मामला दर्ज होते ही भागा करोड़पति चौकीदार
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नोएडा में प्लॉट और फ्लैट के नाम पर लोगों से करीब तीन करोड़ रुपये ठगने वाले प्राधिकरण के चौकीदार पर शिकंजा कसते ही वह फरार हो गया है। रिपोर्ट दर्ज होते ही पुलिस जब उसके घर पहुंची तो पता चला कि वह गायब है। उसकी घेराबंदी के लिए पुलिस ने उसकी जानपहचान वाले लोगों से भी संपर्क किया है।
मालूम हो कि नोएडा प्राधिकरण के चौकीदार नितिन राठी ने अपने सगे संबंधी और परिचितों को लालच देकर प्लाट और फ्लैट के फर्जी आवंटन पत्र थमा दिए थे। जिन लोगों ने पैसे दिए हैं, वह इसलिए मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि उनसे यह बात भी पूछी जा सकती है कि इतना कैश कहां से आया।
शनिवार को जैसे ही नितिन को रिपोर्ट दर्ज कराने की भनक लगी वह फरार हो गया। सेक्टर-12 आवास पर पुलिस पहुंची लेकिन वहां कोई नहीं मिला। परिवार के सदस्यों ने भी कोई बात नहीं बताई।
नितिन निलंबित, धोखाधड़ी का मामला दर्ज
फेसबुक से हटाए फोटो
राठी फेसबुक पर अपने बारे में पूरी जानकारी अपने मित्रों को देता रहता था। जैसे ही उसकी ठगी का मामला उजागर हुआ और फेसबुक ने उसकी असलियत खोल दी तो उसने तुरंत ही फोटो समेत अन्य जानकारी वहां से हटा दी। फेसबुक से ही पता चला था कि वह महंगी गाड़ियों का शौकीन है और झूठा रुतबा दिखाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार लिखकर लाल-नीली बत्ती भी उन पर लगाता था।
चौकीदार नितिन राठी के खिलाफ धोखाधड़ी और प्राधिकरण के नाम का दुरुपयोग करने का मामला दर्ज कराया गया है। प्राधिकरण के पीडी शर्मा की ओर से शनिवार को थाना सेक्टर-20 में आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी अखिलेश सिंह ने नितिन को पद से निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दे दिए है।
जानकारी के अनुसार नोएडा प्राधिकरण में चौकीदार के पद पर कार्यरत नितिन राठी ने करीब सत्तर लोगों से धोखाधड़ी की है। पिछले दिनों कुछ लोगों ने गौतमबुद्ध नगर के एसएसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह के पास धोखाधड़ी की शिकायत लेकर पहुंचे थे। प्राधिकरण में आवासीय भूखंड विभाग में तैनात पीडी शर्मा ने बताया कि शनिवार को प्राधिकरण की ओर से थाना सेक्टर-20 में नितिन राठी के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दी गई है।
प्राधिकरण के पास करीब दस लोगों ने धोखाधड़ी की शिकायत दी है। पुलिस को दी गई शिकायत में इन दस पीड़ितों की शिकायतें भी लगाई गई हैं। दूसरी तरफ, प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी अखिलेश सिंह ने बताया कि पिछले काफी समय से अपने दफ्तर में रिपोर्ट न करने और धोखाधड़ी के मामले को संज्ञान में लेते हुए प्राधिकरण की ओर से राठी को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा विभागीय कार्रवाई के भी निर्देश दे दिए गए हैं।