इंटरनेट आपके बच्चों को बना रहा एक खतरनाक लत का शिकार, नामचीन कंपनियां भी शामिल
- ई सिगरेट से लेकर हुक्का तक के शौकीन बन रहे 18 साल कम के बच्चे
- इंटरनेट के लाइव चैनलों ने बच्चों को बनाया निकोटिन का शिकार
- ई सिगरेट से लेकर हुक्का तक के शौकीन बन रहे 18 साल कम के बच्चे
- शहरी इलाकों में छात्रों पर तेजी से हो रहा है असर
- स्वास्थ्य मंत्रालयों को मिलीं शिकायतों में हुआ है खुलासा
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इंटरनेट का चलन और इसके दुष्प्रभावों को लेकर अक्सर कुछ न कुछ सामने आता रहता है। लेकिन हाल ही में शुरू हुए इंटरनेट चैनलों के दौर से भी देश के युवा गलत राह की ओर बढने लगे हैं। इन चैनलों की वजह से बच्चे खासतौर पर निकोटिन के आदी हो रहे हैं।
चैनलों पर तरह तरह की फिल्में, गेम्स और प्रोग्राम्स को देख बच्चे न सिर्फ उनका अनुसरण कर रहे हैं, बल्कि घर से छिपकर ये ई सिगरेट से लेकर हुक्का तक का सेवन कर रहे हैं। यह खुलासा स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुछ शिकायतों का हवाला देते हुए किया है।
मंत्रालय के मुताबिक, पिछले कुछ समय से ई लाइव चैनलों को लेकर शिकायतें मिली हैं। जिनसे साफ है कि चैनल चलाने वाली नामचीन कंपनियां नियमों का खुलकर उल्लंघन कर रही हैं। यही वजह है कि मंत्रालय की ओर से अब टेलीकॉम रेगुलेटर प्राइस (ट्राई) को पत्र लिख तत्काल सख्त एक्शन लेने को कहा गया है।
नहीं देते हैं चेतावनी, उड़ते हैं छल्ले: मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंटरनेट पर लाइव चैनलों का प्रसारण होता है। बच्चों से लेकर 25 साल तक के युवा इन चैनलों के सबसे ज्यादा फॉलोअर्स हैं। जो भी प्रोग्राम लाइव आता है, उनमें कहीं भी तंबाकू सेवन निषेध की चेतावनी नहीं दी जा रही है। साथ ही प्रोग्राम के दौरान खुलकर सिगरेट और हुक्का के उड़ते छल्ले दिखाए जाते हैं।
क्या कहता है नियम
मंत्रालय के अनुसार, देश में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम लागू है। इसके तहत टेलीविजन हो या फिर इंटरनेट चैनल, किसी भी कार्यक्रम के प्रसारण की शुरूआत और मध्य में 20-20 मिनट की चेतावनी चलाना जरूरी है।
साथ ही कार्यक्रम के दौरान कोई इस प्रकार का दृश्य आता है तो उसमें नीचे तंबाकू उत्पाद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक जैसी पंच लाइन आना आवश्यक है, जिसका पालन ठीक से नहीं हो पा रहा है।
पिछले कुछ समय से इंटरनेट लाइव चैनलों को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। हमनें जब इनकी जांच की तो शिकायत सही पाई गई। इसीलिए ट्राई को पत्र लिख तत्काल एक्शन लेने की बात कही गई है। युवाओं के दृष्टिकोण से यह गंभीर विषय है। किसी कोई भी इससे खिलवाड़ करने का अधिकार प्राप्त नहीं है। -डॉ. जगदीश प्रसाद, डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज