जानिए क्यों गरीब के लिए मॉल्स में जाना और कैशलेस लेनदेन करना है मुश्किल
हेडिंग: कैशलेस लेनदेन का डर, मल्टीस्टोर से बच रहा मजदूर वर्ग
मल्टीस्टोर में महंगा होता है राशन और उधारी भी संभव नहीं
रोजमर्रा की खरीदारी के लिए अभी भी नकद ही एकमात्र सहारा
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नवंबर खत्म हो गया है और बृहस्पतिवार से लोगों की सैलरी आनी शुरू हो जाएगी। इससे बैंकों और एटीएम पर दबाव बढ़ेगा, क्योंकि लोगों को उन सारे कामों के लिए पैसों की जरूरत पड़ने वाली है जिसके लिए कैश ही एकमात्र सहारा है। दूध, फल, सब्जी से लेकर वाहनों के किराये तक का भुगतान कैश से ही होता है।
आमतौर पर मजदूर वर्ग आनलाइन लेनदेन या प्लास्टिक मनी के प्रयोग से बचता है, क्योंकि उसे धोखे और हैकिंग का डर बना होता है। खोड़ा में बिरयानी की दुकान चलाने वाले 45 वर्षीय शकील कहते हैं कि उनकी रोज की कमाई दो से तीन हजार रुपये की है, लेकिन उन्होंने आज तक ऑनलाइन पेमेंट नहीं की।
उनके एक रिश्तेदार के कार्ड का क्लोन करके किसी ने एक दिन में ही दो लाख की शॉपिंग कर ली गई थी तक से ही वे डरे हुए हैं। इधर, खोड़ा में बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूर से लेकर रोज कमाने-खाने वाले लोग रहते हैं जो किसी भी तरह के लेन-देन के लिए नकद पर ही निर्भर रहते हैं।
मोहल्ले की दुकानों में उनका लेनदेन उधारी में ही चलता है और यहां उन्हें वाजिब दाम पर सामान भी मिल जाता है। जबकि सरकार चाहती है कि लोग कैशलेस लेन-देन करें, लेकिन इसकी सुविधा अभी बड़ी दुकानों या मल्टीस्टोर में ही उपलब्ध है।
रोज दो से तीन सौ रुपये की कमाई करने वाले लोगों के लिए मल्टीस्टोर से खरीदारी करना मुश्किल है, क्योंकि यहां ब्रांडेड सामान ही मिलता है। साथ ही, बिना ब्रांड वाले सामान की कीमत आम दुकानों से ज्यादा होती है।
खोड़ा में होने की वजह से हमारे यहां बड़ी संख्या में मजदूर वर्ग के लोग शॉपिंग करने आते हैं, लेकिन 20 दिनों में लोगों का आना काफी कम हो गया है। मजदूर वर्ग के लोग कैश में ही खरीदारी करते हैं। इनमें से कम ही लोगों के पास कार्ड की सुविधा है और जिनके पास है भी वह कार्ड से शॉपिंग करने में डरते हैं। - संदीप, मैनेजर, विशाल मेगामार्ट
पिछले माह की ही सैलरी नहीं निकाल पाए
नवंबर की शुरुआत में ही नोटबंदी की घोषणा के बाद से ज्यादातर लोग अभी तक पिछले महीने की ही सैलरी नहीं निकाल पाए हैं। ऐसे में दिसंबर की सैलरी आने के बाद परेशानी और बढ़ने वाली है। पिछले महीने की उधारी को चुकाने के लिए आम दिनों से कहीं ज्यादा कैश की जरूरत पड़ने वाली है और एटीएम से लेकर बैंक में कैश मिलना अभी भी किस्मत और टाइमिंग पर ही निर्भर है। लोगों को इस बात की भी शिकायत है कि नोटबंदी को लगभग एक माह होने को है पर सरकार ने अभी तक कोई ऐसी कोई योजना नहीं बनाई है जिससे ये सुनिश्चित हो सके कि हर शख्स को कैश मिले। नोटबंदी के बाद छह बार एटीएम की लाइन में लग चुके एहसान बताते हैं कि उन्हें हर बार निराश होना पड़ा, क्योंकि जब तक वो एटीएम तक पहुंचते कैश खत्म हो जाता है।
राशन खत्म, खरीदने के लिए कैश नहीं
खोड़ा निवासी लक्ष्मी नारायण एक सिक्योरिटी कंपनी में गार्ड हैं। उनकी शिफ्ट रात ग्यारह बजे से सुबह आठ बजे की है। बुधवार को शिफ्ट करने के तुरंत बाद वे कपड़े बदलकर सीधे एटीएम की लाइन में लग गए, क्योंकि राशन खत्म है और उनके पास खरीदने के लिए कैश नहीं है। विशाल मेगामार्ट में डेबिट कार्ड से खरीदारी की जा सकती है, लेकिन सब्जी, दूध, किरायेे और इमरजेंसी के लिए भी अब उनके पास कैश नहीं बचा है।
पत्नी ने कहा, पैसे लेकर ही आना
टेक्सटाइल कंपनी में काम करने वाले रहमान ने बताया कि उन्हें 7 तारीख को सैलरी मिलती है। इससे पहले कि वे नवंबर की सैलरी निकाल पाते एक दिन बाद ही नोटबंदी की घोषणा हो गई। अभी तो पिछले महीने की सैलरी ही नहीं निकाल पाया, इस महीने की क्या निकाल पाऊंगा। कहने को यहां पांच एटीएम हैं, लेकिन सिर्फ दो ही काम करते हैं। तीन दिन से लाइन में लग रहा हूं, लेकिन नंबर आने से पहले ही एटीएम में कैश खत्म हो जाता है। पत्नी ने आज हिदायत देकर भेजा है कि बिना पैसे लिए घर मत आना।