हरियाणा के इस गांव में लातूर जैसे हालात, 25 सालों से नहीं है यहां पीने का पानी
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मेवात जिले के पापड़ा गांव का हाल महाराष्ट्र के लातूर जिले जैसा हो गया है। यहां के लोग पीने की पानी की समस्या से पिछले करीब 25 सालों से जूझ रहे हैं। गांव में खारा पानी है, इसलिए यहां की महिलाओं को करीब ढाई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है।
पानी की किल्लत को देखते हुए रविवार को गांव की सैकड़ों महिलाओं ने सरकार के खिलाफ मटका फोड़कर विरोध प्रदर्शन किया। पहले गांव में कुएं हुआ करते थे, जिनसे लोग अपना काम चलाते थे। अब वॉटर लेवल नीचे चले जाने के कारण गांव के सभी कुएं सूख चुके हैं।
जिस कुएं से महिलाएं अब पानी भरकर लाती हैं वह गांव से करीब ढाई किलोमीटर दूर है। रास्ता उबड़ खाबड़ और जंगल में कुआं होने की वजह से महिलाओं की सुरक्षा हर समय खतरे में रहती है। जिस कुएं से पानी लाते हैं, वह भी कुछ समय के बाद गंदा हो जाता है। जो पहले पानी भर लेता है वह ही साफ पानी पी सकता है।
दो दिन बाद माह रमजान शुरू होने वाले हैं। ऐसे में महिलाओं का कहना है कि पानी के चक्कर में वह रोजा रखने से भी वंचित रह जाएगी। उन्होंने मटका फोड़ प्रदर्शन कर सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जल्द ही उनके गांव को पीने के पानी उपलब्ध नहीं कराया गया तो वह रोड जाम करने पर मजबूर होंगी।
जब से ब्याह कर आईं तब से पानी की किल्लत है
इसलामी, सुनीता, शांति का कहना है कि जब से वह गांव पापड़ा में ब्याह कर आईं हैं, तभी से गांव में पानी की किल्लत बनी हुई है। जिस कुएं से वह पानी लाती हैं, वहां दिन के समय में भी उनको डर लगता है, इसलिए वह ग्रुप बनाकर जाती हैं। शाम के बाद तो वह किसी भी कीमत पर नहीं जा सकती हैं।
गांव के सरपंच मुकरब्ब हुसैन और आबिद खान का कहना है कि उनके गांव में खारा पानी है। करीब 30 साल पहले जनस्वास्थ्य विभाग ने उनके गांव को वाटर सप्लाई से जोड़ा था लेकिन पानी का स्तर नीचे चले जाने की वजह से बोरिंग खराब हो गए। वह कई बार इस संबंध में अधिकारियों से मिले लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया।
वहीं जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता जनक राज ने फोन पर बताया कि गांव में रेनीवेल की पाइप लाइन डालने के लिए सोमवार को टेंडर खोले जाएंगे। जल्द ही गांव के लोगों को पीने का साफ पानी मुहैया कराया जाएगा। काम चल रहा है। एक सप्ताह के अंदर पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।