुर बॉर्डर पर नारी शक्ति ने संभाल रखी है लंगर की बागडोर
Sun, 03 Jan 2021 05:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 03 Jan 2021 05:33 AM IST
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सेवाभाव...
- फोटो : amar ujala
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महीने भर से लगभग दो दर्जन महिलाएं अपने घर-बार, काम-काज से दूर गाजीपुर बॉर्डर पर किसान आंदोलन में सेवादारी कर रही हैं। वे खुश हैं कि किसान आंदोलन ने उन्हें एक साथ सेवा करने का मौका दिया है। नारीशक्ति ने यहां पर लंगर बनाने की जिम्मेदारी संभाल रखी है।
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पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मीनगर और गाजियाबाद से प्रतिदिन यह महिलाएं अपने घर का कामकाज पूरा कर सुबह गाजीपुर बॉर्डर पहुंच जाती हैं। इसके बाद सब्जियां धुलने, काटने, मसाले तैयार करने,आटा गूथ कर तैयार कराने के काम में लग जाती हैं। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहता है। यहां कब आना है, कितनी देर तक सेवा करना है, यह सब महिलाएं स्वयं तय करती हैं।
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बीच-बीच में भी महिलाएं यहां पहुंचती रहती हैं तो जिन्हें कई घंटे सेवा करते हो गया होता हैं, वह अपने घर चली जाती हैं। इस तरह यहां सेवा का क्रम निरंतर जारी रहता है। रोजाना हजारों लोग यहां लंगर खाते हैं। लंगर तैयार कराने की जिम्मेदारी इन्हीं महिलाओं के कंधों पर है। सेवा कर रही इन महिलाओं में कोई फैशन डिजाइनर है, तो कोई शिक्षक हैं। अधिकतर अपने घर की मुखिया हैं, जिन्होंने किसान आंदोलन में भी मोर्चा संभाला हुआ है।
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स्वयंसेवा दे रहीं महिलाओं ने साझा की मन की बात
हम अपना परिवार संभालते हैं, महीने भर से किसान आंदोलन में नया परिवार बन गया है। यहां सेवा कर अलग अलग जगह की महिलाएं एक दूसरे से जुड़ गई हैं - जसबीर कौर, गाजियाबाद
हमने बचपन से सेवा भाव सीखा है, यहां भी वही कर रहे हैं। वैसे तो फैशन डिजाइनिंग करते हैं, लेकिन मौजूदा समय मेरे लिए किसानों की सेवा ही सबसे महत्वपूर्ण है - दलजीत सिद्घू घई,
लक्ष्मी नगर
मैं तो बस सरकार से इतना ही कहना चाहती हूं कि किसानों की बात मानें और उन्हें उनका हक दे दें, अब बहुत हुआ। मोदी जी किसान भी आपके अपने ही हैं - इंदरजीत कौर, गाजियाबाद से
प्रधानमंत्री मोदी जी से कहना है कि वह दोनों आंखों से देखें, केवल उद्योगपतियों से काम नहीं चलेगा, किसानों के भले के बारे में भी उन्हें और उनकी सरकार को सोचना होगा - गुरमिंदर कौर,
लक्ष्मी नगर