यूनिटेक को एस्क्रो खाता खोलने का निर्देश, जमा करवानी होगी निवेशकों से ली गई रकम
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हाईकोर्ट ने गुड़गांव स्थित बिल्डर यूनिटेक को एस्क्रो खाता खोलने का निर्देश दिया है। इस खाते में निवेशकों से ली गई राशि जमा करवानी होगी। अदालत ने बिल्डर को सभी प्रोजेक्ट के लिए अलग से खाते खोलने का निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने निवेशकों से रुपये लेने के बावजूद वर्षों से घर नहीं देने के मामले में मुकदमों का सामना कर रहे बिल्डर यूनिटेक को यह निर्देश दिया है। हाईकोर्ट के आदेशानुसार बिल्डर को अब हर प्रोजेक्ट का अलग खाता खोलना होगा और निवेशकों से ली गई राशि का कहीं अन्य इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
इतना ही नहीं अदालत ने खातों पर निगरानी के लिए कोर्ट कमिश्नर भी नियुक्त किया है। अदालत ने बिल्डर को निर्देश दिया कि लोगों से बातचीत के आधार पर इन प्रोजेक्ट को पूरा करने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए। अगर निवेशकों का बहुमत प्रोजेक्ट को पूरा करने में है तो उनसे प्राप्त 90 प्रतिशत राशि का इस्तेमाल प्रोजेक्ट को पूरा करने में खर्च किया जाए।
हर प्रोजेक्ट के लिए अलग-अलग खोलना होगा खाता
लोगों से प्राप्त की गई रकम इस खाते में रखी जाए। बाकी बची 10 प्रतिशत राशि उन निवेशकों को वापस लौटा दी जाए जो पीछे हटना चाहते हैं। अदालत ने कहा कि यदि अब भी प्रोजेक्ट पूरा होने में दो वर्ष की देरी होती है तो यूनिटेक को दोगुना जुर्माना देना होगा।
दो साल से कम देरी होने की स्थिति में भी कंपनी को डेढ़ गुना जुर्माना देना होगा। अदालत के समक्ष कंपनी की तरफ से दलील दी गई थी कि इस तरह के फैसले से पहले से ही देरी से चल रहे अन्य प्रोजेक्ट में भी देरी होगी।
हालांकि बिल्डर के पास रुपयों की तंगी होने के कारण कंपनी की पूंजी बेचकर निवेशकों को रुपया चुकाने का आदेश देने से भी अदालत ने इनकार कर दिया।
पीठ ने कहा कि कंपनी की पूंजी बेचने से भी मामले में किसी भी पक्ष को फायदा नहीं होने वाला है। सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में दिए फैसले में भी यूनिटेक को अपनी विस्तास परियोजना मामले में 15 करोड़ जमा करवाने का निर्देश दिया था।