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हम इकबाल को नहीं पढ़ाएंगे : डीयू कुलपति

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 14 Aug 2025 07:39 PM IST
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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर योगेश सिंह ने कहा- इकबाल ने जो लिखा वो खुद नहीं माना
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। इकबाल ने सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा लिखा लेकिन खुद इसे नहीं माना। वर्ष 1910 में उन्होंने तराना-ए-मिल्ली लिखा जिसमें कहा कि मुस्लिम हैं हम, वतन है सारा जहां हमारा। इकबाल की भारत विरोधी सोच पर डीयू ने तय किया कि हम इकबाल को नहीं पढ़ाएंगे। डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने यह बातें स्वतंत्रता एवं विभाजन अध्ययन केंद्र की ओर से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में कही।
डीयू के स्वतंत्रता एवं विभाजन अध्ययन केंद्र की ओर से 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया गया। इस अवसर पर विभाजन की कहानियां आघात से गवाही तक विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित हुए कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि विभाजन में लाखों लोग मारे गए लेकिन आज तक कोई सूची नहीं तैयार हुई। इतनी बड़ी घटना के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। जो हुआ क्यों हुआ और आगे नहीं होगा क्या इसकी कोई गारंटी है, ऐसी घटना ना हो इसकी कोई तैयारी है, भारत के लोगों को इस पर विचार करने की जरूरत है।
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कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर पूर्व सांसद एवं राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष सरदार तरलोचन सिंह ने कहा कि पंजाब के सिखों ने चाहा था कि हम पाकिस्तान के साथ नहीं जाएंगे, अगर सारा पंजाब पाकिस्तान के साथ जाता तो पाकिस्तान का बॉर्डर गुरुग्राम होता। आज किसी को एक झोंपड़ी से निकाला आसान नहीं है जबकि उस दौर में लोगों ने भारत के लिए अपने गांव और घरों को छोड़ा। कार्यक्रम में स्वतंत्रता एवं विभाजन अध्ययन केंद्र (सीआईपीएस) के निदेशक प्रो. रविंदर कुमार, व केंद्र के चेयरपर्सन प्रो रवि प्रकाश टेकचंदानी ने भी अपने विचार व्यक्त। कार्यक्रम के दौरान सीआईपीएस की वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया। उद्घाटन सत्र के दौरान डीन ऑफ कॉलेजेज़ प्रो बलराम पाणी द्वारा अनेकों विभाजन पीडि़तों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी, एसओएल की निदेशक प्रो. पायल मागो, रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता भी उपस्थित रहे।
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