सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं महिलाएं, पेट्रोलिंग करती नहीं दिखती पुलिस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यहां की महिलाएं खुद को सुरक्षित नहीं समझती हैं। ऐसा कहना यहां रहने वाली महिलाओं का है, जो स्कूल व कार्यालय में कार्यरत हैं। उनका कहना है कि यहां दूर-दूर तक सड़कों पर सन्नाटा छाया रहता है।
कोई भी पुलिसकर्मी नजर नहीं आता। ऐसे में बदमाश आए दिन लूटपाट करते हैं। पुलिस को सूचना देने पर वह काफी समय बाद घटना स्थल पर पहुंचती है। यदि ऐसा रहा तो बदमाश कभी भी किसी बड़ी वारदात को अंजाम दे सकते हैं।
गौरतलब है कि ग्रनो वेस्ट में करीब 50 हजार की आबादी है। जिसमें करीब 15 हजार महिलाएं हैं। ज्यादातर महिलाएं स्कूलों में कार्यरत है। जबकि कुछ महिलाएं मल्टी नेशनल कंपनी में नौकरी करती हैं।
अपने कार्यस्थलों से निकल कर घर वापस जाने केदौरान महिलाएं असुरक्षित महसूस करती हैं। सुनसान सड़कों पर पुलिस का कोई पहरा नहीं होता। वहीं, सड़कों की स्ट्रीट लाइट खराब होने की वजह से भी महिलाओं के लिए खतरा बना रहता है।
चूंकि यहां ट्रांसपोर्ट के लिए कोई साधन नहीं है। ऐसे में महिलाओं का कहना है कि डर की वजह से काम छोड़कर वह घर बैठ जाएं तो कैसे चलेगा। एक थाना व एक चौकी होने के बाद भी पुलिस दूर तक नजर नहीं आती है।
महिलाओं के लिए नहीं है हेल्प लाइन नंबर
बता दें कि पूरे ग्रेनो वेस्ट में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोई भी हेल्प लाइन नंबर नहीं है और न ही किसी तरह का कोई बोर्ड लगा है। यदि महिलाएं मुसीबत में हों तो किसकी मदद लें।
कम आबादी होने की वजह से बदमाश आसानी से लूटपाट करकेचले जाते हैं। 100 नंबर डायल करने के घंटों बाद पुलिस मौके पर पहुंचती है। जिस पर अधिकारी भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।
दूर तक नजर नहीं आती पीसीआर
ग्रेनो वेस्ट में एक थाना व चौकी होने के बाद भी पुलिस सड़कों पर पेट्रोलिंग करती नजर नहीं आती। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि पुलिस की इस लापरवाही की वजह से वह शाम के बाद निकलना बंद कर देते हैं। सुरक्षा के लिहाज से देखा जाए तो पुलिस सड़कों पर गश्त व चेकिंग करते नजर आए तो लोग अपने आपको सुरक्षित महसूस कर सकें।
बढ़ता जा रहा है क्राइम
रोजाना ग्रेनो वेस्ट में क्राइम बढ़ता जा रहा है। पुलिस से शिकायत करने पर उस पर कोई भी कार्रवाई नहीं होती। लूटपाट के कई मामले थाने में मौजूद हैं, लेकिन पुलिस इनका खुलासे करने में नाकाम है। लूटपाट व झपटमारी के कई मामले तो पुलिस तक पहुंच भी नहीं पाते हैं, डरे-सहमे पीड़ित घटना के बाद अपने घर चले जाते हैं।