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बच्चियों से रेप पर फांसी का अध्यादेश लाने से पहले क्या केंद्र ने किया कोई रिसर्च : हाईकोर्ट

Tue, 24 Apr 2018 11:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 24 Apr 2018 11:38 AM IST
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Was there scientific assessment that death penalty is deterrent to rape: HC to Centre

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 12 साल से कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार के लिए मौत की सजा का प्रावधान संबंधी केंद्र सरकार के अध्यादेश पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि अध्यादेश लाने से पहले क्या कोई रिसर्च या वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया है या नहीं।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी.हरि शंकर की खंडपीठ ने केंद्र सरकार से पूछा कि अध्यादेश लाने से पहले आपने यह सोचा है कि पीड़िताओं पर इस कानून का क्या असर पड़ेगा।
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अदालत ने चिंता जताते हुए सरकार से पूछा कि कितने अपराधी पीड़िताओं को जीवित रहने की इजाजत देंगे कि बलात्कार और हत्या का एक ही दंड है। क्या आपने रेप के आरोप में मृत्युदंड का प्रावधान करने से पहले शोध या कोई वैज्ञानिक मूल्यांकन किया है।
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खंडपीठ वर्ष 2013 में आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम को चुनौती देने संबंधी पहले से दायर लंबित जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में रेप के आरोपी को अदालत के विवेकाधिकार के तहत न्यूनतम सजा के अधिकार को खत्म कर आरोपी को न्यूनतम सात वर्ष कैद के प्रावधान करने के निर्णय को चुनौती दी गई थी।

Was there scientific assessment that death penalty is deterrent to rape: HC to Centre
delhi high court

दो दिन पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश 2018 को मंजूरी दे दी थी, जिसमें 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के बलात्कार के लिए कम से कम 20 वर्षों से लेकर जीवनकाल या मृत्यु तक कड़े दंड का प्रावधान किया गया है।

खंडपीठ ने कहा कि सरकार रेप के मूल कारणों को नहीं देख रही है या लोगों को शिक्षित नहीं कर रही। अदालत ने सवाल किया कि क्या अध्यादेश लाने से पूर्व किसी पीड़ित से पूछा गया कि वह क्या चाहता है।

दरअसल याचिका पर सुनवाई के दौरान 16 अप्रैल 2012 को वसंत विहार में 23 वर्षीय युवती से गैंगरेप के बाद बलात्कार कानून में किए गए संशोधन और अब नए अध्यादेश के बारे में खंडपीठ को सूचित किया गया।

याची ने कहा कि यौन अपराध में कानून में संशोधन कर कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है। याची ने कहा कि इस प्रकार के कड़े कानून से निर्दोष को फर्जी मामलों में फंसाने की संभावना बनी रहती है। अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। 

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