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अनाज मंडी अग्निकांड: मुशर्रफ के दोस्त मोनू ने कहा- मरते दम तक उसके बच्चों की सुरक्षा करूंगा
Tue, 10 Dec 2019 04:03 AM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Tue, 10 Dec 2019 04:03 AM IST
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अनाज मंडी अग्निकांड
- फोटो : अमर उजाला
मुशर्रफ ने सात मिनट तक मुझसे फोन पर बात की थी, उसकी तड़प और पुकार मेरे कानों में गूंज रही है। वह मेरा सबसे अच्छा दोस्त था। हम दोनों ही एक दूसरे का हर कदम पर साथ देते थे। उसने अपने अंतिम पल में मुझे अपने परिवार की जिम्मेदारी सौंपी है। मैं मरते दम तक उसके परिवार और बच्चों की सुरक्षा करूंगा।
यह कहना है शोभित अग्रवाल उर्फ मोनू का। बीते रविवार मुशर्रफ की सामने आई कॉल रिकॉर्डिंग के बाद सोमवार को शोभित अपने दोस्त का शव लेने के लिए लोकनायक अस्पताल पहुंचा। यहां उन्होंने अपने मन की पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि अब तक उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके दोस्त के परिवार के लिए मदद की कोई घोषणा नहीं की है। वे दोनों ही बिजनौर जिला निवासी हैं।
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यह कहना है शोभित अग्रवाल उर्फ मोनू का। बीते रविवार मुशर्रफ की सामने आई कॉल रिकॉर्डिंग के बाद सोमवार को शोभित अपने दोस्त का शव लेने के लिए लोकनायक अस्पताल पहुंचा। यहां उन्होंने अपने मन की पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि अब तक उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके दोस्त के परिवार के लिए मदद की कोई घोषणा नहीं की है। वे दोनों ही बिजनौर जिला निवासी हैं।
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उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से अपील करते हुए कहा कि वह अपने दोस्त के परिवार की जिम्मेदारी हमेशा उठाएगा, लेकिन सरकार को भी मुशर्रफ के बच्चों के लिए कुछ करना चाहिए। अस्पताल में मौजूद मृतक के चचेरे भाई फुरकान अली ने बताया कि वह बिजनौर जिले के नगीना थाना क्षेत्र स्थित हाढामाई दास गांव निवासी हैं।
फुरकान को जब शोभित का फोन पहुंचा तो वह तुरंत रविवार को दिल्ली पहुंचा, यहां उन्होंने लोकनायक अस्पताल में अपने भाई के शव की शिनाख्त की। फुरकान ने बताया कि मुशर्रफ अली के घर बहुत बुरा हाल है। मासूम बच्चे अपने पिता के लिए तड़प रहे हैं।
शोभित बताते हैं, मेरा दोस्त बहुत अच्छा था। वह काफी समय से यहां काम कर रहा था। वह हमेशा पूरी लगन के साथ काम करता और ज्यादा से ज्यादा रुपये कमा कर अपने बच्चों को अच्छी परवरिश देना चाहता था। पूरे परिवार में मेरा दोस्त इकलौता कमाने वाला था।
फुरकान को जब शोभित का फोन पहुंचा तो वह तुरंत रविवार को दिल्ली पहुंचा, यहां उन्होंने लोकनायक अस्पताल में अपने भाई के शव की शिनाख्त की। फुरकान ने बताया कि मुशर्रफ अली के घर बहुत बुरा हाल है। मासूम बच्चे अपने पिता के लिए तड़प रहे हैं।
शोभित बताते हैं, मेरा दोस्त बहुत अच्छा था। वह काफी समय से यहां काम कर रहा था। वह हमेशा पूरी लगन के साथ काम करता और ज्यादा से ज्यादा रुपये कमा कर अपने बच्चों को अच्छी परवरिश देना चाहता था। पूरे परिवार में मेरा दोस्त इकलौता कमाने वाला था।