चुटकियों में नकली शराब बनती थी ब्रांडेड, पार्टियों में करते थे सप्लाई
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उत्तर पश्चिम जिले के स्पेशल स्टाफ ने ब्रांडेड कंपनी की नकली शराब तैयार करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना बाप-बेटे सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
आरोपी नकली शराब को रेस्टोरेंट, बार, पब और पार्टी में सप्लाई करते थे। पुलिस को इनके पास से बड़ी मात्रा में नकली शराब और ब्रांडेड कंपनी की शराब की बोतलें मिली हैं।
जिला पुलिस उपायुक्त विजय सिंह ने बताया कि स्पेशल स्टाफ में तैनात एएसआई सुशील कुमार को सूचना मिली कि कुछ लोग अवैध शराब को लेकर पीतमपुरा की ओर जाने वाले हैं।
सूचना के बाद चेकिंग के दौरान पुलिस ने मुकरबा चौक की ओर से आ रही सिल्वर कलर की एक वैगनआर को रोका। तलाशी के दौरान कार से शराब की 60 बोतलें मिलीं।
कबाड़ी से खरीदते थे ब्रांडेड शराब की बोतल
कार चलाने वाले की पहचान पीतमपुरा निवासी सुमित चावला जबकि दूसरे की पहचान उसके पिता जयप्रकाश चावला के रूप में हुई।
पूछताछ में दोनों ने बताया कि देशी शराब में कुछ मात्रा में ब्रांडेड शराब मिलाकर शराब तैयार करते हैं और फिर उसे ब्रांड की खाली बोतल में डाल देते हैं।
इसके बाद बोतल पर संबंधित ब्रांडेड कंपनी का स्टीकर लगा देते थे। साथ ही ढक्कन को मशीन से सील कर देते थे। वह मुनिरका के रहने वाले कबाड़ी अशोक से ब्रांडेड कंपनी की शराब की बोतलें खरीदते थे।
उनके निशानदेही पर पुलिस के अशोक को गिरफ्तार कर लिया, वहीं सेक्टर 15 स्थित फ्लैट पर छापा मारकर सौ से अधिक खाली बोतलें और नकली शराब जब्त कर ली।
स्टीकर लगते ही कीमत होती थी हजार के पार
आरोपियों ने बताया कि एक बोतल नकली शराब तैयार करने में 400 रुपये की लागत आती है और उसे ब्रांडेड कंपनी का स्टीकर लगाकर 1100 से 2100 में बेच देता है।
पुलिस ने जांच के बाद बताया कि जय प्रकाश दस साल से इस धंधे से जुड़ा है और पहले भी दो बार गिरफ्तार हो चुका है। उसने अपने बेटे को भी इस धंधे से जोड़ लिया।
वहीं, अशोक पिछले चार साल से जय प्रकाश के संपर्क में था और खाली बोतलों की अच्छी कीमत मिलने की वजह से वह धंधे से जुड़ा था।