किसान आंदोलन में इतना सक्रिय क्यों दिख रही है आप? ग्रामीण भारत में जड़ें जमाना होगी बड़ी चुनौती
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अरविंद केजरीवाल हर मुद्दे पर खुलकर किसानों का साथ दे रहे हैं। वे सिंधु बॉर्डर पर किसानों के बीच पहुंचकर खुद को उनके साथ हर मुद्दे पर खड़ा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। आप नेता राघव चड्ढा स्वयं पहुंचकर किसानों को मुफ्त इंटरनेट की सुविधा दे रहे हैं तो आतिशी मार्लेना आंदोलनकारी किसानों के लिए लंगर सेवा कर रही हैं।
जब किसानों की बिजली-पानी काटने की बात हुई तो उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया स्वयं गाजीपुर यूपी बॉर्डर पहुंच गए और किसानों को हर संभव मदद देने का एलान किया। ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठाया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी किसानों के मुद्दे पर इतना मुखर क्यों है? इसका उसे क्या सियासी लाभ मिल सकता है?
आम आदमी पार्टी की नवीं राष्ट्रीय परिषद की बैठक में अरविंद केजरीवाल 6 राज्यों में चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि आम आदमी पार्टी की इस राष्ट्रीय महत्त्वाकांक्षा को पूरा करने में किसान बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं। पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंंड, गुजरात और हिमाचल प्रदेश किसान बहुल राज्य हैं तो गोवा में पार्टी पहलेे ही विधानसभा चुनाव में अपने लिए 6 प्रतिशत वोट पाकर अपनी मजबूती साबित कर चुकी है।
अगर किसानों का एक धड़ा भी उसकेे पक्ष में मुड़ जाता है तो वह इन 6 राज्यों के विधानसभा चुनावों में अपने लिए बड़ी भूमिका की तलाश कर सकती है जो पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में मदद कर सकती है।
28 जनवरी को राष्ट्रीय परिषद को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अन्य राज्यों की जनता भी दिल्ली की तरह उच्च स्तरीय शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, मुफ्त बिजली, साफ पानी और विकासवादी राजनीति की हवा में सांस लेना चाहती है। यह आम आदमी पार्टी की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरे।
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के पास वह विजन है कि भारत को 21वीं और 22वीं सदी में किस तरह का होना चाहिए। जाहिर है कि वे राष्ट्रीय सोच को लेकर चल रहे हैं। लेकिन चतुर राजनेता साबित हो चुके केजरीवाल जानते हैं कि ग्रामीण भारत में सफल हुए बिना इस सोच को अंजाम नहीं दिया जा सकता और इसके लिए किसानों का उनके साथ आना बहुत जरूरी है। जाहिर है पार्टी इसी कोशिश में जुटी हुई है।
किसान आंदोलन में आप की सक्रियता की एक बड़ी वजह पंजाब चुनाव भी हैं जहां पार्टी पहले ही मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में है। पार्टी कैप्टन अमरिंदर सिंह पर इसी कारण बहुत ज्यादा हमलावर है।
अगर आम आदमी पार्टी किसानों को साधते हुए पंजाब में सत्ता तक पहुंचने में सफल हो जाती है तो वह कृषि में एक 'आदर्श मॉडल' देने की स्थिति में हो जाएगी जो उसे अन्य किसान बहुल राज्यों में उसे स्थापित करने में मदद कर सकते हैं। स्पष्ट है कि किसान आंदोलन पार्टी के लिए संभावनाओं का नया द्वार खोल सकते हैं।
क्या स्थापित दलों के बीच जगह बना पाएगी आप?
आप पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने अमर उजाला से कहा कि यह सवाल दिल्ली के 3 चुनावों में आप को मिली शानदार सफलता के बाद बेमानी हो चुका है। जनता ने यह दिखा दिया है कि जब उसे परंपरागत राजनीति से अलग हटकर विकासवादी राजनीति का विकल्प मिला तो उसने विकास को अपना लिया।
उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि यही हाल यूपी, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में होगा। इन राज्यों का किसान अपनी सरकारों से तंग आ चुका है जो किसान के नाम पर वोट लेकर उद्योगपतियों के लिए काम करना शुरू कर देते हैं।
ध्यान रहे कि आम आदमी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में पार्टी की संभावनाओं के विस्तार की जिम्मेदारी संजय सिंह को ही सौंप रखी है। वे लगातार मिशन मोड पर काम कर रहे हैंं और कई बार लखनऊ पहुंचकर योगी आदित्यनाथ सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर चुके हैें। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि इस कारण कई बार उन्हें राज्य सरकार से राजनीतिक प्रतिशोध का सामना भी करना पड़ा।
ग्रामीण क्षेत्रों में कैसे सफल होगी आप?
आम आदमी पार्टी अभी तक दिल्ली में ही सफल हो सकी है जो लगभग पूरी तरह शहरी आबादी वाला राज्य है। शहरी मतदाता ज्यादा जागरूक और विकासवादी राजनीति को पसंद करने वाला होता है।
जबकि माना जाता है कि ग्रामीण भारत का मतदाता अभी भी पारंपरिक सोच से जुड़ा होता है। उसके लिए जाति, क्षेत्रीय भावनाएं प्रमुख होती हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी इन जगहों पर सफलता कैसे दर्ज करेगी, यह बड़ा सवाल है।
संजय सिंह कहते हैं कि इस तरह की चिंता पुराने जमाने की बात हो गई है। अब ग्रामीण क्षेत्र का युवा भी स्मार्ट फोन से लैस है और उसे भी राष्ट्रीय राजनीति की पूरी जानकारी रहती है। वह भी बड़े बदलावों को महसूस कर रहा है।
जैसे ही उसे बदलाव की बात अपने तक पहुंचती दिखेगी, वह राजनीति की नई संभावनाओं को अवश्य महसूस करना चाहेगा। जाहिर है कि आम आदमी पार्टी दिल्ली की तरह इन राज्यों में भी युवाओं के जरिए ही अपनी राजनीति को आगे बढ़ाना चाहती है।