महिलाओं के लिए मिशाल बन रही ये लेडी, हरियाणा में पहली संभालेंगी बार सिटी बस की कमान
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महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश करने के लिए एमए-बीएड की डिग्रियां रखने वाली अमृता ने शिक्षिका की नौकरी छोड़कर परिचालक बनने का निर्णय लिया है। वे रविवार से गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) की सिटी बस में बतौर परिचालक कमान संभालेंगी। हरियाणा समेत दिल्ली-एनसीआर में चलने वाली बसों में अमृता पहली महिला परिचालक हैं। उनके इस फैसले का परिजन भी स्वागत कर रहे है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने भी अमृता के जज्बे की तारीफ की।
गुरुग्राम में आज (रविवार) से शुरू हो रही जीएमडीए की सिटी बस सेवा को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हरी झंडी दिखाएंगे। महिला सशक्तिकरण की दिशा में जीएमडीए ने पहल करते हुए महिला परिचालक (कस्टमर सर्विस एजेंट) को भर्ती के लिए आवेदन मांगे थे। केवल अमृता ने ही इसका हौसला दिखाया। मूल रूप से महेंद्रगढ़ जिले के भुंगारका गांव की निवासी अमृता टेस्ट पास करते हुए परिचालक की पद तक पहुंचीं।
अमृता का कहना है कि मेरे पास नौकरी की कमी नहीं थी। शिक्षिका के तौर पर पद और सम्मान दोनों था, लेकिन मैं महिलाओं के लिए मिसाल पेश करना चाहती थी। लोग महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण की बात तो करते हैं, लेकिन जब वक्त आता है तो सामने नहीं आते हैं।
इसे ध्यान में रखते हुए खुद को आगे लाकर मिसाल बनना चाहती हूं। जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वी उमाशंकर कहते है कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में हमने यह पहल की, जिसमें अमृता का ज्वॉइन किया तो हमें भी खुशी हुई कि इस फील्ड में महिलाएं आ रही हैं। अमृता से सीख लेकर और भी महिला परिचालक ज्वॉइन करेंगी।
इंदिरा गांधी से प्रभावित है अमृता
किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली अमृता ने बताया कि वे बचपन से ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से बहुत प्रभावित रही हैं। इसकी बदौलत मेरे अंदर पब्लिक सेक्टर में काम करने की इच्छा जागृत हुई। अपनी मां रामकला को प्रेरणास्त्रोत मानने वाली अमृता ने बताया कि घर में बड़ी बेटी होने के बावजूद मां ने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया। उनकी बदौलत मैं यहां तक पहुंच पाई हूं।
काम कभी छोटा नहीं होता
बकौल अमृता, काम कभी छोटा या बड़ा नहीं होता है। मेरे ससुराल का परिवार और पति तपन का भी यही मानना है। शादी के बाद वे हमेशा मुझे प्रेरित करते हुए कहते हैं कि जिंदगी में कुछ भी करो, पर उसमें समाज की भलाई जरूर हो। शुरुआत में समाज में बहुत ताने मिले। लोगों ने ससुरालवालों के भी कान भरे, लेकिन मेरी सोच से परिवारवाले सहमत हुए। मैं मानती हूं कि महिलाएं किसी भी काम में पुरुषों से कम नहीं हैं। बस सोच को आगे बढ़ाकर काम करने की जरूरत है।
परिवार वाले भी बढ़ा रहे हैं हौंसला
महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी कैंपस से पढ़ चुकी अमृता का ससुराल खंडोड़ा (रेवाड़ी) है। पेशे से टैक्सी व्यवसायी पति बिजेंद्र उर्फ तपन भी अमृता के फैसले से खुश हैं। उनका कहना है कि अमृता बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बेटी बढ़ाओ की प्रतीक है। समाज के लिए एक मिसाल है।
ससुर अजीत सिंह कहते हैं कि सिटी बस सेवा में महिलाओं की भूमिका से समाज में एक सकारात्मक संदेश भी जाएगा। सीएम से मिलने को लेकर उत्साहित अमृता ने कहा कि रविवार को सीएम सर से मिलने के बाद मैं उन्हें इस बेहतरीन कार्य के लिए धन्यवाद देने के साथ रोडवेज बसों में महिलाओं को स्थायी परिचालक की नौकरी देने की मांग भी करूंगी।