ये हैं 'आप' की बैठक में लात-घूंसे खाने वाले रमजान
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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय परिषद की बैठक में केजरीवाल समर्थकों के कथित लात-घूंसे का शिकार बने रमजान चौधरी मेवात के हैं। उनकी पिटाई से हरियाणा के इस जिले में खलबली है।
घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग पहले कापसहेड़ा और उसके बाद राम नोहर लोहिया अस्पताल पहुंच गए। उनका कहना है कि योगेंद्र यादव ने उन्हें दिल्ली आने से नहीं रोका होता तो नजारा कुछ और होता।
हरियाणा के पिछड़े जिलों में एक मेवात के तावड़ू के देवका गांव के मूल निवासी रमजान चौधरी का कार्य क्षेत्र नूंह है। पेशे से वकील रमजान एक स्कूल के संचालक भी हैं।
वह सामाजिक गतिविधियों में काफी सक्रिय रहते हैं। नूंह के नल्हड़ स्थिति हसन खां मेवात मेडिकल कॉलेज पहले सोहना में बनना था।
चुनाव लड़ चुके हैं रमजान
रमजान के नेतृत्व में 40 दिनों तक धरना-प्रदर्शन के बाद तत्तकालीन सरकार को निर्णय बदलना पड़ा था और उसके बाद सोहना की जगह नल्हड़ में कॉलेज की स्थापना की गई।
मेवात को जिला बनाने और जमीन अधिग्रहण के मद्दे को लेकर भी सक्रिय रहे हैं। नूंह के करीब बसाए जा रहे आईएमटी की जमीन के मुआवजे को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा है।
रमजाना उन किसानों के आंदोलन में भी साथ रहे हैं। इस बार उन्होंने आजाद उम्मीदवार की हैसियत से सोहना-तावड़ू विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ा।
योगेंद्र यादव का करीबी हैं रमजान
रमजान चौधरी को अन्ना हजारे और योगेंद्र यादव का करीबी माना जाता है। उनकी पहल पर एक बार अन्ना मेवात आ चुके हैं। जबकि योगेंद्र यादव की मेवात की सारी गतिविधियां उनकी देख-रेख में होती रही हैं।
वह आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में हैं और पार्टी के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य भी हैं। रमजान मेवात के विकास को लेकर संघर्ष करने वाले संगठन मेवात विकास सभा के दो बार प्रधान भी रहे।
ताजी घटना को लेकर उनके एक समर्थक जुबैर का कहना है कि योगेंद्र यादव ने उन्हें यहां आने से रोक रखा था। अन्यथा आज का नजारा कुछ और होता।
घटना पर प्रतिक्रिया
बैठक में मौजूद नहीं था। घटना की पूरी जानकारी लेने के बाद कुछ कहना मुनासिब होगा। जानकारी लेने की कोशिश की जा रही है।- नूरूद्दीन नूर, मेवात के आप नेता व अधिवक्ता
ताजा विवाद को लेकर मुझे कुछ नहीं कहना। यह जरूर है कि आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर संगठन में व्याप्त लोकतंत्र का परिचय दिया है। अन्यथा हर पार्टी में किसी को निकालने का अधिकार उसके मुखिया को होता है। पहली पार्टी है जिसने बैठक बुलाई और वोटिंग के आधार पर फैसला लिया।- अभय जैन, आप नेता गुड़गांव
यदि हिंसा हुई है तो उसका समर्थन नहीं करूंगा। लेकिन किसी के बारे में फैसला लेने के लिए बैठक बुलाकर, वोटिंग कराना-आम आदमी पार्टी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सबूत दिया है।-कुलदीप जांघू, मारुति उद्योग कामगार यूनियन के महासचिव व आप नेता