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दो देशों की तनातनी के बीच फंसा उज्बेकिस्तान, पहुंचे सिर्फ चार कलाकार

Sat, 04 Feb 2017 12:17 AM IST
गौरव चौधरी/अमर उजाला, फरीदाबाद
गौरव चौधरी/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Sat, 04 Feb 2017 12:17 AM IST
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Uzbekistan is not participating properly in surajkund fare
surajkund fare - फोटो : अमर उजाला

सरहदों को लेकर तनातनी का असर इस बार हस्तकला के महाकुंभ पर भी दिख रहा है। एक तरफ कूटनीतिक मंच पर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से तल्खी ने पाकिस्तान के कलाकारों को मेले से दूर कर दिया तो दूसरी तरफ यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे विवाद के कारण इस बार उज्बेकिस्तान के कम कलाकार ही अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में आ सके हैं। उज्बेकिस्तान के कलाकार हर साल इस मेले में धूम मचाते थे, लेकिन करंसी का करंट ऐसा लगा कि ज्यादातर उज्बेकी कलाकारों ने मेले से दूरी बनाना मुनासिब समझा।

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दरअसल,  यूक्रेन और रूस के बीच क्रीमिया नामक पर्यटन स्थल की कब्जेदारी को लेकर विवाद चल रहा है। इस विवाद का असर उज्बेकिस्तान की करंसी पर पड़ा है। इस विवाद के चलते वहां की करंसी सोम डॉलर के मुकाबले लगातार गिर रही है। उज्बेकिस्तान से भारत आने के लिए ताशकंद (रूस) एयरपोर्ट का सहारा लेना पड़ता है।
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उज्बेकी कलाकारों की मानें तो पिछले वर्ष 350 डॉलर में उनकी भारत यात्रा पूरी हो गई थी, लेकिन दो देश के बीच फंसी करंसी के चलते इस बार यह खर्च बढ़कर 750 डॉलर हो गया है। ऐसे में इस बार महज 4 उज्बेकी कलाकार ही आए हैं। जबकि पिछले वर्ष 15 से ज्यादा उज्बेकी कलाकार मेले में आए थे।
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मेला प्राधिकरण की लापरवाही
पिछले वर्ष अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में 23 देशों ने हिस्सा लिया था लेकिन तमाम दावों के बावजूद इस वर्ष उम्मीदों के मुताबिक देशों ने हिस्सा नहीं लिया। न इस बार चाइना है और न ही पाकिस्तान।

उज्बेकी कलाकारों की मानें तो इस बार मेला प्राधिकरण ने आमंत्रण बहुत देरी से भेजे, जिसके चलते तैयारियों का समय नहीं मिला। कम से कम दो महीने पहले जानकारी मिल जाती थी तो कलाकारों को लाने का प्रयास किया जा सकता था। 


इस बार सिर्फ चार लोग उज्बेकिस्तान से आ पाए हैं। मेला प्राधिकरण ने देरी से आमंत्रित किया। इसके अलावा यूक्रेन एवं रूस के बीच चल रहे संघर्ष के कारण उज्बेकिस्तान से यहां आना महंगा हो गया है।  -शुहरत हुडेकुलोव, एचओडी-काउंसिल ऑफ फ्रेंडशिप सोसायटी ऑफ उज्बेकिस्तान विद फोरेन कंट्रीज 

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