जानिए अनावश्यक सीजेरियन ऑपरेशन के बारे में हाईकोर्ट ने क्या कहा
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जन्म के समय मां का अनावश्यक सीजेरियन (सी-सेक्शन) करना मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक है। यह उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है। अस्पताल में ऐसे मामलों पर रोक लगाने की मांग से जुड़ी याचिका पर संज्ञान लेते हुए पीठ ने दिल्ली सरकार और एमसीआई से जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट की मुख्य कार्यकारी न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरी शंकर की पीठ ने अनावश्यक सीजेरियन से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की।
सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्ली सरकार और स्वास्थ्य निदेशालय बताएं कि ऐसे मामलों पर रोक लगाने के लिए बनाए गए पैनल के विचार विमर्श के बाद क्या उपाय निकाले गए हैं।
अगली सुनवाई 9 जुलाई को
डीजीएचएस द्वारा जो भी उपाय निकाले गए हैं, उनकी रिपोर्ट अगली सुनवाई 9 जुलाई को पेश की जाए। वहीं पीठ ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को ऐसे मामलों का परीक्षण करने का निर्देश दिया है।
याचिका एक गैर सरकारी संस्था द्वारा दायर की गई है। जिसमें निजी अस्पतालों में अनावश्यक सीजेरियन के मामलों में इजाफा होने के आरोप लगाए गए हैं। याचिका में सी-सेक्शन के दिशानिर्देशों की जानकारी मांगी गई है।
याचिका में बताया गया है कि निजी अस्पतालों में सीजेरियन के मामले 65.54 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह आंकड़ा 20.65 प्रतिशत है।