पेंशन घोटाले की मिली शिकायत, घर-घर जाकर होगी जांच
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तीनों नगर निगम में सत्तारूढ़ भाजपा के समक्ष वृद्धावस्था पेंशन गले की हड्डी बन गई है। एक ओर वह काफी अर्से से वृद्धावस्था पेंशन नहीं दे रही है, वहीं दूसरी ओर फर्जी तौर पर पेंशन कराने के मामले प्रकाश में आए हैं।
इस संबंध में उत्तरी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त ने जाली दस्तावेज से पेंशन कराने के मामले की जांच के आदेश दिए हैं, जबकि दक्षिण दिल्ली नगर निगम के सदन ने सभी पेंशन लेने वालों की जांच कराने का फैसला किया है।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त पीके गुप्ता को गैर कानूनी तरीके से पेंशन लेने की शिकायत मिली है। इस संबंध में उनको पर्याप्त सबूत भी दिए गए हैं। हालांकि यह मामला चार साल पुराना है, मगर उन्होंने इस मामले की जांच के लिए सतर्कता विभाग को आदेश दे दिए हैं। विभाग को दो सप्ताह के अंदर जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश दिया गया है।
घर-घर जाकर होगी जांच
सूत्रों के अनुसार उनको शिकायत मिली है कि वर्ष 2007 से 2012 तक नजफगढ़ क्षेत्र के कई लोगों को फर्जी तौर पर पेंशन प्राप्त हो रही थी। इस कारनामे को जाली दस्तावेज के आधार पर विभाग के अधिकारी व कर्मचारी से सांठगांठ करके अंजाम दिया गया था।
दूसरी ओर दक्षिण दिल्ली नगर निगम में वृद्धावस्था पेंशन के मामले में गड़बड़ी होने की शिकायतें मिली हैं। इसके चलते नगर निगम ने सभी पेंशन धारकों की जांच कराने का निर्णय लिया गया है। इतना ही नहीं, निगम ने पिछले दिनों जारी की पेंशन भी रोक दी है। सदन के नेता सुभाष आर्य के अनुसार सभी पेंशन धारकों के बारे में घर-घर जाकर जांच की जाएगी।
इस दौरान उनके पते के बारे में जांच की जाएगी। इसके अलावा उनके अन्य दस्तावेजों का भी मिलान किया जाएगा। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनको चेक से पेंशन दी जाएगी। इसके बाद उनको नियमित तौर पर पेंशन देने का सिलसिला शुरू होगा। उपराज्यपाल के निर्देश के तहत तीन माह बाद पेंशन राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी।