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'उबर केस में बलात्कार पीड़िता ने बताया गलत नाम'

Sun, 27 Sep 2015 08:52 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 27 Sep 2015 08:52 AM IST
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Victim told wrong name due to conspiracy in uber rape case.

उबर कैब रेप केस मामले में बचाव पक्ष ने अंतिम जिरह करते हुए पुलिस के केस व पीड़िता के बयान में कई विरोधाभास होने की दलील दी।

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बचाव पक्ष ने कहा कि पीड़िता ने कई साक्ष्य आरोपी के खिलाफ प्लांट किए और पुलिस ने पीड़िता का मोबाइल कई दिनों बाद सीज किया। आरोपी का मोबाइल उसे गिरफ्तार करने वाले एसआई ने नहीं बल्कि दूसरे जांच अधिकारी ने जब्त किया था।
 
तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कावेरी बावेजा के समक्ष अंतिम जिरह को दूसरे दिन आगे बढ़ाते हुए बचाव पक्ष के अधिवक्ता धर्मेंद्र मिश्रा ने पीड़िता पर झूठा बयान देने का आरोप पीड़िता पर लगाया।

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अधिवक्ता मिश्रा ने कहा अभियोजन ने आरोपों को साबित करने के लिए झूठे साक्ष्य पेश किए और साक्ष्यों को गढ़ा। बचाव पक्ष ने अपनी बहस में कहा कि पीड़िता ने अपने बयान में पीसीआर के बाद 5-10 मिनट में पुलिस के आने की बात कही है।

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'ट्रू कॉलर के जरिये पता चला नाम'

Victim told wrong name due to conspiracy in uber rape case.
जबकि पुलिस रिकार्ड के मुताबिक पीसीआर आधे घंटे तक भी मौके पर नहीं पहुंच सकी थी क्योंकि उन्हें मौका नहीं मिला था, ऐसा पुलिस ने अपने बयान में माना है।

पीड़िता पर झूठा बयान देने का आरोप लगाते हुए अधिवक्ता मिश्रा ने कहा कि आरोपी का असली नाम पता चलने पर भी पीड़िता ने पीसीआर कॉल या एफआईआर में भी इसका जिक्र नहीं किया बल्कि किसी अन्य शख्स का नाम पुलिस को बताया।

जबकि मोबाइल एप ट्रू कॉलर के जरिये उसे शिव कुमार यादव का नाम पता चल चुका था। बचाव पक्ष ने कहा कि पीड़िता के लिए कैब बुक करने वाले उसके दोस्त के पास कैब और उसके चालक का पूरा विवरण था।

'पुलिस ने कई दिनों बाद जब्त किया फोन'

Victim told wrong name due to conspiracy in uber rape case.

इसके बाद भी पुलिस को गलत नाम बताया गया। यह सब सोची समझी साजिश के तहत किया गया। पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसका मोबाइल जब्त कर लिया था।

लेकिन पीड़िता का मोबाइल घटना के कई दिनों बाद जब्त किया गया और इस मोबाइल का सिम पुलिस ने जब्त नहीं किया। विशेष अभियोजन अधिकारी अतुल श्रीवास्तव ने अपनी जिरह में कहा था कि कोर्ट पीड़िता के बयान को भरोसेमंद मानते हुए भी आरोपी को सजा सुना सकती है।

अभियोजन के मुताबिक दुष्कर्म का यह मामला पांच दिसंबर 2014 का है। गुड़गांव स्थित एमएनसी में वित्तीय विश्लेषक पीड़िता ने वसंत विहार से अपने घर इंद्रलोक लौटने के लिए उबर कैब किराये पर ली थी।

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