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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Uneven pace of 27 STP projects; work awarded for only 11.

Delhi NCR News: 27 एसटीपी की परियोजना की रफ्तार असमान, 11 का ही काम आवंटित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 16 Aug 2026 07:00 PM IST
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यमुना की सफाई के लिए 3104 करोड़ की है परियोजना, 15 एसटीपी के टेंडर मिले, दिल्ली जल बोर्ड के समक्ष रखे जाएंगे, एक के लिए निविदा प्रक्रिया जारी
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। यमुना में पहुंच रहे प्रदूषित पानी को रोकने और दिल्ली की सीवेज उपचार क्षमता बढ़ाने के लिए 3104.57 करोड़ रुपये की लागत वाली 27 एसटीपी की परियोजना आगे तो बढ़ी है, लेकिन काम की रफ्तार एक समान नहीं है। दिल्ली सरकार की 28 जुलाई को हुई समीक्षा के अनुसार 27 में से 11 एसटीपी का काम आवंटित हो चुका है। 15 एसटीपी के टेंडर प्राप्त हो गए हैं, जिन्हें दिल्ली जल बोर्ड के समक्ष रखा जाना है। वहीं, एक एसटीपी के लिए काम आवंटित करने के लिए निविदा आमंत्रित की गई है।
परियोजना में 27 विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के अलावा टर्मिनल सीवेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस), दिल्ली गेट में 10 एमजीडी क्षमता का एसटीपी, संबंधित सीवर लाइन और हाउस सीवर कनेक्शन समेत अन्य कार्य शामिल हैं। इसका उद्देश्य नए उपचार संयंत्र स्थापित करने के साथ सीवेज को घरों और इलाकों से एसटीपी तक पहुंचाने वाली व्यवस्था को भी मजबूत करना है।
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दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार राजधानी में करीब 8,100 किलोमीटर लंबा सीवर नेटवर्क है। इसके अलावा 58 अपशिष्ट जल पंपिंग स्टेशन और उपचार संयंत्र संचालित हैं। बोर्ड ने 2031 तक बिना सीवर वाले सभी क्षेत्रों को सीवर सुविधा से जोड़ने और आबादी के अनुरूप सीवरेज ढांचे का विस्तार करने की योजना बनाई है।
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दिल्ली सरकार की अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी में करीब 800 एमजीडी सीवेज पैदा होता है। इसमें से करीब 142 एमजीडी सीवेज 22 प्रमुख नालों के जरिये बिना उपचार यमुना में पहुंच रहा है। ऐसे में सीवेज उपचार क्षमता बढ़ाने के साथ उसे उपचार संयंत्रों तक पहुंचाने के लिए जरूरी नेटवर्क तैयार करना यमुना प्रदूषण कम करने की अहम कड़ी माना जा रहा है।
फिलहाल परियोजना में सबसे बड़ा हिस्सा उन 15 एसटीपी का है, जिनके टेंडर प्राप्त हो चुके हैं और अब बोर्ड स्तर की प्रक्रिया पूरी होनी बाकी है। 11 एसटीपी में काम आवंटित होने के बाद निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ने की स्थिति में है। एक अन्य एसटीपी के लिए निविदा आमंत्रित किए जाने से परियोजना के बाकी हिस्से की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।


यमुना के लिए क्यों महत्वपूर्ण
यमुना में प्रदूषण की बड़ी समस्या सीवेज से जुड़ी है। दिल्ली में पैदा होने वाले करीब 800 एमजीडी सीवेज में से लगभग 142 एमजीडी के बिना उपचार नालों के जरिये नदी में पहुंचने की बात अध्ययन रिपोर्ट में सामने आई है। ऐसे में एसटीपी की क्षमता बढ़ाने के साथ सीवर लाइन और हाउस सीवर कनेक्शन विकसित करना जरूरी है। 3104.57 करोड़ रुपये की परियोजना में इन सभी पहलुओं को शामिल किया गया है, जिससे सीवेज को स्रोत से उपचार संयंत्र तक पहुंचाने और उपचार के बाद ही उसका निस्तारण करने की व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।
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