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‘कैब कंपनियों के साथ बैठक कर समस्या का हल निकाले सरकार’

Tue, 26 Apr 2016 04:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 26 Apr 2016 04:40 AM IST
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'with Cab companies meeting government solve the problem'

हाईकोर्ट ने  दिल्ली सरकार को ओला और उबर कैब कंपनी के प्रतिनिधियों से एक सप्ताह में बैठक करने का निर्देश दिया है। ताकि, राजधानी में गैरकानूनी रूप से चल रही एप आधारित कैब की समस्या का समाधान किया जा सके। अदालत ने कहा कि बैठक में यह देखा जाए कि क्या उक्त कंपनियां सरकार से नए सिरे से लाइसेंस प्राप्त करने में रुचि रखती हैं या नहीं।

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न्यायमूर्ति जेआर मिड्ढा ने कहा कि बैठक में अन्य एप के जरिये जूगनू नाम से सार्वजनिक परिवहन सेवा प्रदान करने की पेशकश करने वाले ऑटो रिक्शा के प्रतिनिधियों को भी बुलाया जाए।
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साथ ही दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों को भी निर्देश दिया कि वे बैठक में शामिल हों और अपने विचार साझा करें। अदालत ने यह सुझाव व निर्देश दिल्ली सरकार द्वारा पेश उस जवाब पर दिया है, जिसमें कहा गया था कि ओला-उबर बिना लाइसेंस के गैरकानूनी रूप से चल रही हैं।

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सुनवाई के दौरान सरकार और कैब कंपनियों के तर्क

'with Cab companies meeting government solve the problem'

इनके लाइसेंस संबंधी आवेदन को परिवहन विभाग ने 28 जून 2015 को खारिज कर दिया था। एप आधारित इन कंपनियों की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि लाइसेंस प्राप्त करने का कोई मुद्दा नहीं है।

कंपनियां लाइसेंस लेना चाहती हैं, लेकिन सरकार ने उनके प्रतिनिधित्व को ठुकरा दिया। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि हमने लाइसेंस के लिए पहले से ही नियम तय कर रखे हैं। कंपनियों को उसका पालन करना होगा।

गौरतलब है कि अदालत मैजिक सेवा प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। याची ने आरोप लगाया है कि कुछ कैब बिना लाइसेंस के चल रही हैं और सरकार द्वारा तय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर रही हैं। इतना ही नहीं, वे सम विषम की आड़ में 38 रुपये प्रति किलोमीटर तक वसूल रही है।

10 मई को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

'with Cab companies meeting government solve the problem'

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वर्तमान में दिल्ली सरकार की सार्वजनिक परिवहन की कमी है, ऐसे में कंपनियों को नए सिरे से लाइसेंस के लिए आवेदन करने के लिए एक मौका देना चाहिए।  अदालत ने सरकार से कहा कि वे सभी कंपनियों को बुलाएं और एक उचित योजना तैयार करें।

यदि सभी एक साथ बैठते हैं तो  टैक्सी आपरेटरों द्वारा उठाई गई परेशानियों का अंत हो जाएगा। अदालत ने सरकार को बैठक के बाद विस्तृत रिपोर्ट 10 मई को पेश करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान संबंधित कंपनियों के वकीलों ने सरकार द्वारा पेश रिपोर्ट मीडिया में प्रकाशित होने का भी मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट अदालत में आने से पहले ही मीडिया में प्रकाशित करवाई जा रही है। इस पर अदालत ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार का यह रवैया ठीक नहीं है।

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