UER Delhi : 20 साल की जद्दोजहद के बाद तैयार हुआ अहम मार्ग, 2005 में किया गया था भूमि अधिग्रहण
राजधानी के बाहरी हिस्सों को जोड़ने वाली ये परियोजना करीब दो दशक से अधर में लटकी हुई थी। यह परियोजना कानूनी-राजनीतिक विवादों से जूझ रही थी। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी इस पर प्रकाश डाला। हालांकि, वे इस बारे में विस्तार से बताने में बचते दिखाई दिए।
विस्तार
राजधानी वासियों को लंबी प्रतीक्षा के बाद अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (यूईआर-2) के तौर पर बड़ी सौगात मिली है। राजधानी के बाहरी हिस्सों को जोड़ने वाली ये परियोजना करीब दो दशक से अधर में लटकी हुई थी। यह परियोजना कानूनी-राजनीतिक विवादों से जूझ रही थी। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी इस पर प्रकाश डाला। हालांकि, वे इस बारे में विस्तार से बताने में बचते दिखाई दिए।
दरअसल, यूईआर-2 का विचार वर्ष 2005 में सामने आया था। केंद्र सरकार ने उस समय दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को इसे बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी लेकिन जैसे-जैसे परियोजना आगे बढ़ी इसके रास्ते में कॉलोनियों और निजी स्कूलों की बाधाएं आ गईं। प्रभावित लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया जिसके बाद परियोजना बार-बार अटकती रही।
डीडीए को कोर्ट के आदेश के तहत मटियाला और नजफगढ़ इलाके में यूईआर-2 का मार्ग बदलना पड़ा। इसके बावजूद समस्या हल नहीं हुई क्योंकि इन दोनों इलाकों में मार्ग बदलने से प्रभावित हुए लोग कोर्ट में चले गए। वहीं, विकासपुरी और मुंडका विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में मकान तोड़े जाने थे। इस कारण लोगों का विरोध और राजनीतिक दलों का दबाव भी परियोजना की राह में रोड़ा बना।
दिल्ली व हरियाणा के गुरुग्राम के बीच यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने द्वारका एक्सप्रेसवे बनाने का निर्णय लिया। इसे हरियाणा की सीमा में हरियाणा सरकार और दिल्ली की सीमा में डीडीए को बनाने की जिम्मेदारी दी गई।
परियोजना को नए सिरे से तैयार किया
एनएचएआई ने परियोजना को नए सिरे से तैयार किया। विवादित कॉलोनियों और कुछ स्कूलों को बाहर रखते हुए रोड का नक्शा बदला गया। उसने मटियाला व नजफगढ़ इलाके में कुछ कालोनियों के बीच की जगह नजफगढ़ ड्रेन के साथ और ऊपर से रोड बनाने का निर्णय लिया। साथ ही, रानी खेड़ा व रसूलपुर गांव में दक्षिण दिशा, मदनपुर डबास गांव और मोहम्मदपुर मजरी गांव में पूर्वी दिशा से रोड बनाने की योजना रद्द की क्योंकि इन गांव की में बसी कालोनियों में बड़ी संख्या में मकान तोड़ने पड़ते। इसके बाद रानी खेड़ा, रसूलपुर व मदनपुर डबास में कराला और मोहम्मदपुर मजरी गांव में दक्षिण दिशा से रोड बनाने का निर्णय लिया।
चुनौतियों से पार पाया
परियोजना को पूरा करने की राह में सबसे बड़ी चुनौतियां भूमि अधिग्रहण, कॉलोनियों का विरोध और कानूनी पेच रहे। मटियाला, नजफगढ़, विकासपुरी और मुंडका जैसे इलाकों में स्थानीय लोगों को मकान टूटने का डर था। इसके अलावा नजफगढ़ और मटियाला में कोर्ट के आदेशों के चलते बार-बार डिजाइन बदलना पड़ा। कई साल तक मामले अदालतों और फाइलों में उलझे रहे।
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