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आखिर क्यों उद्योगों को रास नहीं आर रहा ये बजट, छूट सीमा ने बढ़ाई निराशा

Thu, 02 Feb 2017 12:20 AM IST
योगेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद
योगेश शर्मा/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Thu, 02 Feb 2017 12:20 AM IST
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why budget is not satisfactory for business houses
budget - फोटो : amar ujala

नोटबंदी के बाद बुरे दौर से गुजर रहे उद्योगों को इस बार आम बजट से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली अपनी बजट पोटली में से उद्योगों के लिए कुछ खास नहीं निकाल पाए।

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राहत के नाम पर 50 करोड़ रुपये टर्नओवर वाली कंपनियों को पांच फीसदी टैक्स रिबेट से ही संतोष करना पड़ेगा। बजट में करों से राहत मिलने की आस लगाए बैठे कॉरपोरेट सेक्टर के हाथ इस बार खाली ही रहे।
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इस बार आम बजट पर जीएसटी की आहट का असर साफ दिखाई दिया। मोदी सरकार के तीसरे आम बजट में अप्रत्यक्ष करों से छेड़छाड़ नहीं की गई। हालांकि, कॉरपोरेट सेक्टर उम्मीद जता रहा था कि एक्साइज ड्यूटी में तीन से चार फीसदी कमी लाकर सरकार जीएसटी से पहले औद्योगिक लिहाज से सकारात्मक माहौल बनाएगी, लेकिन बजट में कॉरपोरेट सेक्टर पर ध्यान नहीं दिया गया।

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मैन्युफैक्चरिंग हब ने बताया निराशाजनक

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budget - फोटो : amar ujala
एनसीआर के सबसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब फरीदाबाद के औद्योगिक संगठन एफआईए के अध्यक्ष नवदीप चावला ने इस बार के बजट को निराश करने वाला बताते हुए 10 में से महज 2 नंबर दिए।

उन्होंने बताया कि एमएसएमई के साथ-साथ कॉरपोरेट सेक्टर पर भी ध्यान देने की जरूरत थी। कॉरपोरेट टैक्स में राहत देने की मांग इस सेक्टर की तरफ से काफी समय से की जा रही थी।

लघु उद्योग भारतीय के पूर्व प्रांतीय संयोजक एमपी रूंगटा ने बताया कि 50 करोड़ रुपये टर्नओवर वाली कंपनियों का टैक्स स्लैब 30 से घटाकर 25 फीसदी करने से कोई बड़ी राहत मिलने वाली नहीं है।

वित्तमंत्री को इंडिविजुअल टैक्स स्लैब को कम करने का प्रावधान करना चाहिए था। इस बजट में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और कॉरपोरेट सेक्टर को नजरअंदाज किया गया है। मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन फरीदाबाद के पूर्व अध्यक्ष नरेश वर्मा ने बताया कि पांच फीसदी की टैक्स रिबेट का ज्यादा फायदा 2 से 10 करोड़ रुपये टर्नओवर वाले सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को नहीं मिलने वाला, फरीदाबाद, गुड़गांव, नोएडा और गाजियाबाद में ऐसे उद्योगों की संख्या 50 हजार से ज्यादा है। सूक्ष्म व लघु उद्योगों को लोन पर 13 फीसदी ब्याज को घटाकर हाउसिंग लोन की तर्ज पर 9 से 9.5 किया जाना चाहिए था।
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