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यादव सिंह को CBI से बचाने को SC गई सरकार

Thu, 06 Aug 2015 12:55 PM IST
Updated Thu, 06 Aug 2015 12:55 PM IST
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UP government in Supreme Court to protect Yadav Singh

नोएडा अथॉरिटी केपूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह पर कसते शिकंजे के बीच इस मामले की जांच सीबीआई से कराने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

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सरकार की दलील है कि आदेश देने से पहले उच्च न्यायालय ने उनकी सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया। हालांकि सीबीआई ने अपनी जांच में और तेजी लाते हुए बुधवार को करीब नौ घंटे तक यादव सिंह के नोएडा सेक्टर-51 स्थिति बंगले की छानबीन की।
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सुबह करीब 11 बजे पहुंची टीम रात को 8 बजे वहां से रवाना हुई। इस बंगले पर सील लगी हुई थी, जिसे यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता, बेटी गरिमा, बहू और पोते के सामने खोला गया।
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एजेंसी ने छानबीन के बारे में कोई भी जानकारी देने से इंकार कर दिया। हालांकि बताया जाता है कि उन्होंने घर में रखे सामान का वैल्यूएशन किया और कुछ दस्तावेज लेकर चली गई।

हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने के लिए दायर की याचिका

UP government in Supreme Court to protect Yadav Singh

इस बीच बुधवार को नोएडा अथॉरिटी ने भी यादव सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार व सरकारी दस्तावेज गायब करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी है। उसके कई ठिकानों पर हुई छापेमारी में भारी मात्रा में जेवर और नगदी के अलावा प्राधिकरण के गोपनीय दस्तावेज भी मिले थे।


राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के सीबीआई जांच वाले आदेश पर रोक लगाने की सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाते हुए कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राज्य से भी सहमति जरूरी है।

केंद्र केदो पत्रों के आधार पर उच्च न्यायालय ने आदेश पारित किया। पहले से ही इस मामले की न्यायिक जांच हो रही थी, बावजूद इसके मामला सीबीआई को सौंप दिया गया।

हाइकोर्ट के आदेश पर हो रही है जांच

UP government in Supreme Court to protect Yadav Singh

मालूम हो कि गत 16 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने यादव सिंह के खिलाफ सीबीआई जांच के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस दलील को नकार दिया था कि पहले ही मामले की न्यायिक जांच चल रही है, ऐसे में सीबीआई जांच की जरूरत क्या है।


पिछले साल यादव सिंह के कई ठिकानों पर आयकर विभाग के छापे में नकदी, जेवर समेत अकूत संपत्ति मिली थी। बाद में उसेे निलंबित करते हुए मामले की जांच के लिए जस्टिस एएन वर्मा कमीशन का गठन किया।

इसी दौरान नूतन ठाकुर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सीबीआई जांच की गुहार की। याचिका में कहा गया था कि इसका दायरा बहुत बड़ा है, इसलिए इसकी जांच सीबीआई से कराई जाए,जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया था।

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