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महिला डॉक्टर ने की आत्महत्या, सुसाइड लेटर में सामने आई शोषण की बात
Fri, 08 Feb 2019 06:05 AM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Published by: राजेश सैनी
Updated Fri, 08 Feb 2019 06:05 AM IST
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- फोटो : social media
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केंद्र सरकार के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) की महिला डॉक्टर के आत्महत्या मामले में नया खुलासा हुआ है। घटना के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को अस्पताल प्रबंधन ने तीनों आरोपी डॉक्टरों की पहचान सार्वजनिक कर दी। मृतका डॉ. पूनम वोहरा ने सुसाइड नोट में रेडियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. अनिल तनेजा, वरिष्ठ डॉ. यूसी गर्ग और डॉ. शिवानी मेहरा पर शोषण के आरोप लगाए हैं।
उधर, नई दिल्ली जिले की नॉर्थ एवेन्यू थाना पुलिस ने तीनों डॉक्टरों के खिलाफ आईपीसी की धारा-306 (खुदकुशी के लिए उकसाना) के तहत केस दर्ज कर लिया है। नई दिल्ली जिला डीसीपी मधुर वर्मा ने बताया कि मृतका डॉ. वोहरा के पति चरणजीव वोहरा की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। अस्पताल के एक कर्मचारी का कहना है कि डॉ. वोहरा काफी समय से अपने विभाग में वर्चस्व की लड़ाई लड़ रही थीं। मामला सीधे तौर पर उनकी कार्यशैली से जुड़ा है।
गौरतलब है कि आरएमएल के रेडियोलॉजी विभाग में कार्यरत 52 वर्षीय डॉ. पूनम वोहरा ने बुधवार दोपहर को अस्पताल परिसर में ही स्थित अपने निवास पर पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस को मिले सुसाइड नोट में उन्होंने विभाग के तीन डॉक्टरों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए। पुलिस को दी शिकायत में उनके पति का कहना है कि डॉ. वोहरा पिछले कई दिनों से परेशान चल रही थीं। उन्होंने विभागीय तनाव के बारे में उन्हें बताया भी था। दूसरी तरफ तीनों आरोपी डॉक्टरों को अस्पताल से छुट्टी पर भेज दिया गया है।
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मंत्रालय के अतिरिक्त डीजी ने दी थी सूचना
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके तिवारी ने बयान में कहा है कि इन तीनों डॉक्टरों के नाम सुसाइड नोट में लिखे हुए हैं। बुधवार को घटना के बाद अस्पताल पहुंची पुलिस ने सुसाइड नोट प्रबंधन को दिखाया, जिसमें मृतका डॉ. वोहरा ने इन डॉक्टरों पर आरोप लगाए हैं। साथ ही डॉ. तिवारी का ये भी कहना है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त डीजी डॉ. एके गड़पायले ने उन्हें फोन पर इस घटना की जानकारी दी थी।
नहीं पता क्यों लिखा मेरा नाम : डॉ. यूसी
सुसाइड नोट में लिखे नामों में से एक डॉ. यूसी गर्ग का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आखिर डॉ. वोहरा ने उनके नाम का जिक्र क्यों किया है, जबकि वे जुलाई 2018 में ही प्रशासनिक पद छोड़ चुके थे। जब वे विभागाध्यक्ष रहे, तब भी कभी डॉ. वोहरा ने उनसे किसी भी तरह की शिकायत नहीं की थी। डॉ. गर्ग का कहना है कि वे हर तरह की जांच में पुलिस को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं। डॉ. अनिल तनेजा और डॉ. शिवानी से संपर्क नहीं हो सका।
वरिष्ठ डॉक्टरों के बीच अक्सर रहता है तनाव
बताया जा रहा है कि आरएमएल अस्पताल के कई विभागों में वरिष्ठ डॉक्टरों के बीच अक्सर तनाव की घटनाएं बाहर आती रही हैं। हालांकि ज्यादातर मामले प्रबंधन अपने या मंत्रालय के स्तर पर निपटा लेता है, लेकिन इस बार मामला आत्महत्या से जुड़ने के कारण कानूनी दायरे तक पहुंच गया है। बताया ये भी जा रहा है कि डॉ. वोहरा हमेशा से ही मरीजों की सेवा के लिए तत्पर रहती थीं।
रेडियोलॉजी विभाग में 12 लोगों का स्टाफ
आरएमएल अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में 12 लोगों का स्टाफ है। इसमें दो सीएमओ और अन्य 10 डॉक्टर शामिल हैं। इनमें से भी सात वरिष्ठ डॉक्टर विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इन्हीं सात में से एक डॉ. पूनम वोहरा थीं। अब तीन वरिष्ठ डॉक्टरों पर प्रताड़ना के आरोप लगे हैं। ऐसे सवाल ये है कि आखिर इन डॉक्टरों के बीच आखिर क्यों इतना विवाद था।
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उधर, नई दिल्ली जिले की नॉर्थ एवेन्यू थाना पुलिस ने तीनों डॉक्टरों के खिलाफ आईपीसी की धारा-306 (खुदकुशी के लिए उकसाना) के तहत केस दर्ज कर लिया है। नई दिल्ली जिला डीसीपी मधुर वर्मा ने बताया कि मृतका डॉ. वोहरा के पति चरणजीव वोहरा की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। अस्पताल के एक कर्मचारी का कहना है कि डॉ. वोहरा काफी समय से अपने विभाग में वर्चस्व की लड़ाई लड़ रही थीं। मामला सीधे तौर पर उनकी कार्यशैली से जुड़ा है।
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गौरतलब है कि आरएमएल के रेडियोलॉजी विभाग में कार्यरत 52 वर्षीय डॉ. पूनम वोहरा ने बुधवार दोपहर को अस्पताल परिसर में ही स्थित अपने निवास पर पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस को मिले सुसाइड नोट में उन्होंने विभाग के तीन डॉक्टरों पर प्रताड़ना के आरोप लगाए। पुलिस को दी शिकायत में उनके पति का कहना है कि डॉ. वोहरा पिछले कई दिनों से परेशान चल रही थीं। उन्होंने विभागीय तनाव के बारे में उन्हें बताया भी था। दूसरी तरफ तीनों आरोपी डॉक्टरों को अस्पताल से छुट्टी पर भेज दिया गया है।
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मंत्रालय के अतिरिक्त डीजी ने दी थी सूचना
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके तिवारी ने बयान में कहा है कि इन तीनों डॉक्टरों के नाम सुसाइड नोट में लिखे हुए हैं। बुधवार को घटना के बाद अस्पताल पहुंची पुलिस ने सुसाइड नोट प्रबंधन को दिखाया, जिसमें मृतका डॉ. वोहरा ने इन डॉक्टरों पर आरोप लगाए हैं। साथ ही डॉ. तिवारी का ये भी कहना है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त डीजी डॉ. एके गड़पायले ने उन्हें फोन पर इस घटना की जानकारी दी थी।
नहीं पता क्यों लिखा मेरा नाम : डॉ. यूसी
सुसाइड नोट में लिखे नामों में से एक डॉ. यूसी गर्ग का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आखिर डॉ. वोहरा ने उनके नाम का जिक्र क्यों किया है, जबकि वे जुलाई 2018 में ही प्रशासनिक पद छोड़ चुके थे। जब वे विभागाध्यक्ष रहे, तब भी कभी डॉ. वोहरा ने उनसे किसी भी तरह की शिकायत नहीं की थी। डॉ. गर्ग का कहना है कि वे हर तरह की जांच में पुलिस को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं। डॉ. अनिल तनेजा और डॉ. शिवानी से संपर्क नहीं हो सका।
वरिष्ठ डॉक्टरों के बीच अक्सर रहता है तनाव
बताया जा रहा है कि आरएमएल अस्पताल के कई विभागों में वरिष्ठ डॉक्टरों के बीच अक्सर तनाव की घटनाएं बाहर आती रही हैं। हालांकि ज्यादातर मामले प्रबंधन अपने या मंत्रालय के स्तर पर निपटा लेता है, लेकिन इस बार मामला आत्महत्या से जुड़ने के कारण कानूनी दायरे तक पहुंच गया है। बताया ये भी जा रहा है कि डॉ. वोहरा हमेशा से ही मरीजों की सेवा के लिए तत्पर रहती थीं।
रेडियोलॉजी विभाग में 12 लोगों का स्टाफ
आरएमएल अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में 12 लोगों का स्टाफ है। इसमें दो सीएमओ और अन्य 10 डॉक्टर शामिल हैं। इनमें से भी सात वरिष्ठ डॉक्टर विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इन्हीं सात में से एक डॉ. पूनम वोहरा थीं। अब तीन वरिष्ठ डॉक्टरों पर प्रताड़ना के आरोप लगे हैं। ऐसे सवाल ये है कि आखिर इन डॉक्टरों के बीच आखिर क्यों इतना विवाद था।