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कैब रेप पीड़िता के पिता ने पहली बार कही दिल की बात

Fri, 12 Dec 2014 11:43 PM IST
Updated Fri, 12 Dec 2014 11:43 PM IST
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Uber cab rape case: Victim's father version.

उबर कैब में गुड़गांव की आईटी कंपनी में काम करने वाली 27 वर्षीय लड़की के साथ हुई दर्दनाक घटना के बाद पहली बार उनके पिता ने बेटी के दुख को बयां किया है।

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इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए पीड़िता के पिता ने बताया कि ठीक दो साल पहले 16 दिसंबर 2012 की घटना के विरोध में उनकी बेटी ने भी सड़क पर जाकर विरोध किया था।
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दिल्ली की सड़क पर चलती बस में निर्भया के साथ हुए दहला देने वाले कांड के बाद उनकी बेटी के साथ वह खुद भी विरोध प्रदर्शन में जाया करते थे। कैंडल लाइट मार्च सहित सहित सभी विरोध प्रदर्शनों में वह अपनी बेटी के साथ हिस्सा लेते थे।

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उन्होंने बताया कि चाहे इंडिया गेट हो, जंतर मंतर हो या अशोक रोड उसने सभी जगह जाकर विरोध प्रदर्शनों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया, लेकिन अब वह किसी से नहीं मिलना चाहती

'किसी से नहीं मिलना चाहती बेटी'

Uber cab rape case: Victim's father version.

16 दिसंबर 2012 की घटना से इतना आहत थी कि दिन भर इसी के बारे में बात करती रहती थी। उसने अपने दोस्तों को भी निर्भया कांड के विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

पीड़िता के पिता ने बताया कि काले धागे बांधने के अलावा वही भी रोज इस प्रदर्शन में भाग लेने जाया करते थे। इस आंदोलन में शामिल होने का बड़ा कारण था कि इसे कोई एनजीओ या राजनीतिक दल प्रायोजित नहीं कर रहा था।

यह लोगों का गुस्सा था जो खुद ही बाहर आ रहा था। उत्तरी दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहने वाले पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी बेटी किसी भी राजनीतिक दल के नेता या गैर सरकारी संस्‍था के प्रतिनिधि से मिलना नहीं चाहती।

पुलिस के मुरीद हुए पीड़िता के पिता

Uber cab rape case: Victim's father version.

पीड़िता के पिता का मानना है कि आज-कल किसी में भी इंसानियत नहीं बची है। परवाह का दिखावा करने वाले लोग या तो राजनीतिक फायदे के लिए आते हैं या कोई निहित स्वार्थ होता है।

मेरी बेटी या हमारा परिवार ऐसे लोगों से दूर रहना चाहते हैं। हम पुलिस के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने शानदार काम किया है। पुलिस ने केवल 24 घंटो में आरोपी को पकड़ कर दिखा दिया कि इस मामले में वह कितने स‌क्रीय हैं।

हालांकि पीड़िता के पिता ने यह माना कि 16 दिसंबर 2012 की घटना के बाद दिल्ली पुलिस से उनका भरोसा उठ गया था। लेकिन उनकी बेटी के मामले में पुलिस की तत्परता ने उन्हें दिल्ली पुलिस का मुरीद बना दिया है।

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