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केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने दी मंजूरी: सड़क, रेलट्रैक और पहाड़ाें को दरकने से बचाएगा जीओ-सिंथेटिक्स

Tue, 26 Oct 2021 11:27 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Tue, 26 Oct 2021 11:27 PM IST
सार

योजना के तहत एक बैच में कम से कम 75 और अधिक से अधिक 100 उम्मीदवार होंगे। पायलट चरण के दौरान इन तीनों संस्थानों में से दो-दो बैच निर्धारित किये जाएंगे।

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Union textile ministry gives approval iit and iisc bengaluru experts to give training
आईआईटी, रुड़की - फोटो : source

विस्तार

सड़क, रेलट्रैक और पहाड़ों को दरकने से बचाने के लिए अब केंद्र सरकार एक नई तकनीक पर काम कर रही है। इन स्थानों पर यहां एक ऐसे सिंथेटिक्स (जीओ-सिंथेटिक्स यानी बेहद बारीक कपड़ा ) कपड़े का प्रयोग किया जाएगा, जोकि उन्हें पानी से होने वाले नुकसान से बचाएगा। इस तकनीक के डिजाइन व कमीशनिंग तकनीकी कर्मियों को आईआईटी मद्रास, आईआईटी रुड़की और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बैंगलोर प्रशिक्षित करेंगे।

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केंद्रीय वस्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मंत्रालय ने सोमवार को बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (सड़क, राजमार्ग, रेलवे, जल संसाधन) में जीओ-टेक्सटाईल्स के अनुप्रयोग से जुड़े डिजाइन/कमीशनिंग तकनीकी कर्मियों के कौशल प्रशिक्षण की पायलट परियोजना को मंजूरी दी है। इसके लिए भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर के प्रोफेसर जीआई.शिवकुमार बाबू , भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास के प्रोफेसर राजगोपाल करपुरापु और  भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के प्रोफेसर सत्येंद्र मित्तल सहयोग करेंगे।
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योजना के तहत एक बैच में कम से कम 75 और अधिक से अधिक 100 उम्मीदवार होंगे। पायलट चरण के दौरान इन तीनों संस्थानों में से दो-दो बैच निर्धारित किये जाएंगे। इसके अलावा, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (एनटीटीएम) के मिशन निदेशालय या वस्त्र मंत्रालय द्वारा समीक्षा के तहत विशेष कौशल विकास पाठ्यक्रम भी बनेगा।
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यह संस्थान इन पाठ्यक्रमों को ‘नो-प्रॉफिट/नो-लॉस’ के आधार पर आयोजित करेंगे। संस्थान इन पाठ्यक्रमों का विज्ञापन/प्रचार करेंगे और इच्छुक तथा योग्य उम्मीदवारों (जो प्रासंगिक शैक्षिक योग्यता रखते हों और इस क्षेत्र से संबंधित पर्याप्त अनुभव रखने वाले भारतीय नागरिक हों) से आवेदन आमंत्रित करेंगे।

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