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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Vasant Panchami celebrated amidst drizzle, Qawwali and fragrance of flowers

Delhi NCR News: बारशि की फुहार, कव्वाली और फूलों की खुशबू के बीच मनाई वसंत पंचमी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 23 Jan 2026 08:00 PM IST
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-सजा निजामुद्दीन दरगाह का आंगन, सौहार्द के साथ निभाई अमीर खुसरो की परंपरा, सभी समुदाय के लोग रहे शामिल
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संवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली। हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह में शुक्रवार को बसंत पंचमी का खास आयोजन हुआ। पीले फूलों, पीली चादरों और सूफी सलाम के साथ वसंत का स्वागत किया गया। सुबह से ही दरगाह परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। सुबह के समय हुई हल्की बारिश ने इस आयोजन की रौनक को और बढ़ा दिया। बारिश की फुहारों के बीच गूंजती कव्वालियां और फूलों की खुशबू ने पूरे माहौल को यादगार बना दिया। वसंत पंचमी के मौके पर दरगाह को खास तौर पर सजाया गया। चादरपोशी के लिए पीले रंग की चादर चढ़ाई गईं और दरगाह परिसर को गेंदे और सरसों के फूलों से सजाया गया।
देश के अलग-अलग हिस्सों से आए जायरीन और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में इस आयोजन में शामिल हुए। वसंत पंचमी के दिन हुई हल्की बारिश को दरगाह में मौजूद लोगों ने खास माना। सूफी मान्यताओं में बारिश को ईश्वर की रहमत यानी कृपा समझा जाता है। ऐसे में जैसे ही बारिश शुरू हुई, कई लोगों ने इसे शुभ संकेत बताया। बारिश के बीच कव्वालियों की गूंज और पीले फूलों से सजा माहौल लोगों के लिए भावुक पल बन गया।
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हजरत निजामुद्दीन दरगाह में दिखी गंगा-जमुनी तहजीब
हजरत निजामुद्दीन दरगाह में मनाई जाने वाली बसंत पंचमी दिल्ली की गंगा-जमुनी तहजीब की पहचान मानी जाती है। यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और अन्य समुदायों के लोग एक साथ इस पर्व में शामिल होते हैं। पीले कपड़े पहने बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग दरगाह परिसर में नजर आए। दरगाह कमेटी की ओर से साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया। दरगाह प्रशासन के एक सदस्य ने बताया कि हर साल बसंत पंचमी पर भीड़ ज्यादा होती है, इसलिए पहले से तैयारी की जाती है। चादर चढ़ाने आए मोहम्मद फैज ने बताया कि शुक्रवार यानी जुम्मे के दिन मनाई गई यह वसंत पंचमी सिर्फ एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं रही, बल्कि इस दौर के लिए एक संदेश भी लेकर आई है।
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कव्वालियों में अमीर खुसरो के लिखे कलाम पर झूमें श्रद्धालु
वसंत पंचमी के मौके पर अमीर खुसरो को विशेष रूप से याद किया गया। कव्वालियों में उनके लिखे कलाम पेश किए गए। अमीर खुसरो को हिंदुस्तानी संगीत और भाषा का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है।


700 साल पुरानी परंपरा आज भी जीवंत
हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह में वसंत पंचमी मनाने की परंपरा कोई नई नहीं है। इतिहासकारों के मुताबिक, यह परंपरा करीब 700 साल पुरानी है। इसका संबंध सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया और उनके शिष्य अमीर खुसरो से जुड़ा हुआ है। वसंत पंचमी का आयोजन उसी सूफी सोच को आगे बढ़ाता है, जिसमें हर इंसान का स्वागत समान रूप से किया जाता है।
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