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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Waiting for free medicines at government hospitals: Disappointment even after hours of queuing

Delhi NCR News: सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा का इंतजार, घंटों कतार के बाद भी मायूसी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2026 09:06 PM IST
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ग्राउंड रिपोर्ट : काउंटर खुलने से दो-तीन घंटे पहले पहुंच रहे मरीज, पर्ची की कई दवाएं नहीं मिलतीं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों की बढ़ रही परेशानी
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सिमरन
नई दिल्ली। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा लेने के लिए मरीजों और तीमारदारों को रोजाना लंबी कतार से गुजरना पड़ रहा है। कई मरीज दवा काउंटर खुलने से दो-तीन घंटे पहले ही अस्पताल पहुंचकर लाइन में लग जाते हैं। इसके बावजूद काउंटर तक पहुंचने पर पर्ची में लिखी सभी दवाएं नहीं मिलतीं। कुछ दवाओं के लिए मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर का रुख करना पड़ता है। अस्पतालों में दवा वितरण व्यवस्था का जायजा लेने पर मरीजों और तीमारदारों ने लंबा इंतजार और दवाओं की अनुपलब्धता को बड़ी परेशानी बताया।
सरदार वल्लभ भाई पटेल अस्पताल में दवा लेने के लिए करीब एक घंटे से लाइन में लगे गौरव की जब बारी आई तो उन्हें पर्ची की कुछ दवाएं ही मिल सकीं। बाकी दवाएं उपलब्ध नहीं थीं, इसलिए उन्हें बाहर से खरीदना पड़ा। गौरव की यह परेशानी अकेली नहीं है। दवा काउंटर पर मौजूद कई मरीजों ने बताया कि डॉक्टर की पर्ची मिलने के बाद दवा लेने के लिए उन्हें दूसरी कतार में काफी देर खड़ा रहना पड़ता है। सामान्य दिनों में भी दवा मिलने में करीब एक घंटे तक का समय लग जाता है।
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सफदरजंग में पर्ची की सभी दवाएं नहीं मिलीं
सफदरजंग अस्पताल के दवा काउंटर पर मोहम्मद हुसैन को भी इसी स्थिति का सामना करना पड़ा। लंबी कतार में इंतजार के बाद जब उनकी बारी आई तो पर्ची पर लिखी सभी दवाएं उपलब्ध नहीं थीं। कुछ दवाएं नहीं मिलीं, जबकि बाकी दवाएं बाहर से खरीदने के लिए कहा गया। हुसैन को मजबूरन अस्पताल से बाहर मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ीं। मरीजों का कहना है कि घंटों कतार में खड़े रहने के बाद काउंटर पर अक्सर ‘दवा उपलब्ध नहीं है’, ‘खत्म हो गई’ या ‘बाहर से खरीद लें’ जैसे जवाब मिलते हैं। इससे मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का खर्च बढ़ जाता है।
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आरएमएल में भी ‘नॉट अवेलेबल’ की शिकायत
आरएमएल अस्पताल में कतार में खड़े रहीम ने बताया कि डॉक्टर ने कई दवाएं लिखी थीं। काउंटर से कुछ दवाएं मिल गईं, लेकिन बाकी के लिए उन्हें बाहर जाना पड़ा। अन्य मरीजों की पर्चियों पर भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली। किसी को लिखी दो दवाओं में से सिर्फ एक मिली, जबकि कुछ पर्चियों पर एक के बाद एक दवाओं के सामने ‘नॉट अवेलेबल’ लिखा था। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में निर्धारित सूची के अनुसार मरीजों को मुफ्त दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। अस्पतालों की वेबसाइट पर भी इसका उल्लेख है। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल सभी मरीजों को मुफ्त दवा उपलब्ध कराने की जानकारी देता है। लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल दावा करता है कि डॉक्टर की लिखी गई दवाएं दिल्ली सरकार की ड्रग फॉर्मुलरी के तहत मुफ्त दी जाती हैं।
बुजुर्गों के लिए एक घंटे का इंतजार भी चुनौती
लंबी कतार का असर सबसे ज्यादा बुजुर्ग, दिव्यांग और कमजोर मरीजों पर पड़ता है। कोई छड़ी के सहारे खड़ा दिखाई देता है तो किसी बुजुर्ग की जगह उसका बेटा या बेटी लाइन में लगा होता है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए भी लंबे समय तक इंतजार करना मुश्किल होता है। कुछ अस्पतालों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग दवा काउंटर हैं। लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ऐसी सुविधा की जानकारी देता है। डॉ. हेडगेवार आरोग्य संस्थान में महिला, पुरुष, वरिष्ठ नागरिक और दिव्यांग मरीजों के लिए अलग खिड़कियां होने की जानकारी दी गई है। लेकिन जहां ऐसी व्यवस्था नहीं है, वहां बुजुर्गों को सामान्य कतार में ही अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।


कैग रिपोर्ट में भी दवाओं की उपलब्धता पर सवाल
दवाओं की कमी और वितरण में देरी की शिकायतें केवल मरीजों के अनुभव तक सीमित नहीं हैं। दिल्ली की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं पर कैग की प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट में भी दवाओं की अनुपलब्धता, आपूर्ति में देरी और स्टाफ की कमी जैसी कमियां दर्ज की गई थीं। ऑडिट अवधि 2016-17 से 2021-22 तक रही। रिपोर्ट पर आधारित पूर्व की रिपोर्टिंग में सामने आया था कि इस दौरान दिल्ली के अस्पतालों को आवश्यक दवाओं का एक बड़ा हिस्सा खुद खरीदना पड़ा, क्योंकि केंद्रीय खरीद एजेंसी समय पर आपूर्ति सुनिश्चित नहीं कर पा रही थी।
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